Akarna Dhanurasana benefits : आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों ऑफिस की कुर्सी पर एक ही मुद्रा में बैठना, अनियमित दिनचर्या और पोषक तत्वों की कमी से रीढ़ की हड्डी में दर्द और मांसपेशियां कमजोर होना आम समस्या बन गई है. इससे पीठ दर्द, जकड़न और पोस्चर खराब होने की शिकायतें बढ़ रही हैं. लेकिन प्राचीन योग का एक आसन आकर्ण धनुरासन इन समस्याओं का सरल और प्रभावी समाधान देता है. आकर्ण धनुरासन रीढ़ को लचीला बनाता है, मांसपेशियों को मजबूत करता है और पूरे शरीर में संतुलन लाता है. नियमित अभ्यास से दर्द में राहत मिलती है और ऊर्जा बढ़ती है.
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क्या है आकर्ण धनुरासन?
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, आकर्ण धनुरासन एक ऐसा आसन है जो शरीर के कई हिस्सों को मजबूत और लचीला बनाता है. यह आसन धनुष और तीर की मुद्रा की तरह किया जाता है, जिसमें एक पैर को हाथ से पकड़कर कान के पास लाया जाता है. नियमित अभ्यास से इसके कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं.
जांघों और पैरों के लिए रामबाण
आकर्ण धनुरासन सबसे पहले जांघों, कूल्हों और हैमस्ट्रिंग (पीछे की जांघ की मांसपेशियों) को मजबूत और लचीला बनाता है. इस आसन में पैर को ऊपर उठाने और खींचने की क्रिया से इन हिस्सों में स्ट्रेच आता है, जिससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं और दर्द की शिकायत कम होती है.
रीढ़ की हड्डी को मिलेगी नई जिंदगी
इस आसन का दूसरा बड़ा लाभ रीढ़ की हड्डी को मिलता है. रोजाना अभ्यास करने से रीढ़ में लचीलापन बढ़ता है और स्पाइनल कॉर्ड मजबूत बनता है. इससे पीठ दर्द, साइटिका और कमर की जकड़न जैसी समस्याओं में राहत मिलती है.
कंधों की जकड़न और खराब पोस्चर सुधारे
बैठे रहने की आदत वाले लोगों के लिए यह आसन विशेष रूप से फायदेमंद है. कंधे और भुजाएं भी इस आसन से मजबूत होती हैं. पैर को पकड़ने और खींचने में कंधों और हाथों की मांसपेशियां पूरी तरह सक्रिय रहती हैं, जिससे ऊपरी शरीर की ताकत बढ़ती है. यह आसन कंधों की जकड़न दूर करने और पोस्चर सुधारने में भी मदद करता है.
पेट की समस्याओं से छुटकारा
पाचन तंत्र पर भी आकर्ण धनुरासन का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. यह आसन कब्ज और अपच की समस्या को दूर करने में सहायक है. पेट के अंगों पर पड़ने वाले दबाव से पाचन क्रिया बेहतर होती है और गैस, ब्लोटिंग जैसी दिक्कतें कम होती हैं.
इस बात का खास ख्याल रखें
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस आसन को शुरुआत में योग प्रशिक्षक की देखरेख में सीखें. गर्भवती महिलाएं, कमर या घुटने में गंभीर चोट वाले लोग इसे बिना सलाह के न करें. रोजाना 5-10 मिनट अभ्यास से शरीर में ऊर्जा और संतुलन का अनुभव होता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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