अक्सर लोग होम्योपैथी शुरू करते समय यही सवाल पूछते हैं कि आखिर दवा कितने दिनों में असर दिखाती है. क्या कुछ घंटों में राहत मिल सकती है या महीनों तक इंतजार करना पड़ता है? इसका जवाब हर व्यक्ति और बीमारी के अनुसार अलग हो सकता है. इस बारे में अधिक जानकारी के लिए एनडीटीवी ने बात की होम्योपैथिक डॉक्टर अन्नपूर्णा राजभर से. वे वर्तमान में डॉक्टर रेकवेग के साथ कंसल्टिंंग डॉक्टर जुड़ी हुई हैं. बताती हैं कि नई और अचानक हुई बीमारियों में असर अपेक्षाकृत जल्दी महसूस हो सकता है, जबकि पुरानी समस्याओं में सुधार दिखने में अधिक समय लग सकता है.
होम्योपैथी का असर किन बातों पर निर्भर करता है?
- बीमारी कितनी पुरानी है
- मरीज की उम्र
- लाइफस्टाइल
- दवा नियमित ली जा रही है या नहीं
- फॉलो-अप हो रहा है या नहीं
होम्योपैथी की दवा कितने दिन में असर करती है? जाने पूरी सच्चाई!
डॉ. अन्नपूर्णा राजभर बताती हैं कि अक्सर लोग जब हमारे पास आते हैं तो उनका पहला सवाल यही होता है "डॉक्टर साब, होम्योपैथी की गोलियां असर करने में कितना टाइम लगाती हैं?" अगर आपके मन में भी यही सवाल है, तो इसका सीधा जवाब है: आपकी बीमारी कितनी पुरानी है, असर उसी पर निर्भर करता है. अक्सर नई बीमारी में असर काफी जल्दी दिखता है, जबकी पुरानी बीमारी में थोड़ा धेर्य (patience) और रेगुलर इलाज की जरुरत होती है.
1. नई या अचानक हुई परेशानियों में कितने घंटे में काम करती है होम्योपैथीक दवा (Acute Conditions)
डॉ. अन्नपूर्णा राजभर के मुताबिक अगर आपको अचानक कोई समस्या हुई है, जैसे सर्दी-जुकाम या बुखार, गले में खराश / दर्द, पेट खराब होना या दस्त (Loose Motions), तो ऐसी एक्यूट समस्याओं में दवा लेने के कुछ ही घंटों से लेकर 2-3 दिनों के भीतर आपको आराम महसुस होने लगता है.
2. लंबे समय से चली आ रही बीमारियों में कितना समय लगता है? (Chronic Conditions)
अगर समस्या काफी पुरानी है, जैसे स्किन से जुड़ी पुरानी शिकायतें, घुटनों की समस्या, बार-बार होने वाली पेट संबंधी दिक्कतें, एलर्जी, माइग्रेन या गठिया, तो इनमें सुधार दिखने में अधिक समय लग सकता है.
डॉ. अन्नपूर्णा राजभर बताती हैं कि ऐसे मामलों में रेगुलर फॉलो-अप बहुत जरूरी होता है, क्योंकि इससे डॉक्टर यह समझ पाते हैं कि इलाज सही दिशा में आगे बढ़ रहा है या नहीं. इसलिए मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना अपना इलाज या दवा खुद से बंद नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे उपचार की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
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क्या होम्योपैथी हर बीमारी में मुख्य इलाज हो सकती है?
डॉ. अन्नपूर्णा राजभर के अनुसार यदि किसी मरीज को कोई गंभीर या जानलेवा बीमारी है, या ऐसी स्थिति है जिसमें ऑपरेशन या सर्जरी की आवश्यकता हो, तो ऐसे मामलों में आधुनिक चिकित्सा (Allopathic Treatment) को प्राथमिक उपचार माना जाता है.
ऐसी परिस्थितियों में होम्योपैथी को मुख्य इलाज की जगह सहायक (Supportive) उपचार के रूप में डॉक्टर की सलाह से लिया जा सकता है. किसी भी गंभीर मेडिकल स्थिति में इलाज का फैसला योग्य चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए.

डॉ. अन्नपूर्णा राजभर
एक नजर में
- सर्दी-जुकाम जैसी नई समस्याओं में अपेक्षाकृत जल्दी आराम महसूस हो सकता है.
- माइग्रेन, एलर्जी, गठिया और स्किन की पुरानी समस्याओं में ज्यादा समय लग सकता है.
- नियमित दवा और फॉलो-अप जरूरी है.
- गंभीर मेडिकल इमरजेंसी में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें.
ध्यान रखने योग्य कुछ जरुरी बातें
दवा नियम से लें: डॉक्टर ने जैसा और जिस टाइम बताया है, दवा वैसे ही लें.
खुद से दवा बंद न करें: बिना पूछे बार-बार दवा बदलना या बिच में इलाज छोड़ देना आपके रिजल्ट को खराब कर सकता है.
इमरजेंसी में सही फैसला लें: अगर कोई गंभीर या जानलेवा स्थिति (जैसे हार्ट अटैक, बहुत तेज एक्सीडेंट या सीवियर इमरजेंसी) हो, तो सिर्फ होम्योपैथी के भरोसे न रहें. ऐसे समय में तुरंत आधुनिक चिकित्सा (Allopathic / Emergency Care) लेना ही सबसे सही और जरुरी कदम है.
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या होम्योपैथी की दवा तुरंत असर करती है?
बीमारी की प्रकृति और व्यक्ति विशेष के अनुसार असर का समय अलग हो सकता है.
पुरानी बीमारी में होम्योपैथी कितने समय तक लेनी पड़ सकती है?
यह बीमारी की अवधि, गंभीरता और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है.
क्या बीच में दवा बंद करने से असर प्रभावित हो सकता है?
बिना डॉक्टर की सलाह के इलाज रोकने से अपेक्षित परिणाम प्रभावित हो सकते हैं.
क्या होम्योपैथी सभी बीमारियों में काम करती है?
इलाज का फैसला हमेशा योग्य डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए.
मेडिकल गाइडेंस:
डॉ. अन्नपूर्णा राजभर (B.H.M.S (H.M.C.H. सोलन) को 7+ वर्षों के क्लीनिकल अनुभव है. वर्तमान में वे Dr. Reckeweg के साथ बतौर कंसल्टिंग होम्योपैथिक डॉक्टर जुड़ी हैं.
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