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गले की खिच-खिच होगी दूर और आवाज बनेगी सुरीली, बस अपनाएं आयुर्वेद के ये आसान नुस्खे

Ayurveda for throat : आज के इस आर्टिकल में हम आपको गले की खिच-खिच दूर करने का नुस्खों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे आपकी आवाज सुरीली हो सकती है.

गले की खिच-खिच होगी दूर और आवाज बनेगी सुरीली, बस अपनाएं आयुर्वेद के ये आसान नुस्खे
Home remedies for sore throat : यह आर्टिकल आयुर्वेद के जरिए गले और आवाज को स्वस्थ रखने के उपाय बताता है

Gale ki awaj kyun hoti hai kharab : हमारी आवाज ही हमारी पहचान होती है. किसी की आवाज इतनी मीठी होती है कि सुनने वाले को सुकून मिलता है, तो कुछ की आवाज थोड़ी भारी या कर्कश होती है. अक्सर लोग सोचते हैं कि आवाज का लेना-देना सिर्फ गले से है, लेकिन आयुर्वेद कुछ अलग ही कहता है. आयुर्वेद के अनुसार, हमारी आवाज का सीधा कनेक्शन हमारे पेट, सांस की नली और दिमाग की शांति से भी जुड़ा होता है. अगर आपका गला बार-बार बैठ जाता है या आवाज साफ नहीं निकलती, तो यह सिर्फ मौसम का असर नहीं है. यह शरीर में 'वात' और 'पित्त' का बैलेंस बिगड़ने का संकेत हो सकता है. जब ये दोनों गड़बड़ होते हैं, तो गला भारी हो जाता है और हमेशा खिचखिच बनी रहती है. इसके अलावा लाइफस्टाइल से जुड़ी कुछ गलतियां भी होती हैं, जो हमारी आवाज को बेसुरा कर देती हैं. आज के इस आर्टिकल में हम आपको गले की खिच-खिच दूर करने का नुस्खों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे आपकी आवाज सुरीली हो सकती है.

गले की आवाज क्यों होती है खराब

गले और आवाज से जुड़ी परेशानियों में काफी हद तक रोजमर्रा से जुड़ी आदतें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जैसे जोर से चिल्लाना, ऊंची आवाज में बात करना, ज्यादा ठंडा पानी या कोल्ड ड्रिंक पीना, पेट साफ न रहना और तंबाकू का सेवन करना शामिल है. आयुर्वेद में आवाज को कोमल और गले को 'स्वस्थ' रखने के लिए कई उपाय बताए गए हैं.

गले की आवाज ठीक करने का उपाय

पहला, दिन की शुरुआत गर्म पानी से करें और हो सके तो पूरे दिन हल्के गर्म पानी का सेवन करें. गर्म पानी के सेवन से गले में सूजन या संक्रमण का खतरा कम रहता है. सुबह का समय गले के लिए बहुत सेंसिटिव होता है और ऐसे में सुबह के समय गले पर जोर न दें और लंबे समय तक फोन पर बात करने से भी बचें. ये आदतें गले को रिलैक्स करने में मदद करेंगी.

दूसरा, श्वास से जुड़े अभ्यास करें. ये पेट से लेकर गले तक के लिए लाभकारी हैं. इसके लिए डायाफ्रामिक श्वास अभ्यास, पर्ड-लिप ब्रीदिंग, कपालभाति और भस्त्रिका कर सकते हैं. ये सभी अभ्यास मस्तिष्क में भी ऑक्सीजन के प्रसार को बढ़ाते हैं और रक्त संचार भी बेहतर तरीके से होता है.

तीसरा, कुछ घरेलू उपाय हैं, जिन्हें रोजाना अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं. इसके लिए सुबह वक्त शहद का सेवन करें, गुनगुने दूध में हल्दी लेकर रात के समय पीएं और अगर खांसी की समस्या है तो जोर से खांसने से बचें और मुलेठी का सेवन करें. मुलेठी गले के लिए संजीवनी की तरह काम करती है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

लेखक के बारे में
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सुभाषिनी त्रिपाठी
Senior sub editor
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