How To Raise Your Kid: आज के समय में बच्चों को बड़ा करना और उनका पालन-पोषण करना एक कठिन चुनौती सा बन गया है. आज के दौर में जब इंटरनेट का हर समय बोल-बाला है जिसमें बच्चे भी हर समय बिजी रहते हैं ऐसे में उनको सही गाइडेंस देना और उनके सवालों के जवाब देना और उनको सही डायरेक्शन में ले जाना बहुत डिफिकल्ट होता है. वहीं बच्चे आपसे बहस भी करते हैं अपनी बात भी रखते हैं और आंखे बंद करके वो आपकी बात सुन लें. तो चलिए जानते हैं कि क्या आपके बच्चे का आपसे बहस करना सही है. अगर वो आपसे बहस कर रहा है तो आपको उसे कैसे डील करना चाहिए.
क्या बच्चों का आपसे बहस करना ठीक है
काजोल ने एक फिल्म के प्रमोशन में बताया कि जब बच्चा आपसे बहस करता है तो ये दिखाता है कि उसकी खुद की एक सोच है और खुद के विचार हैं. जब बच्चे आपसे बहस करते हैं, मतलब वे सिर्फ “हाँ कहने वाले” नहीं हैं, बल्कि उनकी अपनी राय रखते हैं और वो सोचते हैं, समझते हैं, सवाल करते हैं. उनका ऐसा करना उनकी पर्सनैलिटी, सेल्फ कांफिडेंस और स्वतंत्र सोच को दर्शाता है. ऐसा करना उनके इमोशनल ग्रोथ और डिसीजन लेने की क्षमता मजबूत होती है.
कैसा होना चाहिए तरीका
ऐसा माना जाता है कि अगर बहस करने का तरीका हेल्दी और सम्मान के साथ किया गया है तो वो सही है. ऐसे में बच्चे सीखते हैं कि हर बात पर हां कहना जरूरी नहीं है, वो अपनी सोच को रख सकते हैं.
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अगर बच्चा दोषों, सवालों और आपकी बात पर सहमत ना होने पर खुलकर बोल सकें तो वो दबाव महसूस नहीं करेंगे. ऐसा करने से उसे समझ आएगा कि घर में एक सुरक्षित माहौल है और वो अपनी बात कहने से डरेंगे नहीं. अगर बात और बहस सही तरीके से होगी तो इसके नुकसान नहीं होंगे बल्कि ये आपके और बच्चे के रिलेशन के लिए सही होगा.
अगर आप बच्चे से झगड़ा या बहस गुस्से, चीख-पुकार, अपमान या डराने-धमकाने के साथ करेंगे तो ऐसे में बच्चा अनसेफ, स्ट्रेस और डर महसूस करेगा.
नोट- इस बात में कोई गलत बात नहीं है अगर बच्चे अपने माता-पिता से बहस करते हैं, बल्कि ये स्वास्थ्यपूर्ण हो सकता है. बशर्ते कि आप लोगों के बीच हुई बातचीत में सम्मान, खुलापन और समझ-बूझ के साथ हो. इससे बच्चों में आत्म-विश्वास बढ़ता है, वे अपनी राय रखने लगते हैं, और भविष्य में बेहतर निर्णय ले पाते हैं.
किन बातों का रखें ध्यान
- बच्चे की बात ध्यान से सुनें. जल्दी-जल्दी में अपने बच्चे की बात ना सुनें उनको पूरा टाइम दें.
- अपनी भावनाओं को शांत रखें गुस्सा करने से या चिल्लाहट से बचें.
- बहस के बाद हल निकालें, अपनी राय बताएं.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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