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'Vision for Every Indian' मिशन लॉन्च, देश के 800 जिलों में होगी आंखों की मुफ्त जांच

PM मोदी के जन्मदिन पर वडनगर से 'Vision for Every Indian' मिशन शुरू हुआ. देश के 800 जिलों में मुफ्त आंख जांच, चश्मा वितरण, मोतियाबिंद इलाज और नेत्रदान जागरूकता अभियान चलाया जाएगा.

'Vision for Every Indian' मिशन लॉन्च, देश के 800 जिलों में होगी आंखों की मुफ्त जांच
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हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा कहते हैं कि आंखें हैं तो जहान है. लेकिन हमारे देश में आज भी लाखों लोग सिर्फ इसलिए अपनी आंखों की रोशनी खो बैठते हैं क्योंकि उनके पास डॉक्टर को दिखाने के पैसे नहीं होते या उनके गांव-कस्बे में आंखों का कोई अच्छा अस्पताल ही नहीं होता. इस मजबूरी को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के खास मौके पर एक बहुत बड़े राष्ट्रीय अभियान का ऐलान किया गया है.

कर्नाटक सरकार की विजन कमेटी के अध्यक्ष और प्रसाद नेत्रालय के प्रमुख डॉ. कृष्ण प्रसाद कुडलू ने पीएम मोदी के जन्‍मद‍िन के मौके पर उनके गृहनगर गुजरात के वडनगर से 'विजन फॉर एवरी इंडियन' (Vision for Every Indian) नाम से इस मिशन की शुरुआत की है. इसका सीधा मकसद है कि देश का कोई भी गरीब इंसान सिर्फ पैसों या इलाज की कमी के चलते अंधा न रहे. जानि‍ए यह पूरा अभियान क्या है और इससे आम जनता को क्या बड़ा फायदा मिलने वाला है.

वडनगर से हुई शुरुआत, देश के 800 जिलों तक पहुंचेगी मदद

इस अभियान की शुरुआत वडनगर में मुफ्त आई केयर कैंप और नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम लगाकर की गई है. लेकिन यह सिर्फ एक दिन या एक शहर का कार्यक्रम नहीं है.

आयोजकों का संकल्प है कि आने वाले समय में देश के सभी 800 जिलों में ऐसे कैंप लगाए जाएंगे. हर जिले में गांव-गांव जाकर लोगों की आंखों की मुफत जांच की जाएगी और नजर के चश्मे बांटे जाएंगे. जिन बुजुर्गों या गरीबों को मोतियाबिंद की शिकायत होगी, उनका इलाज और आपरेशन भी कराया जाएगा.

यह पूरा अभियान पीएम मोदी के सेवा भाव और 'सबका साथ, सबका विकास' के विचार को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.

नेत्रदान को लेकर फैलाई जाएगी जागरूकता

इलाज के साथ-साथ इस मिशन में नेत्रदान (Eye Donation) पर भी बहुत जोर दिया जा रहा है. हमारे समाज में आज भी आंखों के दान को लेकर बहुत सारे वहम और गलतफहमियां फैली हुई हैं.

एक इंसान का नेत्रदान अंधेरे में जी रहे दो लोगों की जिंदगी में उजाला भर सकता है.कैंप के जरिए आम लोगों को समझाया जाएगा कि मृत्यु के बाद नेत्रदान कैसे किया जाता है और यह कितना पुण्य का काम है. डॉक्टरों का मानना है कि अगर लोग आगे आकर आंखें दान करने लगें, तो देश से कॉर्नियल अंधापन हमेशा के लिए मिटाया जा सकता है.

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कई बड़े अस्पताल और ट्रस्ट आए एक साथ

इतने बड़े देश के हर कोने तक पहुंचना किसी एक अस्पताल के बस की बात नहीं होती. इसलिए कई सामाजिक संस्थाएं और अस्पताल इस नेक काम में एक साथ जुड़ गए हैं.

उडुपी का प्रसाद नेत्रालय सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और नेत्र ज्योति चैरिटेबल ट्रस्ट इसमें मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. सोमाभाई मोदी की अगुवाई वाला सर्वोदय सेवा ट्रस्ट, विसनगर का ज्योति अस्पताल और वडनगर का जीएमईआरएस मेडिकल कॉलेज भी इस मिशन से जुड़े हैं.

इसके अलावा वनसाइट एसिलोर-लक्सोटिका फाउंडेशन भी इस काम में अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है.

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एक आम आदमी के लिए क्या हैं इसके मायने

अगर आपके घर में भी कोई बुजुर्ग या बच्चा है जिसे धुंधला दिखता है या पढ़ने में सिरदर्द होता है, तो अब महंगे प्राइवेट डॉक्टरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

आपके जिले या तहसील में जब भी यह सरकारी या ट्रस्ट का कैंप लगेगा, वहां जाकर कोई भी मुफ्त में अपनी आखों की जांच करा सकता है. अगर नजर कमजोर पाई गई तो मुफ्त में नंबर का चश्मा दिया जाएगा. समय पर जांच होने से मोतियाबिंद या काला पानी जैसी गंभीर बीमारियों को वक्त रहते पकड़ा जा सकेगा.

डॉ. कृष्ण प्रसाद का कहना है कि साफ देखना कोई विलासिता नहीं बल्कि हर इंसान का बुनियादी हक है. जब लोगों की आंखें ठीक रहेंगी, तो बच्चे बेहतर पढ़ाई कर सकेंगे और बड़े लोग बिना किसी के सहारे अपनी रोजी-रोटी कमा सकेंगे. वडनगर से शुरू हुआ यह छोटा सा कदम अगर देश के हर जिले तक पहुंच गया, तो यह सचमुच लाखों जिंदगियों में नई रोशनी भर देगा.

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