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पीरियड्स में तेज दर्द को न करें नजरअंदाज, ये संकेत हो सकते हैं गंभीर बीमारी का इशारा

तेज पीरियड दर्द के पीछे छिपी हो सकती है गंभीर समस्या, जानिए कब लेनी चाहिए डॉक्टर की मदद.

पीरियड्स में तेज दर्द को न करें नजरअंदाज, ये संकेत हो सकते हैं गंभीर बीमारी का इशारा
पीरियड दर्द क्यों होता है.
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पीरियड्स के दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द होना आम बात है. मासिक धर्म के समय गर्भाशय की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं, जिससे ऐंठन या क्रैम्प्स महसूस हो सकते हैं. हल्का या मध्यम दर्द, जो पीरियड्स शुरू होने के आसपास हो और कुछ दिनों में कम हो जाए, सामान्य माना जा सकता है. लेकिन हर बार होने वाला तेज या असहनीय दर्द सामान्य पीरियड्स का हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

कब डॉक्टर के पास जाना है जरूरी-

अगर दर्द इतना अधिक है कि रोजमर्रा के काम, पढ़ाई या ऑफिस जाना प्रभावित हो रहा है, बार-बार दर्द निवारक दवाओं की जरूरत पड़ती है या दर्द के कारण सामान्य गतिविधियां रोकनी पड़ती हैं, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है. इसी तरह यदि समय के साथ पीरियड्स का दर्द बढ़ रहा है या पहले की तुलना में अचानक बहुत ज्यादा हो गया है, तो इसके पीछे किसी डॉक्टर सलाह और जांच की आवश्यकता हो सकती है.

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किन कारणों से होता है तेज दर्द-

पीरियड्स में ते दर्द एंडोमेट्रियोसिस, एडेनोमायोसिस, गर्भाशय में फाइब्रॉइड, पेल्विक इंफेक्शन या अन्य स्त्री रोग संबंधी समस्याएं शामिल हो सकती हैं. एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसी कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगती हैं और इससे पीरियड्स के दौरान काफी दर्द हो सकता है. कुछ महिलाओं में इसके साथ संभोग के दौरान दर्द, मल त्याग या पेशाब करते समय परेशानी और गर्भधारण में कठिनाई भी हो सकती है.

किन संकेत को न करें नजरअंदाज-

कुछ संकेत ऐसे हैं जिन पर विशेष ध्यान देना चाहिए. बहुत अधिक रक्तस्राव, बड़े-बड़े रक्त के थक्के आना, पीरियड्स के बीच रक्तस्राव, असामान्य योनि स्राव, बुखार, चक्कर या कमजोरी के साथ दर्द होना डॉक्टर से मिलने का कारण है. यदि अचानक बहुत तेज पेट दर्द हो, खासकर गर्भधारण की संभावना के साथ, तो इसे आपात स्थिति मानकर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए.

हर महिला में दर्द की तीव्रता अलग हो सकती है, इसलिए केवल यह मान लेना उचित नहीं है कि “पीरियड्स में दर्द तो होता ही है.” दर्द की वजह जानना और उसका सही इलाज संभव है. डॉक्टर जरूरत के अनुसार मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच और अल्ट्रासाउंड जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को सहने को मजबूरी न समझें. यदि दर्द आपकी सामान्य जिंदगी को प्रभावित कर रहा है या उसके साथ ऊपर बताए गए चेतावनी संकेत मौजूद हैं, तो समय पर स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है. सही कारण की पहचान होने पर उपचार के माध्यम से दर्द और उससे जुड़ी परेशानियों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.

लेखक के बारे में-

डॉ. पलक दीवान स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (Consultant Gynecologist) हैं, जो मिनिमली इनवेसिव और लैप्रोस्कोपिक गायनेकोलॉजिकल सर्जरी में विशेषज्ञता रखती हैं. उन्होंने डीवाई पाटिल स्कूल ऑफ मेडिसिन, नवी मुंबई से MBBS और हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, देहरादून से एमएस (ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी) किया है. गुरुग्राम में पद्मश्री डॉ. अलका कृपलानी के मार्गदर्शन में FMAS फेलोशिप भी पूरी की है. डॉ. दीवान किशोरावस्था से लेकर मेनोपॉज तक महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए साक्ष्य-आधारित और समग्र उपचार प्रदान करती हैं. PCOS से खुद उबरने के अपने अनुभव के बाद वह 1000 से अधिक महिलाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और हार्मोनल स्वास्थ्य बेहतर करने में मदद कर चुकी हैं.

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