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हेल्दी पाचन से लेकर डायबिटीज और शुगर तक में कौन-सी रोटी है सबसे बेहतर? न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया क्या खाएं

Best Roti for Digestion: सही चुनाव उम्र, हेल्थ कंडीशन और स्वाद पर निर्भर करता है. उन्होंने गेहूं, बाजरा, ज्वार, रागी, खापली और मल्टीग्रेन रोटियों की तुलना करते हुए बताया कि किस स्थिति में कौन-सी रोटी बेहतर है.

हेल्दी पाचन से लेकर डायबिटीज और शुगर तक में कौन-सी रोटी है सबसे बेहतर? न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया क्या खाएं
Best Roti for Health: गेहूं की रोटी भारत में सबसे ज्यादा खाई जाती है.

Healthy Roti Options: इडियन थाली में रोटी सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत है. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि हर रोटी एक जैसी नहीं होती? अलग-अलग अनाज से बनी रोटियों का शरीर पर अलग असर पड़ता है, चाहे बात ब्लड शुगर कंट्रोल की हो, पाचन की या ओवरऑल हेल्थ की. न्यूट्रिशनिस्ट सुमन अग्रवाल के अनुसार, कोई एक अनाज सबके लिए परफेक्ट नहीं होता. सही चुनाव उम्र, हेल्थ कंडीशन और स्वाद पर निर्भर करता है. उन्होंने गेहूं, बाजरा, ज्वार, रागी, खापली और मल्टीग्रेन रोटियों की तुलना करते हुए बताया कि किस स्थिति में कौन-सी रोटी बेहतर है.

सेहतमंद रहने के लिए कौन सी रोटी खानी चाहिए? | Which bread should be eaten to stay healthy?

1. गेहूं की रोटी: आम लेकिन हर किसी के लिए सही नहीं

गेहूं की रोटी भारत में सबसे ज्यादा खाई जाती है. इसमें फाइबर, आयरन और बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन होते हैं. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) मध्यम यानी 45 से 62 के बीच होता है. लेकिन, प्रोसेसिंग के कारण गेहूं की पौष्टिकता पहले जैसी नहीं रही. जिन लोगों को ग्लूटेन से संवेदनशीलता है, उन्हें गेहूं से गैस या सूजन की समस्या हो सकती है.

2. बाजरे की रोटी: शुगर कंट्रोल में मददगार

बाजरा आयरन, फाइबर और मैग्नीशियम से भरपूर होता है. इसका GI लगभग 54-55 है, जो गेहूं से थोड़ा बेहतर माना जाता है. यह प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-फ्री भी है. हालांकि, बाजरे की रोटी भारी होती है और बेलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. ज्यादा मात्रा में सेवन थायरॉयड पर असर डाल सकता है, इसलिए संतुलन जरूरी है.

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3. रागी की रोटी: कैल्शियम का खजाना

रागी को सुपर ग्रेन कहा जाता है. इसमें गेहूं या चावल से लगभग 10 गुना ज्यादा कैल्शियम होता है. आयरन और एंटीऑक्सीडेंट भी भरपूर होते हैं. इसका GI लगभग 65 तक जा सकता है. जिन लोगों को किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें सीमित मात्रा में लेना चाहिए. स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए यह बहुत फायदेमंद मानी जाती है.

4. ज्वार और खापली: पारंपरिक और पौष्टिक

ज्वार में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं. इसका GI करीब 62 है. ज्यादा सेवन से कुछ लोगों को गैस या सूखापन महसूस हो सकता है. खापली (प्राचीन गेहूं) का GI करीब 40 है, जो कम माना जाता है. इसमें सामान्य गेहूं से दोगुना फाइबर होता है. हालांकि यह महंगी और थोड़ी सख्त बनावट वाली होती है.

5. मल्टीग्रेन रोटी: बैलेंस ऑप्शन

मल्टीग्रेन रोटी अलग-अलग अनाज का मिश्रण होती है. इसमें फाइबर और प्रोटीन ज्यादा होते हैं. इसका GI 28 से 55 के बीच हो सकता है. यह आंतों के स्वास्थ्य के लिए अच्छी मानी जाती है, लेकिन ब्रांड के अनुसार गुणवत्ता बदल सकती है.

तो कौन-सी रोटी चुनें?

  • ब्लड शुगर कंट्रोल: बाजरा, मल्टीग्रेन, खापली
  • फाइबर बढ़ाने के लिए: खापली, ज्वार, बाजरा
  • ओवरऑल न्यूट्रिशन: मल्टीग्रेन, रागी, खापली
  • बेहतर पाचन: गेहूं, खापली, रागी
  • स्तनपान कराने वाली माताएं: रागी

हर रोटी के अपने फायदे और सीमाएं हैं. सबसे बेहतर तरीका है कि आप अपनी जरूरत के अनुसार अनाज बदल-बदलकर खाएं. बैलेंस डाइट अच्छी सेहत की कुंजी है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

लेखक के बारे में
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अवधेश पैन्यूली
Senior Sub Editor
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