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बच्चों में उम्र से पहले हार्मोनल बदलाव! जंक फूड्स से लेकर स्क्रीन टाइम बढ़ा रहा Early Puberty? डॉक्टर की पेरेंट्स को सलाह

Early Puberty Causes: बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. निमिशा अरोड़ा के अनुसार, बच्चों में अर्ली प्यूबर्टी के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बदलती लाइफस्टाइल है.

बच्चों में उम्र से पहले हार्मोनल बदलाव! जंक फूड्स से लेकर स्क्रीन टाइम बढ़ा रहा Early Puberty? डॉक्टर की पेरेंट्स को सलाह
Early Puberty: आजकल बच्चे 7 से 9 साल में बड़े होने लगे हैं.

How to Prevent Early Puberty: आज के समय में माता-पिता के सामने बच्चों की सेहत से जुड़ी कई नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. पहले जो शारीरिक बदलाव 11-14 साल की उम्र में दिखाई देते थे, वही अब कई बच्चों में 7-9 साल की उम्र में ही नजर आने लगे हैं. लड़कियों में जल्दी ब्रेस्ट डेवलपमेंट, पीरियड्स का जल्दी शुरू होना और लड़कों में आवाज़ भारी होना या चेहरे पर बाल आने जैसे लक्षण माता-पिता को चिंता में डाल रहे हैं. इस स्थिति को मेडिकल भाषा में अर्ली प्यूबर्टी (Early Puberty) या प्रीमैच्योर प्यूबर्टी कहा जाता है.

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. निमिशा अरोड़ा के अनुसार, बच्चों में अर्ली प्यूबर्टी के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बदलती लाइफस्टाइल है. अच्छी बात यह है कि सही समय पर ध्यान देकर और कुछ आदतों में बदलाव कर इस खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है.

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क्या है Early Puberty?

अर्ली प्यूबर्टी वह स्थिति है जब लड़कियों में 8 साल से पहले, लड़कों में 9 साल से पहले प्यूबर्टी से जुड़े शारीरिक और हार्मोनल बदलाव शुरू हो जाते हैं. यह केवल शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि इससे बच्चे की मेंटल हेल्थ, आत्मविश्वास और भविष्य की लंबाई (हाइट) पर भी असर पड़ सकता है.

बच्चों में अर्ली प्यूबर्टी के बढ़ते कारण | Increasing Causes of Early Puberty in Children

1.जंक फूड का ज्यादा सेवन

पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज़, पैकेज्ड स्नैक्स और मीठे ड्रिंक्स बच्चों की डाइट का हिस्सा बन चुके हैं. इससे मोटापा बढ़ता है, शरीर में हार्मोनल असंतुलन होता है, फैट सेल्स ऐसे हार्मोन रिलीज़ करते हैं जो प्यूबर्टी को जल्दी ट्रिगर कर देते हैं.

डॉ. निमिशा अरोड़ा के अनुसार, मोटापा अर्ली प्यूबर्टी का सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है.

2. कॉस्मेटिक और ब्यूटी प्रोडक्ट्स का ज्यादा इस्तेमाल

आजकल छोटे बच्चों तक को क्रीम, परफ्यूम, लिप बाम और हेयर प्रोडक्ट्स लगाए जाते हैं. इनमें हार्मफुल केमिकल्स (जैसे phthalates, parabens) होते हैं. ये शरीर के नैचुरल हार्मोन्स को गड़बड़ कर सकते हैं. छोटे बच्चों को कॉस्मेटिक से जितना दूर रखा जाए, उतना बेहतर.

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3. प्लास्टिक कंटेनर्स का इस्तेमाल

खाने-पीने की चीजें प्लास्टिक डिब्बों में रखने से BPA जैसे केमिकल्स खाने में मिल सकते हैं. ये हार्मोन डिसरप्टर की तरह काम करते हैं. प्लास्टिक की जगह स्टील या फूड-ग्रेड सिलिकॉन कंटेनर का इस्तेमाल करें.

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4. आलसी लाइफस्टाइल

बच्चों का ज़्यादातर समय बैठकर बीत रहा है स्कूल के बाद मोबाइल, होमवर्क के बाद टीवी, फिजिकल एक्टिविटी की कमी से वजन बढ़ता है और हार्मोनल बैलेंस बिगड़ता है.

5. जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम

मोबाइल, टैबलेट और टीवी का ज्यादा इस्तेमाल नींद को प्रभावित करता है, मेलाटोनिन और अन्य हार्मोन्स पर असर डालता है, मानसिक तनाव बढ़ाता है. रोज का स्क्रीन टाइम सीमित करना बहुत जरूरी है.

6. बच्चों में बढ़ता स्ट्रेस

पढ़ाई का दबाव, कंपैरिजन और सोशल मीडिया का असर बच्चों को भी तनाव में डाल रहा है. स्ट्रेस से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, यह प्यूबर्टी से जुड़े हार्मोन्स को प्रभावित कर सकता है.

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अर्ली प्यूबर्टी से बचने के लिए जरूरी लाइफस्टाइल बदलाव:

  • घर का बना ताजा खाना दें.
  • जंक और पैकेज्ड फूड से दूरी.
  • रोज कम से कम 1 घंटा आउटडोर खेल.
  • स्क्रीन टाइम कंट्रोल करें.
  • प्लास्टिक और कॉस्मेटिक से बचाव.
  • बच्चों से बात करें, उनका स्ट्रेस समझें.

अर्ली प्यूबर्टी एक गंभीर लेकिन रोकी जा सकने वाली समस्या है. समय रहते सही लाइफस्टाइल अपनाकर हम अपने बच्चों को न सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ रख सकते हैं, बल्कि उनका मानसिक विकास भी बेहतर कर सकते हैं.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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