Gussa Karne Ke Nuksan In Hindi: गुस्सा आना स्वाभाविक और तेजी से आने वाली भावना है, जिसपर नियंत्रण कर पाना हर किसी के बस की बात नहीं होती है. हर किसी का गुस्सा जाहिर करने का तरीका भी अलग होता है. कोई चिल्लाकर तो कोई मन ही मन बड़-बड़ाकर गुस्सा निकालने की कोशिश करता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एक पल का गुस्सा हमारे शरीर को कितनी बुरी तरह प्रभावित करता है, यह सिर्फ मन के लिए ही नहीं बल्कि तन के लिए भी घातक है.
चिकित्सा और आयुर्वेद का क्या मानना है?
चिकित्सा और आयुर्वेद दोनों का ही मानना है कि क्रोध न सिर्फ रिश्तों को बिगाड़ता है, बल्कि इसके साथ ही हार्मोन, हृदय, पाचन और मस्तिष्क तक पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है. आज की जीवनशैली की वजह से भी गुस्से की आवृति बढ़ गई है. अत्याधिक काम का दबाव, नींद की कमी और चिड़चिड़ापन गुस्से का कारण बन रहे हैं. भले ही गुस्सा आना स्वभाविक प्रक्रिया है, लेकिन इसे नियंत्रित करना भी जरूरी है. आज हम आपको क्रोध प्रबंधन के आसान उपाय बताएंगे और साथ ही यह भी जानेंगे कि शरीर पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है.

ज्यादा गुस्सा करने से क्या होता है?
जब किसी को भी गुस्सा आता है, तो शरीर में तेजी से हार्मोन असंतुलित होने लगते हैं. तनाव को बढ़ाने वाले एड्रेनालिन और कोर्टिसोल एक्टिवेट हो जाते हैं और दिल की धड़कन भी तेजी से बढ़ने लगती है. तनाव की वजह से रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है और पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है, और यही कारण है कि गुस्से में अक्सर लोगों की खाने की इच्छा खत्म हो जाती है. बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती; गुस्सा आने पर मस्तिष्क का निर्णय लेने वाला भाग कमजोर हो जाता है और कम सक्रिय तरीके से काम करता है. रिसर्च बताती है कि बार-बार गुस्सा करने वालों में हाई बीपी, हार्ट डिजीज, माइग्रेन, एसिडिटी और नींद की समस्या अधिक पाई जाती है.
अब जब भी गुस्सा आए तब क्या करें?
अब जब भी गुस्सा आए तो सबसे पहले गहरी और धीरे-धीरे सांस लें और बाहर की तरफ छोड़ें. कोशिश करें कि किसी खुली जगह में जाकर सांस लेने की कोशिश करें और हाथों को बाहर की तरफ झटके, यह शरीर से तनाव और गुस्से के असर को कम करता है. विज्ञान में माना गया है कि किसी भी बात पर गुस्सा जाहिर करने से पहले खुद को 90 सेकेंड के लिए रोक लें, इससे गुस्सा धीरे-धीरे कम हो जाता है और फिर हम चीजों को बेहतर समझ पाते हैं.
इसके साथ ठंडा पानी पीने और आंखों को ठंडे पानी से धोने से राहत मिलती है. ठंडा पानी पीने से पित्त शांत होता है और तनाव भी कम महसूस होता है. आयुर्वेद में गुस्से को पित्त से जोड़कर देखा गया है, आयुर्वेद में क्रोध नियंत्रण के लिए पित्तशामक आहार के सेवन की सलाह दी जाती है. इसके लिए आहार में नारियल पानी, सौंफ, धनिया, घी, खीरा, और आंवला शामिल करें.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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