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This Article is From Sep 25, 2024

वायु प्रदूषण से बढ़ जाता है पार्किंसंस रोग का खतरा, एक्सपर्ट ने बताया PM2.5 और NO2 से खराब होते हैं इस बीमारी के लक्षण

सर गंगा राम अस्पताल की वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अंशु रोहतगी ने बताया, "हां, इस बात के प्रमाण बढ़ रहे हैं कि वायु प्रदूषण से पार्किंसंस रोग विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है."

वायु प्रदूषण से बढ़ जाता है पार्किंसंस रोग का खतरा, एक्सपर्ट ने बताया PM2.5 और NO2 से खराब होते हैं इस बीमारी के लक्षण
दुनिया भर में 10 मिलियन से ज्यादा लोग पार्किंसंस रोग से पीड़ित हैं.

हेल्थ एक्सपर्ट्स ने मंगलवार को कहा कि वायु प्रदूषण और पार्किंसंस रोग के जोखिम के बीच संबंध को दर्शाने वाले प्रमाण बढ़ रहे हैं. दुनिया भर में 10 मिलियन से ज्यादा लोग पार्किंसंस रोग से पीड़ित हैं. अकेले भारत में पार्किंसंस रोग के वैश्विक बोझ का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा है. JAMA नेटवर्क ओपन में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) के हाई लेवल पार्किंसंस के बढ़ते जोखिम से जुड़े हैं.

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स:

सर गंगा राम अस्पताल की वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अंशु रोहतगी ने बताया, "हां, इस बात के प्रमाण बढ़ रहे हैं कि वायु प्रदूषण से पार्किंसंस रोग विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है."

रोहतगी ने कहा, "हाल के अध्ययनों से पता चला है कि PM2.5 और NO2 जैसे प्रदूषकों के संपर्क में आने से भी पार्किंसंस के लक्षण खराब हो सकते हैं." PM2.5 एक हानिकारक पदार्थ है जो फेफड़ों में प्रवेश कर सकता है और हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है. यह ज्वालामुखी और रेगिस्तान जैसे प्राकृतिक स्रोतों या उद्योग, कार, कृषि, घरेलू दहन और जलवायु परिवर्तन से संबंधित आग जैसी मानवीय एक्टिविटीज से आ सकता है.

वायु प्रदूषण इन बड़े रोगों का भी बढ़ाता है खतरा:

पार्किंसंस के अलावा, PM2.5 को अस्थमा, खराब लंग्स फेफड़ों, कैंसर और हार्ट रोग, डायबिटीज और अल्जाइमर के जोखिम के बढ़ने सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है.

डब्ल्यूएचओ 5 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर हवा (5 ug/m³) की वार्षिक औसत सांद्रता को बहुत अच्छी एयक क्वालिटी के रूप में सुझाता है. हालांकि, दुनिया की 99 प्रतिशत आबादी इस मान से ऊपर की सांद्रता के साथ रहती है.

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पार्किंसंस वाले लोगों के लिए वायु प्रदूषण ज्यादा खतरनाक:

रोहतागी ने कहा कि वायु प्रदूषण बढ़ने से खासकर से महानगरीय क्षेत्रों में, पार्किंसंस रोग विकसित होने के ज्यादा जोखिम से जुड़े हैं, जिन लोगों को पहले से ही पार्किंसंस का डायग्नोस किया गया है, उनके लिए वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से बीमारी की प्रगति और लक्षण ज्यादा गंभीर हो सकते हैं.

एक्सपर्ट्स ने कहा, "पीएम 2.5 जैसे प्रदूषक ब्लड ब्रेन बैरियर को पार कर सकते हैं, जिससे सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा हो सकता है, जो पार्किंसंस रोग का जोखिम कारक माना जाता है."

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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