बच्चों में होने वाला अपेंडिसाइटिस शुरुआती चरण में अक्सर सामान्य पेट संक्रमण जैसा लग सकता है, लेकिन इसकी पहचान में देरी खतरनाक साबित हो सकती है. डॉक्टरों का कहना है कि अगर पेट दर्द के साथ उल्टी, बुखार, भूख कम लगना या दर्द लगातार बढ़ रहा हो तो इसे मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर इलाज न मिलने पर अपेंडिक्स फटने और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है.
बच्चों में अपेंडिसाइटिस पहचानना क्यों मुश्किल?
एम्स दिल्ली के पीडियाट्रिक सर्जरी डिपार्टमेंट के चीफ डॉ. संदीप अग्रवाल का कहना है कि बच्चों में अपेंडिसाइटिस के लक्षण हमेशा स्पष्ट नहीं होते. कई बार शुरुआत में नाभि के आसपास हल्का दर्द होता है, जो कुछ घंटों बाद पेट के निचले दाहिने हिस्से में पहुंच जाता है.
उन्होंने बताया कि यदि इस दर्द के साथ भूख कम लगना, मतली, उल्टी या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें तो अपेंडिसाइटिस की आशंका को गंभीरता से लेना चाहिए.
पेट के संक्रमण से कैसे अलग है?
विशेषज्ञों का कहना है कि अपेंडिसाइटिस को अक्सर गैस्ट्रोएंटेराइटिस समझ लिया जाता है. हालांकि, पेट के संक्रमण में दस्त प्रमुख लक्षण होता है, जबकि अपेंडिसाइटिस में दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है और लगातार बना रह सकता है.
डॉक्टरों के अनुसार अगर दर्द कम होने के बजाय बढ़ रहा है या बच्चा सामान्य गतिविधियां नहीं कर पा रहा है, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए.
छोटे बच्चों में ज्यादा चुनौती
मेदांता गुरुग्राम में पीडियाट्रिक सर्जरी और पीडियाट्रिक यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. शंदीप कुमार सिन्हा का कहना है कि छोटे बच्चे अक्सर अपने दर्द की सही जगह या तीव्रता नहीं बता पाते. यही वजह है कि उनमें बीमारी की पहचान देर से होती है और जटिलताओं का जोखिम बढ़ जाता है.
उन्होंने चेतावनी दी कि माता-पिता कई बार इसे साधारण पेट दर्द या संक्रमण समझकर इंतजार करते रहते हैं, जबकि इस दौरान अपेंडिसाइटिस तेजी से गंभीर रूप ले सकता है.
किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं?
- पेट में लगातार या बढ़ता हुआ दर्द
- दर्द के साथ उल्टी आना
- बुखार होना
- भूख कम लगना
- खाने से इंकार करना
- पेट के निचले दाहिने हिस्से में दर्द बढ़ना
जांच कैसे होती है?
विशेषज्ञों के मुताबिक अपेंडिसाइटिस की पुष्टि बच्चे के लक्षणों और शारीरिक जांच के आधार पर की जाती है. जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड जैसी जांच कराई जा सकती है. बच्चों में अल्ट्रासाउंड को उपयोगी माना जाता है क्योंकि इसमें रेडिएशन नहीं होता.
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