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गुजरात में Chandipura Virus से तीसरे बच्चे की मौत, डॉक्टरों ने बच्चों के लिए जारी की 3 घंटे की चेतावनी

Chandipura Outbreak Escalates: गुजरात में Chandipura Virus से तीसरे बच्चे की मौत हुई है. जानिए बच्चों में इसके शुरुआती लक्षण, यह कैसे फैलता है और डॉक्टर 3 घंटे के भीतर इलाज की सलाह क्यों दे रहे हैं.

गुजरात में Chandipura Virus से तीसरे बच्चे की मौत, डॉक्टरों ने बच्चों के लिए जारी की 3 घंटे की चेतावनी

गुजरात में Chandipura Virus ने चिंता बढ़ा दी है. राज्य में इस वायरस से अब तक 3 बच्चों की मौत हो चुकी है. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह संक्रमण बच्चों की हालत कुछ ही घंटों में गंभीर बना सकता है. डॉक्टरों ने माता-पिता को चेतावनी दी है कि अगर बच्चे को अचानक तेज बुखार, लगातार उल्टी या दौरे पड़ने लगें तो 3 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी है.

पिछले कुछ ही दिनों के भीतर इस जानलेवा वायरस से तीसरे बच्चे की मौत की पुष्टि हुई है. ताजा मामला साबरकांठा जिले का है, जहां हिम्मतनगर सिविल अस्पताल में इलाज करा रहे राजस्थान के एक 6 वर्षीय मासूम ने दम तोड़ दिया. गुजरात में बढ़ रहे मामलों के बीच चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus/CHPV) को लेकर लोगों में काफी चिंता है. यह मुख्य रूप से बच्चों को निशाना बनाने वाला एक खतरनाक और तेजी से फैलने वाला वायरल इन्फेक्शन है.

आइए जानते हैं कि यह वायरस क्या है, यह कैसे फैलता है और इससे बच्चों को कैसे सुरक्षित रखा जाए: 

चांदीपुरा वायरस क्या है? (What is Chandipura Virus)

चांदीपुरा वायरस 'रैबडोविरिडे' (Rhabdoviridae) फैमिली से है. इसी फैमिली का वायरस से रेबीज भी फैलाता है. इस वायरस की पहचान सबसे पहले 1965 में भारत में (महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में) हुई थी, इसलिए इसका नाम चांदीपुरा पड़ा. यह वायरस सीधे इंसान के दिमाग पर हमला करता है, जिससे दिमाग में सूजन (Encephalitis) आ जाती है. यह 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सबसे ज्यादा घातक साबित होता है.

चांदीपुरा वायरस के कारण (Causes & Spread)

यह वायरस इंसानों से इंसानों में सीधे नहीं फैलता. इसके फैलने के पीछे कुछ कीड़ों का हाथ होते हैं- 

बालू मक्खी:  यह इस वायरस को फैलाने वाली मुख्य वाहक है. यह मच्छर से भी छोटी, भूरे रंग की मक्खी होती है जो आमतौर पर मिट्टी के घरों की दरारों, कचरे या नमी वाले स्थानों पर पनपती है.
ब्लैक फ्लाई और मच्छर:  कुछ मामलों में यह वायरस अन्य कीड़ों और मच्छरों के काटने से भी फैल सकता है.
कच्चे या मिट्टी के घर:  ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में, जहाँ कच्चे मकान या मवेशियों के बाड़े होते हैं, वहाँ सैंडफ्लाई आसानी से पनपती है.

चांदीपुरा वायरस के लक्षण (Symptoms)

इस वायरस के लक्षण बहुत तेजी से उभरते हैं और मरीज की स्थिति कुछ ही घंटों में गंभीर हो सकती है. मुख्य लक्षणों में शामिल हैं: 

  1. अचानक तेज बुखार: विशेषकर रात के समय बच्चे को अचानक बहुत तेज बुखार आना.
  2. उल्टी और दस्त: पेट में इन्फेक्शन जैसे लक्षण दिखना और लगातार उल्टियां होना.
  3. सिरदर्द और सुस्ती: बच्चे का बहुत ज्यादा कमजोर या अचेत (unresponsive) महसूस करना.
  4. दौरे पड़ना (Convulsions): गंभीर मामलों में बच्चे के हाथ-पैर कांपना या दौरे पड़ना.
  5. दिमागी संतुलन बिगड़ना: बच्चा बेहोशी की हालत में जाने लगता है या अजीब बर्ताव करता है.

महत्वपूर्ण चेतावनी: डॉक्टरों के मुताबिक, लक्षण दिखने के 3 घंटे के भीतर इलाज मिलना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह वायरस दिमाग पर बहुत तेजी से असर करता है.

चांदीपुरा वायरस से बचाव के उपाय (Prevention)

चूंकि इस वायरस की कोई विशेष वैक्सीन या एंटीवायरल दवा नहीं है, इसलिए बचाव ही इसका एकमात्र इलाज है. आप अपने बच्चों को इन तरीकों से सुरक्षित रख सकते हैं: 

कीटों और मक्खियों से सुरक्षा

फुल कपड़े पहनाएं: बारिश के मौसम में बच्चों को पूरी आस्तीन के कपड़े और फुल पैंट पहनाएं ताकि वे मक्खियों और मच्छरों के काटने से बच सकें.
मच्छरदानी का इस्तेमाल: सोते समय बच्चों को मच्छरदानी (Mosquito Net) के अंदर ही सुलाएं.

