केंद्र सरकार ने इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) और सरोगेसी में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट की बिक्री पर सख्ती की है. इसके तहत सरकार ने निर्देश दिया है कि अब ऐसे प्रोडक्ट केवल पंजीकृत सहायक प्रजनन तकनीकों (ART) और सरोगेसी केंद्रों को ही उपलब्ध कराए जाएं. दरअसल, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन और अन्य सहायक प्रजनन तकनीकों (ART) में इस्तेमाल होने वाले मीडिया, रिएजेंट्स और संबंधित प्रोडक्ट की बिक्री को लेकर नया सर्कुलर जारी किया है. इसमें सभी निर्माताओं, आयातकों, वितरकों और अन्य संबंधित पक्षों को निर्देश दिया गया है कि इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन और सहायक प्रजनन तकनीकों में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट की आपूर्ति केवल उन्हीं केंद्रों को की जाए जो ART Act, 2021 और Surrogacy Act, 2021 के तहत पंजीकृत हैं.
बिना रजिस्टर्ड संस्थानों को हो रहा था सप्लाई-
भारत के औषधि नियंत्रक जनरल (DCGI) डॉ राजीव सिंह रघुवंशी की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि सीडीएससीओ को जानकारी मिली थी कि इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन और सहायक प्रजनन तकनीकों (ART) में इस्तेमाल होने वाले कुछ प्रोडक्ट ऐसे संस्थानों को भी सप्लाई किए जा रहे हैं, जो ART (Regulation) Act, 2021 और Surrogacy (Regulation) Act, 2021 के तहत पंजीकृत नहीं हैं.

किसे नहीं मिलेगे अब IVF-सरोगेसी में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स. (Image NDTV)
सीडीएससीओ के अनुसार, आईवीएफ, भ्रूण संरक्षण (Cryopreservation) और अन्य एआरटी प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले ये प्रोडक्ट मेडिकल डिवाइस की श्रेणी में आते हैं और इनके निर्माण या आयात के लिए लाइसेंस जरूरी है. ऐसे में बिना पंजीकरण वाले केंद्रों में इन प्रोडक्ट का इस्तेमाल होने से मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर खतरा पैदा हो सकता है. साथ ही इससे एआरटी और सरोगेसी सेवाओं के दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ सकती है.
मरीजों की सुरक्षा पर जोर-
अधिकारियों के अनुसार, सरकार का उद्देश्य प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता, सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करना है. इससे मरीजों के हितों की रक्षा होगी और आईवीएफ तथा सरोगेसी सेवाओं में अनियमितताओं पर रोक लगेगी.
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