आज के समय में दिल से जुड़ी बीमारियां आम हो गई है. आए दिन आप हार्ट सर्जरी की खबरें सुनते हैं. अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर एक बार दिल का ऑपरेशन (Cardiac Surgery) हो गया, तो पूरी जिंदगी बिस्तर पर या बहुत सावधानी में कटेगी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मॉर्डन मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है कि हार्ट सर्जरी के बाद भी आप न सिर्फ नॉर्मल लाइफ जी सकते हैं, बल्कि स्विमिंग, साइकलिंग और मैराथन तक दौड़ सकते हैं? जी हां आपने बिल्कुल सही सुना. इंस्टिट्यूट ऑफ हार्ट लंग डिजीज रिसर्च सेंटर (IHLD) के चेयरमैन और मशहूर सर्जन डॉ. राहुल चंदोला ने इस बारे में बेहद चौंकाने वाली और राहत देने वाली जानकारी शेयर की है.

डॉ. राहुल चंदोला का कहना है कि आज के समय में हार्ट सर्जरी का मकसद सिर्फ मरीज की जान बचाना नहीं रह गया है. अब डॉक्टर इस बात पर जोर देते हैं कि मरीज सर्जरी के बाद फिर से उसी फुर्ती और जोश के साथ अपनी एक्टिव लाइफ में वापस लौट सके. उनके मुताबिक, कई मरीज पूछते हैं कि क्या मैं कभी फिर से मैराथन दौड़ पाऊंगा? और डॉक्टर का जवाब होता है हां, बिल्कुल!
नॉर्मल लाइफ के लिए कितने दिन लगते हैं?
आमतौर पर लोगों को लगता है कि रिकवरी में सालों लग जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं है.
सर्जरी के कुछ ही दिनों के भीतर हल्की वॉक और हल्के काम शुरू किए जा सकते हैं.
1 से 2 हफ्ते में मरीज धीरे-धीरे मीडियम एक्सरसाइज करना शुरू कर सकता है.
10 से 12 हफ्ते में अगर मरीज की रिकवरी अच्छी है और दिल सही से काम कर रहा है, तो करीब 3 महीने के भीतर वह पूरी तरह से एथलेटिक एक्टिविटी जैसे दौड़ना, तैरना और भारी एक्सरसाइज शुरू कर सकता है.
डॉक्टर ने बताया कि आजकल ज्यादातर मरीजों को सर्जरी के 5 से 7 दिनों के भीतर अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है. युवा मरीज तो 4 दिनों में ही घर चले जाते हैं और डिस्चार्ज के वक्त वे बिना किसी सहारे के खुद पैदल चल रहे होते हैं.

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तकनीक ने बनाया रिकवरी को आसान-
हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. चंदोला ने बताया कि अब रिकवरी पर नजर रखने के लिए iLive Connect जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल हो रहा है. यह एक ऐसी तकनीक है जो घर बैठे मरीज की सेहत पर नजर रखती है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल होता है, जो मरीज के शरीर में होने वाले छोटे से छोटे बदलाव को भांप लेती है और डॉक्टरों को अलर्ट कर देती है. इससे मरीजों को घर पर भी अस्पताल जैसा भरोसा मिलता है.
किस उम्र में कराएं हार्ट चेकअप?
डॉक्टर ने सलाह दी है कि हमें दिल की जांच के लिए बुढ़ापे का इंतजार नहीं करना चाहिए. 30 साल की उम्र के बाद एक बार बेसलाइन हार्ट रिस्क चेकअप जरूर कराना चाहिए. 40 साल की उम्र के बाद हार्ट चेकअप को अपनी रूटीन का हिस्सा बना लेना चाहिए.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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