घर और आसपास की सफाई

दीवारों की दरारें भरें: अगर घर में कहीं मिट्टी या सीमेंट की दरारें हैं, तो उन्हें तुरंत बंद करें, क्योंकि सैंडफ्लाई यहीं छिपती है.
कीटनाशक का छिड़काव: घर के आसपास और मवेशियों के बांधने की जगह पर नियमित रूप से कीटनाशक पाउडर (Malathion/Insecticide) का छिड़काव करें.

स्वच्छता और खान-पान

गंदगी न होने दें: घर के पास पानी, कीचड़ या गीला कचरा जमा न होने दें.
तुरंत डॉक्टर से मिलें: अगर बच्चे को अचानक तेज बुखार या उल्टी की शिकायत हो, तो इसे सामान्य फ्लू मानकर घर पर इलाज करने या पैरासिटामोल देकर छोड़ने की गलती बिल्कुल न करें. उसे तुरंत नजदीकी बड़े अस्पताल ले जाएं.

स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन और राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है और प्रभावित इलाकों में इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तैनात कर दी गई हैं.

बड़ी बातें :

  1. तीसरी मौत: गुजरात में चांदीपुरा वायरस से अब तक 3 बच्चों की जान जा चुकी है.
  2. नया हॉटस्पॉट: पंचमहाल के बाद अब साबरकांठा जिले में वायरस ने पैर पसार लिए हैं.
  3. अस्पताल की स्थिति: हिम्मतनगर सिविल अस्पताल में अब तक कुल 5 संदिग्ध मामले दर्ज, 2 बच्चे अभी भी निगरानी में.
  4. प्रशासनिक एक्शन: सैंडफ्लाई (Sandflies) को खत्म करने के लिए युद्ध स्तर पर कीटनाशक का छिडकाव और डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग जारी.
  5. डॉक्टरों की चेतावनी: बच्चों में रात को तेज बुखार, उल्टी या दौरे पड़ने पर 3 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचना जरूरी.

पंचमहाल के बाद साबरकांठा में फैला संक्रमण

यह दुखद घटना पंचमहाल जिले में इस सप्ताह की शुरुआत में हुई दो मासूमों (उम्र 3 और 4 वर्ष) की मौत के ठीक बाद सामने आई है. साबरकांठा में हुई इस तीसरी मौत ने वायरस के भौगोलिक फैलाव (Geographical Expansion) को लेकर डॉक्टरों को चिंता में डाल दिया है.

अस्पताल अधिकारियों के मुताबिक, मृतक बच्चे को चार दिन पहले बेहद गंभीर स्थिति में भर्ती कराया गया था. हाल ही में आई उसकी लैब रिपोर्ट में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि हुई थी.

हिम्मतनगर अस्पताल की स्थिति: अस्पताल में अब तक कुल 5 संदिग्ध मरीज सामने आए हैं. राहत की बात यह है कि इनमें से दो बच्चों की रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है. हालांकि, दो अन्य बच्चे अभी भी गंभीर लक्षणों के साथ डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं, जिनकी लैब रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.

युद्ध स्तर पर स्वास्थ्य विभाग का 'सैंडफ्लाई' के खिलाफ अभियान

तीन मासूमों की मौत के बाद गुजरात स्वास्थ्य विभाग ने बेहद संवेदनशील और प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर सर्विलांस ऑपरेशन शुरू कर दिया है.

  • सैकड़ों मेडिकल टीमों को ग्राउंड जीरो पर उतारा गया है.
  • ये टीमें प्रभावित गांवों और कस्बों में डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग कर रही हैं ताकि किसी भी संदिग्ध मरीज की पहचान तुरंत की जा सके.
  • चांदीपुरा वायरस को फैलाने वाली मुख्य वाहक 'सैंडफ्लाई' (एक प्रकार की छोटी मक्खी) को खत्म करने के लिए इलाकों में सघन कीटनाशक पाउडर का छिड़काव (Insecticide Dusting) किया जा रहा है.

पेरेंट्स ध्यान दें: डॉक्टरों ने दी '3 घंटे की डेडलाइन'

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी परिवारों, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के लोगों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी की है. डॉक्टरों के मुताबिक, इस वायरस का अटैक बच्चों पर बहुत तेजी से होता है, इसलिए लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है.

मुख्य लक्षण जिन पर रखनी है नजर:

  • रात के समय अचानक बहुत तेज बुखार आना.
  • लगातार उल्टी होना या दस्त (Diarrhea) की शिकायत.
  • शरीर में ऐंठन या दौरे (Convulsions) पड़ना.

विशेषज्ञों की सलाह: अगर बच्चों में इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो बिना एक मिनट गंवाए 3 घंटे के भीतर नजदीकी बड़े अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करें. समय पर इलाज ही इस जानलेवा वायरस से बच्चों की जान बचा सकता है.

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