विज्ञापन

जिस बीमारी से भारत में होती हैं हजारों मौतें, उस पर भूटान ने कैसे पाया काबू?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भूटान के 'रेबीज फ्री' होने का ऐलान कर दिया है. भूटान में जून 2023 के बाद से कुत्तों के काटने से होने वाले रेबीज से कोई मौत नहीं हुई है.

जिस बीमारी से भारत में होती हैं हजारों मौतें, उस पर भूटान ने कैसे पाया काबू?
भूटान साउथ-ईस्ट एशिया का पहला रेबीज-फ्री देश बन गया है.
IANS
नई दिल्ली:

भूटान ने कमाल कर दिया है. भूटान साउथ-ईस्ट एशिया का पहला मुल्क बन गया है, जो रेबीज से पूरी तरह फ्री हो गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कंफर्म कर दिया है कि भूटान ने कुत्तों से फैलने वाले रेबीज को पूरी तरह से खत्म कर दिया है.

WHO के मुताबिक, रेबीज एक वायरल बीमारी है जो लगभग हमेशा जानलेवा साबित होती है. हालांकि, रेबीज से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है. कुत्तों के वैक्सीनेशन के अलावा अगर मरीज को सही समय पर इलाज मिले तो वायरस को नर्वस सिस्टम तक पहुंचने से रोका जा सकता है. 

WHO के प्रमुख डॉ. ट्रेडोस घेब्रेयेसस ने इस कामयाबी के लिए भूटान को बधाई दी. WHO ने 2030 तक रेबीज से होने वाली मौतों को खत्म करने का टारगेट रखा है. उन्होंने कहा कि भूटान की कामयाबी दिखाती है कि इंसानों, जानवरों और पर्यावरण की सेहत आपस में जुड़ी हुई है. अगर लड़ाई मिलकर लड़ी जाए तो रेबीज से जीता जा सकता है.

WHO कब 'रेबीज फ्री' घोषित करता है?

किसी देश को रेबीज फ्री कब घोषित किया जाएगा, इसके लिए WHO के अपने पैमाने हैं. इनके मुताबिक, अगर किसी देश में लगातार दो साल तक रेबीज से कोई मौत नहीं हुई तो मान लिया जाएगा कि वहां रेबीज खत्म हो गया है.

इसके अलावा, देशों को इस बात के पक्के सबूत देने पड़ते हैं कि उनके यहां रेबीज को दोबारा फैलने से रोकने के लिए सर्विलांस, लैब में जांच, जानवरों के वैक्सीनेशन और बीमारी से निपटने की पूरी तैयारी है.

भूटान में जून 2023 के बाद से कुत्तों से होने वाले रेबीज से इंसानों की मौत का कोई मामला सामने नहीं आया है. साथ ही उसने यह भी साबित किया कि उसके पास इस बीमारी को दोबारा फैलने से रोकने के लिे जरूरी सिस्टम है.

यह भी पढ़ेंः Explained: बिहार की बाढ़ को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने की मांग क्यों कर रहे तेजस्वी? इससे क्या होगा फायदा

ये वीडियो देखें- कुत्ते ने छात्र को काटा, फिर छात्र ने 18 छात्रों को काटा

भूटान ने ये सब कैसे किया?

भूटान ने एक दशक तक एक ही आइडिया पर काम किया- 'One Health', जिसका मतलब है- इंसान की हेल्थ, जानवर की हेल्थ और पर्यावरण की हेल्थ, तीनों जुड़ी हुई हैं. अलग-अलग डिपार्टमेंट में नहीं, सब मिलकर काम करेंगे.

भूटान ने 'नेशनल एक्सेलेरेटेड डॉग पॉपुलेशन मैनेजमेंट एंड रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम' शुरू किया. इसके तहत बड़े पैमाने पर कुत्तों का वैक्सीनेशन किया गया, उनकी आबादी को कंट्रोल करने के लिए नसबंदी की गई, निगरानी रखी गई और लोगों के बीच भी जागरूकता फैलाने पर जोर दिया.

WHO के साउथ-ईस्ट एशिया रीजन के इंचार्ज डॉ. नीलेश बुद्धा ने कहा, 'भूटान ने दिखाया है कि जब मजबूत राष्ट्रीय नेतृत्व, 'वन हेल्थ' अप्रोच और समुदाय एक साझा लक्ष्य के लिए साथ आते हैं, तो रेबीज को खत्म करना मुमकिन है.'

भूटान ने सभी आवारा कुत्तों की नसबंदी करने वाला पहला देश भी बन गया है. WHO ने बताया कि भूटान ने अपने सभी 20 जिलों में रेबीज का इलाज फ्री रखा, साथ ही बड़े पैमाने पर कुत्तों का वैक्सीनेशन भी किया.

यह भी पढ़ेंः बिहार में हर साल बाढ़ तो आती है लेकिन वजह नेपाल ही नहीं... नदियों के रूट से समझिए पूरी कहानी

लेकिन भारत में अब भी हजारों मौतें!

WHO के मुताबिक, दुनिया में कुत्तों के काटने से होने वाले रेबीज के कारण 36% मौतें भारत में ही होती है. भारत में हर साल हजारों लोगों की मौत इससे होती है. WHO का अनुमान है कि 2024 में भारत में कुत्तों के काटने से होने वाले रेबीज से 5,726 मौतें हुई थीं.

हालांकि, केंद्र सरकार के आंकड़े अलग ही तस्वीर दिखाते हैं. केंद्र सरकार के मुताबिक, 2024 में कुत्तों के काटने के 37.15 लाख से ज्यादा मामले सामने आए थे. इस साल रेबीज से 54 लोगों की मौत हुई थी.

भूटान की तरह भारत में भी पहले से ही ऐसे सिस्टम मौजूद हैं जो रेबीज को खत्म करने में मदद कर सकते हैं. 'एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स 2023' के तहत आवारा कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन का प्रावधान है, जबकि 'नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम' इस बात पर जोर देता है कि जानवरों के काटने का शिकार हुए लोगों को जल्द से जल्द और आसानी से इलाज मिले.

भूटान का एक्सपीरियंस रेबीज को खत्म करना सिर्फ वैक्सीनेशन या इलाज पर निर्भर नहीं हो सकता. रेबीज को खत्म करना है तो कुत्तों के वैक्सीनेशन के साथ-साथ उनकी आबादी पर कंट्रोल और इलाज तक पहुंच बढ़ाना होगा.

लेकिन अफसोस की बात यह है कि जिस वक्त भूटान के रेबीज फ्री होने का ऐलान किया गया, उस वक्त भारत में बड़े पैमाने पर एंटी-रेबीज वैक्सीन 'अभयरैब' के एक बैच को ड्रग रेगुलेटर ने लो क्वालिटी वाला और संभावित रूप से नकली घोषित कर दिया. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने 5 सितंबर को अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया था. 

'अभयरैब' वही वैक्सीन है जो भारत में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होती है. इसे इंडियन इम्युनोलॉजिकल लिमिटेड बनाती है. इस कंपनी का रेबीज वैक्सीन मार्केट पर 40% शेयर है. हालांकि, कंपनी का कहना है कि ड्रग रेगुलेटर ने वैक्सीन के जिस बैच को लो-क्वालिटी और नकली घोषित किया है, उसे उसने बनाया ही नहीं था.

यह भी पढ़ेंः कुत्ते ने काट लिया तो कितने घंटे के अंदर लगवाएं रेबीज वैक्सीन? जानिए सही टाइमिंग

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Rabies, Rabies Case India, Bhutan, WHO, Rabies Control Measures
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com