अक्सर हम देखते हैं कि हमारे आसपास लोग जोड़ों के दर्द या रीढ़ की हड्डी में कमजोरी की शिकायत करते हैं. जब समस्या बढ़ जाती है, तो यह गठिया, ऑस्टियोपोरोसिस, अर्थराइटिस और पेजेट रोग जैसी गंभीर बीमारियों का रूप ले लेती है. ऐसी स्थिति में डॉक्टर अक्सर लंबे इलाज या सर्जरी की सलाह देते हैं. आमतौर पर माना जाता है कि कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर होती हैं. यह सच भी है, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि जो लोग बचपन से खूब दूध-दही खाते आ रहे हैं, उन्हें भी जोड़ों और रीढ़ की हड्डी के विकार परेशान कर रहे हैं. आखिर ऐसा क्यों? आइए समझते हैं.
सिर्फ कैल्शियम ही काफी नहीं है!
हड्डियों और जोड़ों की मजबूती के लिए सिर्फ कैल्शियम अकेला कुछ नहीं कर सकता. दरअसल, कैल्शियम और विटामिन डी मिलकर ही हड्डियों को लोहे जैसा मजबूत बनाते हैं. हमारी रीढ़ की हड्डी में 32 बॉक्स (कशेरुक) होते हैं, जो एक खास लिक्विड, जिसे साइनोवियल द्रव कहते हैं, के जरिए जुड़े होते हैं. हड्डियों के अंदर 'अस्थि मज्जा' मजबूती देने का काम करती है और कैल्शियम व फास्फोरस को गहराई तक पहुंचाती है. लेकिन याद रखिए, आपकी हड्डियां कैल्शियम को तभी सोख (Absorb) पाती हैं, जब शरीर में विटामिन डी अच्छी मात्रा में हो.
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विटामिन डी: हड्डियों का असली 'पावर हाउस'
अगर शरीर में विटामिन डी नहीं है, तो आप कितना भी अच्छा खाना खा लें या महंगी दवाएं ले लें, वो शरीर को नहीं लगेंगी.
- अवशोषण बढ़ाता है: सूरज की रोशनी से बनने वाला विटामिन डी शरीर में कैल्शियम सोखने की क्षमता को 40-50% तक बढ़ा देता है.
- दर्द से राहत: यह मांसपेशियों की अकड़न कम करता है और गले व कंधे के दर्द में आराम देता है.
- साइनोवियल द्रव का बचाव: विटामिन डी की कमी से हड्डियां मुलायम और कमजोर हो जाती हैं. ऐसे में जोड़ों का जरूरी लुब्रिकेंट (साइनोवियल द्रव) हड्डियों पर चिपकने लगता है और हड्डियां घिसने लगती हैं. यही वजह है कि जोड़ों में भयानक दर्द होता है और नौबत घुटने के ऑपरेशन तक आ जाती है.
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दवाइयों से बेहतर हैं ये प्राकृतिक स्रोत
कैल्शियम और विटामिन डी को सप्लीमेंट के बजाय नेचुरल तरीके से लेना सबसे अच्छा है:
- कैल्शियम के लिए: अपनी डाइट में दूध, दही, पनीर, अंडे, बादाम, हरी पत्तेदार सब्जियां, चना, सत्तू और रागी को शामिल करें.
- विटामिन डी के लिए: सबसे आसान तरीका है रोज सुबह कुछ वक्त सूरज की धूप में बिताएं.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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