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क्या जरूरत से ज्यादा ब्लीडिंग या डिस्चार्ज महिलाओं में बन सकता है गायनेकोलॉजिकल कैंसर का कारण?

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार भारत में गायनेकोलॉजिकल कैंसर महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है. इस आर्टिकल में जानें कारण और बचाव.

क्या जरूरत से ज्यादा ब्लीडिंग या डिस्चार्ज महिलाओं में बन सकता है गायनेकोलॉजिकल कैंसर का कारण?
शरीर में दिखें ये 6 बदलाव तो तुरंत जाएं डॉक्टर के पास. (Image Magnific)

महिलाएं अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती है. लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बदलते लाइफस्टाइल के बीच महिलाओं की सेहत को लेकर एक चिंताजनक खबर सामने आई है. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में गायनेकोलॉजिकल कैंसर (Gynecological Cancer) महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.

​यह कैंसर महिलाओं के रिप्रोडक्टिव ऑर्गेन्स जैसे कि यूटरस, ओवरी, सर्विक्स और वल्वा को अपना शिकार बनाता है. अच्छी बात यह है कि अगर हम सही समय पर इसके लक्षणों को पहचान लें और इसे नजरअंदाज न करें, तो इस बीमारी से पूरी तरह बचा जा सकता है.

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महिलाएं शुरूआती इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज. (Image NDTV) 

​क्या होता है गायनेकोलॉजिकल कैंसर?

​सीधे और आसान शब्दों में कहें तो जब महिलाओं के रिप्रोडक्टिव ऑर्गेन्स की सेल्स असामान्य या अजीब तरीके से बढ़ने लगती हैं, तो यह कैंसर का रूप ले लेती हैं. 

गायनेकोलॉजिकल कैंसर के प्रकार- 

  • ​सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer)
  • ​ओवेरियन कैंसर (Ovarian Cancer)
  • ​यूटेराइन कैंसर (Uterine Cancer)
  • ​वजाइनल कैंसर (Vaginal Cancer)
  • ​वल्वर कैंसर (Vulvar Cancer)

​ये सभी कैंसर सुनने में जितने डरावने लगते हैं, थोड़ी सी सावधानी बरतने पर इन्हें हराना उतना ही आसान हो जाता है.

​वजाइनल ब्लीडिंग और डिस्चार्ज- कब नॉर्मल, कब खतरनाक?

​महिलाओं के शरीर में पीरियड्स के दौरान या आम दिनों में थोड़ा-बहुत वजाइनल डिस्चार्ज होना सामान्य बात है. लेकिन अगर यही ब्लीडिंग या डिस्चार्ज अचानक बहुत ज्यादा होने लगे या इसका रंग और गंध बदल जाए, तो अलर्ट होने की जरूरत है.

​सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, असामान्य ब्लीडिंग वल्वर कैंसर के साथ-साथ अन्य गायनेकोलॉजिकल कैंसर का भी शुरुआती संकेत हो सकती है. इसलिए हर महिला को यह समझना बेहद जरूरी है कि उनके शरीर में क्या नॉर्मल है और क्या नहीं.

​CDC के मुताबिक, हर महिला को अपने शरीर में होने वाले इन 6 बदलावों पर खास ध्यान देना चाहिए-

  1. ​पीरियड्स के बिना ब्लीडिंग- अगर दो पीरियड्स के बीच के दिनों में अचानक ब्लीडिंग या स्पॉटिंग दिखे, तो इसे नॉर्मल न समझें.
  2. ​मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग- अगर आपके पीरियड्स पूरी तरह बंद हो चुके हैं और उसके बाद भी अचानक ब्लीडिंग होती है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.
  3. ​संबंध बनाने के बाद खून आना- इंटिमेसी या संबंध बनाने के बाद ब्लीडिंग होना एक बड़ा वॉर्निंग साइन हो सकता है.
  4. ​बहुत ज्यादा हैवी पीरियड्स- अगर अचानक आपके पीरियड्स में ब्लीडिंग सामान्य से बहुत ज्यादा होने लगी है या पीरियड्स बहुत लंबे दिनों तक चल रहे हैं.
  5. ​बदबूदार या अजीब डिस्चार्ज- वजाइनल डिस्चार्ज का रंग अगर पीला, हरा या भूरा हो जाए और उसमें से तेज बदबू आ रही हो.
  6. ​डिस्चार्ज में खून के आना- अगर सफेद पानी या डिस्चार्ज के साथ हल्के खून के धब्बे या पिंकिश रंग दिखाई दे.

​कैंसर की स्टेज और इसका इलाज-

नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) की रिसर्च बताती है कि गायनेकोलॉजिकल कैंसर का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर किस टाइप का है, किस स्टेज पर है और मरीज की हेल्थ कंडीशन कैसी है.

​इस कैंसर की मुख्य रूप से चार अलग-अलग स्टेज होती हैं. रिसर्च के अनुसार, अगर पहली या शुरुआती स्टेज में ही बीमारी का पता चल जाए, तो इसका इलाज बेहद आसानी से और पूरी तरह संभव है. इसलिए, शरीर के किसी भी छोटे बदलाव को नजरअंदाज न करें, क्योंकि आपकी जागरूकता ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है.

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