कैंसर एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जो आज के समय में भारत समेत पूरी दुनिया में तेजी से पैर पसार रही है. कैंसर का पता व्यक्ति को तीसरी या चौथी स्टेज में चलता है और उसके बाद इसका इलाज लगभग नामुमकिन हो जाता है. इस बीमारी का मॉर्डन इलाज काफी ज्यादा महंगा है . लेकिन क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेदिक उपचार से इस बीमारी को मात दी जा सकती है. इस बात को अरुणाचल प्रदेश की यानुंग जमोह लेगो ने सही साबित किया है. बता दें कि अरुणाचल प्रदेश की यानुंग जमोह लेगो एक मशहूर हर्बलिस्ट हैं और कई सालों से कैंसर, डायबिटीज और अर्थराइटिस और हाई ब्लड प्रेशर जैसी खतरनाक और जानलेना बीमारियों का इलाज कर रही हैं. खास बात यह है कि यानुंग जमोह लेगो ने उन लोगों का भी इलाज किया है जो इन बीमारियों की तीसरी या चौथी स्टेज में थे. तो आइए जानते हैं कौन हैं यानुंग जमोह लेगो और कैसे उन्होंने लोगों को इस खतरनाक बीमारियों से आजाद करवाया है.
कौन हैं यानुंग जमोह लेगो
अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले के सिका टोडे (Sika Tode) गांव से ताल्लुक रखने वाली एक प्रसिद्ध हर्बलिस्ट और पारंपरिक चिकित्सक हैं. उन्हें 'जड़ी-बूटियों की रानी' भी कहा जाता है. यानुंग जमोह लेगो को साल 2024 में राष्ट्रपति द्वारा पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया. यानुंग जमोह लेगो ने अपने अनुभव और ज्ञान के दम पर पिछले 29 वर्षों में लगभग 3 लाख से ज्यादा मरीजों की मदद की है. वह अपनी संस्कृति और पारंपरिक औषधीय ज्ञान को बचाने और आगे बढ़ाने का भी काम कर रही हैं.
तीन लाख से ज्यादा लोगों की मदद
अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले के सिका टोडे गांव में स्थित उनके हर्बल क्लिनिक में अब तक 3 लाख से ज्यादा लोग पहुंच चुके हैं. यहां आने वाले कई मरीजों को कैंसर, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों में राहत मिली है. यानोंग पारंपरिक जड़ी बूटियों के ज्ञान के आधार पर लोगों की मदद करती हैं.
पिता से सीखा जड़ी बूटियों का ज्ञान
यानुंग जमोह लेगो को जड़ी बूटियों का ज्ञान अपने पिता से मिला, जो अपने समय के बहुत बड़े हर्बल हीलर थे. उन्होंने करीब 15 सालों तक अपने पिता के साथ रहकर जड़ी बूटियों और पारंपरिक उपचार की बारीकियां सीखीं. उन्होंने असम एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी से बीएससी और एमएससी की पढ़ाई की. इसके अलावा उन्होंने साल 1998 से 2003 तक अरुणाचल प्रदेश सरकार के एग्रीकल्चर विभाग में भी काम किया. यानुंग जमोह लेगो ने साल 1995 में हर्बलिस्ट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी.
मिल चुके हैं कई सम्मान
पद्म श्री से सम्मानित होने से पहले भी यानुंग जमोह लेगो को सृष्टि सम्मान (2007), पारंपरिक वैद्य रत्न (2013) और अरुणाचल स्टेट अवॉर्ड (2019) जैसे कई सम्मान मिल चुके हैं.
शुरू की एक खास संस्था
यानुंग जमोह लेगो ने साल 2009 में Indigenous Herbal Heritage नाम से एक संस्था की शुरुआत की. इस संस्था का उद्देश्य औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देना और लोगों को हर्बल मेडिसिन के बारे में जागरूक करना है. अब तक 1 लाख से ज्यादा लोगों को हर्बल उपचार के बारे में जानकारी दी जा चुकी है. साथ ही हर साल करीब 5,000 औषधीय पौधे लगाए जाते हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह पारंपरिक ज्ञान सेफ रह सके.
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