मेरा नाम अंकिता चौहान है और मेरी उम्र 40 साल है. पिछले एक-दो साल से मैं अपने शरीर में कई बदलाव महसूस कर रही थी. कभी अचानक बहुत थकान लगती, कभी मूड खराब हो जाता और कभी बिना किसी वजह के बेचैनी होने लगती. पीरियड्स भी पहले की तरह नियमित नहीं रहे थे. डॉक्टर ने बताया कि 40 की उम्र के बाद हार्मोनल बदलाव शुरू होना सामान्य बात है. लेकिन इसका असर मेरी डेली लाइफ पर पड़ने लगा था. मैंने कई चीजें ट्राई कीं, लेकिन कोई खास फर्क नहीं पड़ा. सोशल मीडिया पर सुन कर डाइटरी सप्लीमेंट लिए. डॉक्टर की सलाह पर हार्मोनल टेबलेट भी लीं. लेकिन दवाएं बंद होते ही दोबारा वही परेशानियां होने लगतीं. तभी मेरी एक दोस्त ने मुझे रोज सिर्फ 15 मिनट योग करने की सलाह दी. मुझे लगा कि इतने कम समय में भला क्या होगा. जब दवाएं कुछ नहीं कर सकीं तो योग क्या करेगा. लेकिन सहेली की सलाह मानते हुए मैंने कोशिश करने का फैसला किया.
शुरुआत में मैं सिर्फ सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, भुजंगासन और 5 मिनट प्राणायाम करती थी. पहले कुछ दिन शरीर अकड़ा हुआ लगता था और कई बार मन भी नहीं करता था. लेकिन मैंने सोचा कि 60 दिन तक बिना रुके इसे करके देख ही लेती हूं.

महीने भर में दिखा कमाल का असर
एक महीने के बाद मुझे एहसास हुआ कि योग का असर मेरे हार्मोनल बदलावों पर भी पड़ रहा है. पहले मुझे अचानक गुस्सा आ जाता था या बिना वजह उदासी महसूस होती थी. कभी बहुत ज्यादा थकान होती, तो कभी रात में नींद नहीं आती थी. लेकिन अब मैं खुद को ज्यादा शांत और बैलेंस महसूस करने लगी थी. मेरी नींद बेहतर हो गई और सुबह उठने पर ताजगी महसूस होने लगी.
धीरे-धीरे दूर हुईं समस्याएं
धीरे-धीरे पीरियड्स से जुड़ी परेशानियां भी कम होने लगीं. पहले पीरियड्स के दौरान पेट में दर्द और चिड़चिड़ापन बहुत ज्यादा होता था. लेकिन रेगुलर योग और प्राणायाम से ये काफी हद तक कम हो गया. मुझे महसूस हुआ कि मेरा शरीर और दिमाग दोनों एक बेहतर रिदम में आ रहे हैं.
60 दिन पूरे होने के बाद जब मैंने खुद को देखा. तो लगा कि मैंने सिर्फ योग नहीं किया, बल्कि खुद को समय देना सीख लिया है. अब मैं पहले से ज्यादा एक्टिव हूं. टेंशन कम लेती हूं और छोटी-छोटी बातों पर परेशान नहीं होती. और, सबसे बड़ी बात रोज सुबह का वो मी टाइम मुझे बहुत पसंद आने लगा है. मैं रोज वेट करती हूं कि जल्दी से सुबह हो और मुझे योग करने का मौका मिले. मैं ये तो नहीं कह सकती कि योग कोई जादू है या इससे हर परेशानी पूरी तरह खत्म हो जाती है, लेकिन मेरे लिए ये एक ऐसी आदत बन गई है. जिसने मुझे अपने शरीर और मन को बेहतर तरीके से समझना सिखाया है.
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