अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आज पूरी दुनिया भर में मनाया जा रहा है, लेकिन क्या आपको पता है कि आधुनिक योग में योग का पहला गुरु कौन था. महर्षि पतंजलि को आधुनिक युग में योग का जनक माना जाता है.उनसे पहले योग का ज्ञान वेदों, उपनिषदों और पुराणों में बिखरा हुआ था.पतंजलि ने ही पहली बार उस गूढ़ ज्ञान को सूत्रबद्ध करके पूरी दुनिया के सामने रखा.महर्षि पतंजलि का कालखंड लगभग दूसरी से चौथी शताब्दी ईसा पूर्व माना जाता है.उन्हें शेषनाग का अवतार कहा जाता है. पतंजलि का सबसे महान ग्रंथ योगसूत्र है. इसे योग दर्शन का आधार स्तंभ मानते हैं. इसमें कुल 196 सूत्र हैं, जिन्हें 4 अध्यायों में बांटा गया है.
महर्षि पतंजलि का नाम कैसे पड़ा
प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, महर्षि पतंजलि की मां का नाम गोणिका था. वो धर्मपरायण, तपस्वी और विदुषी महिला थीं. वो एक ऐसे पुत्र की कामना कर रही थीं जो अपने ज्ञान से संसार का कल्याण कर सके. कहा जाता है कि माता गोणिका सूर्य देव को अर्घ्य दे रही थीं. जब उन्होंने अपनी अंजुली में जल लेकर सूर्य देव की प्रार्थना की तो आसमान से एक नन्हा जीव उनकी अंजलि में आ गिरा. जो देखते ही देखते एक बालक के रूप में बदल गया.माता की अंजुली में गिरने (पतित) होने से उनका नाम पतंजलि पड़ा.अधिकांश ग्रंथों में उन्हें एक बाल ब्रह्मचारी और पूर्ण सन्यासी के रूप में ही दर्शाया गया है.
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आधा मानव और आधा सर्प का शरीर
योग शास्त्रों में उनका आधा शरीर कमर से ऊपर एक सामान्य मनुष्य का है, लेकिन कमर से नीचे का हिस्सा एक सर्प (नाग) की कुंडली जैसा है. सिर के पीछे 7 या 1000 फनों वाले शेषनाग का छत्र होता है.मान्यता है कि वो स्वयं लक्ष्मण और बलराम के बाद शेषनाग के तीसरे अवतार थे.
पर्दे के पीछे से हजारों लोगों को पढ़ाना
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: पतंजलि जब अपने शिष्यों को व्याकरण और योग सिखाते थे तो उनके बीच एक पर्दा लगा रहता था. वो पर्दे के पीछे से एक साथ हजारों शिष्यों को अलग-अलग विषयों का ज्ञान देते थे और किसी को उनके असली रूप को देखने की अनुमति नहीं थी. एक शिष्य ने एक बार पर्दा उठा दिया, तो वहां साक्षात शेषनाग का रूप देखकर सभी चकित रह गए.
एकाग्रता की अद्भुत शक्ति
पतंजलि को सूत्रकार कहा जाता है. उन्होंने व्याकरण, आयुर्वेद और योग में ऐसे ग्रंथ लिखे जो हजारों साल बाद आज भी अकाट्य हैं. उनकी मानसिक चेतना इतनी तीव्र थी कि वे एक ही समय में शरीर, मन और वाणी तीनों के शुद्धिकरण का विज्ञान लिख सकते थे. पतंजलि को गोनर्दीय भी कहा जाता है. इसका प्राचीन भारत के गोनर्द क्षेत्र उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले या मध्य भारत के कुछ हिस्से) से था. उनके जीवन का काफी समय काशी (वाराणसी) में व्याकरण और योग की साधना करते हुए बीता था.
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महर्षि पतंजलि का योगदान
- समाधि अध्याय: इसमें योग के उद्देश्य, मानसिक वृत्तियों (चित्त) और समाधि की अवस्था को समझाया गया है.
- साधन अध्याय: इसमें योग को जीवन में उतारने के व्यावहारिक तरीके और क्रिया योग के बारे में बताया गया है.
- विभूति अध्याय: इसमें ध्यान और साधना से मिलने वाली मानसिक और आत्मिक शक्तियों, सिद्धियों का जिक्र है.
- कैवल्य अध्याय: इसमें मुक्ति, मोक्ष और परम चेतना की स्थिति को बताया गया है.
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अष्टांग योग क्या है
महर्षि पतंजलि ने मन को नियंत्रित करने और आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए अष्टांग योग का सिद्धांत दिया. आज पूरी दुनिया में जो भी योग सिखाया जाता है, वह इसी अष्टांग मार्ग पर आधारित है.
- यम् (Yama): सामाजिक अनुशासन (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह)
- नियम (Niyama): व्यक्तिगत अनुशासन (शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान)
- आसन (Asana): शरीर को स्थिर और आरामदायक स्थिति में रखना
- प्राणायाम (Pranayama): श्वास-प्रश्वास की गति पर नियंत्रण
- प्रत्याहार (Pratyahara): इंद्रियों को बाहरी दुनिया से हटाकर भीतर की ओर मोड़ना
- धारणा (Dharana): मन को किसी एक विचार या वस्तु पर केंद्रित करना
- ध्यान (Dhyana): निरंतर एकाग्रता की स्थिति
- समाधि (Samadhi): आत्मा का परमात्मा से मिलन, परम चेतना
आयुर्वेद और प्राचीन ग्रंथों में एक श्लोक बहुत प्रसिद्ध है, जिसके अनुसार पतंजलि ने मनुष्यों के शुद्धिकरण के लिए तीन महान कार्य किए.
- योगसूत्र: मन की शुद्धि के लिए.
- महाभाष्य (व्याकरण):वाणी की शुद्धि के लिए
- चरक संहिता (आयुर्वेद): बीमारियों को दूर करने के लिए.
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