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97 साल की महिला ने प्लेन के पंख पर खड़े होकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, मेरी मां ऐसा सोच भी नहीं सकतीं, आखिर क्यों?

97 साल की Betty Bromage ने उड़ते विमान के पंख पर खड़े होकर अपना ही वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ दिया. जानिए डॉक्टरों से कि भारतीय महिलाएं 35-40 की उम्र के बाद जोड़ों के दर्द, कमजोरी और फिटनेस की समस्याओं का सामना क्यों करने लगती हैं.

97 साल की महिला ने प्लेन के पंख पर खड़े होकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, मेरी मां ऐसा सोच भी नहीं सकतीं, आखिर क्यों?
97 साल की उम्र में उड़ते विमान के पंख पर खड़ी हो गई महिला
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97 साल की ब्रिटिश महिला बैटी ब्रोमेज ने उड़ते विमान के पंख पर खड़े होकर अपना ही गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ दिया. खास बात यह है कि पिछले साल उन्हें स्ट्रोक आया था. इस खबर ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. जब 97 साल की उम्र में कोई महिला ऐसा कारनामा कर सकती है, तो आखिर क्यों भारत में कई महिलाएं 35-40 की उम्र के बाद ही जोड़ों, कमर और शरीर दर्द की शिकायत करने लगती हैं?

भारतीय महिलाओं में 35-40 के बाद कमजोरी, Vitamin D की कमी, प्रोटीन की कमी, मेनोपॉज, कम शारीरिक गतिविधि और हेल्थ को प्राथमिकता न देने जैसी वजहों से बढ़ सकती है. डॉक्टरों ने इसके पीछे के कारण बताए हैं. हालांकि हर व्यक्ति और समाज अलग होता है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त प्रोटीन, समय पर स्वास्थ्य जांच और खुद की सेहत को प्राथमिकता देना स्वस्थ उम्र बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

यहां देखें बैटी ब्रोमेज का वी‍ड‍ियो - 

इस खबर ने मेरे जहन में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. भारत में भी लाखों बुजुर्ग हैं. दूर क्‍यों जाऊं मेरे ही पर‍िवार और आस-पड़ोस में ऐसे कई लोग हैं, जो इस उम्र में हैं लेकिन उनकी श‍िकायतें और हैं. खासकर महिलाओं की. 35 की उम्र में ही ज्‍यादात भारतीय मह‍िलाएं जोड़ों के दर्द, कमर दर्द या क‍िसी दूसरी तरह की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या का ज‍िक्र करती दिख जाती हैं. 

डेटा से अलग अगर अपने अनुभव की भी बात करूं तो यही देखने को म‍िलता है. जबक‍ि अगर आप अपने आसपास किसी व‍िदेशी टूरिस्‍ट को देखें या कई सोशल मीड‍िया पोस्‍ट देखें तो यह एक बड़ा फर्क आपको नजर आएगी भारतीय मह‍िलाओं को वेस्‍टर्न मह‍िलाओं में. वे उम्र के एक पड़ाव के बाद भी झूमती-गाती, तैरती या जीवन को इंज्‍वॉय करती नजर आती हैं. वहीं मेरी मां, बड़ी बहन सास या ज्‍यादातर भारतीय मह‍िलाएं अपने घुटनों में दर्द की शिकायत करती हुईं.

मेरे जहन में ये सवाल उठा क‍ि आख‍िर ऐसा क्‍यों है. क्‍यों भारतीय मह‍िलाएं इतनी उम्र में इस तरह के साहसिक कारनामे बहुत कम देखने को मिलते हैं. क्या इसकी वजह सिर्फ उम्र है, या फिर हमारी जीवनशैली, खानपान और बढ़ती उम्र को देखने का नजरिया. आख‍िर इसके पीछे की वजह क्‍या हो सकती है.

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Photo Credit: Image Credit: guinnessworldrecords.com

क्यों भारतीय महिलाएं बढ़ती उम्र में जल्दी कमजोर हो जाती हैं जबकि कई विदेशी महिलाएं 90+ उम्र में भी एक्टिव रहती हैं?


87 की उम्र में की थी इस एडवेंचर की शुरुआत

ब्रिटेन के चेल्टनहैम की रहने वाली बेटी ब्रोमेज ने 4 अगस्त को उड़ते विमान के पंख पर बंधकर करीब पांच मिनट तक हवा में रहकर सबसे उम्रदराज महिला विंग वॉकर के रूप में अपना ही गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बेहतर किया.

यह उनका छठा विंग वॉक था. खास बात यह है कि उन्होंने पहली बार 87 साल की उम्र में इस साहसिक खेल की शुरुआत की थी. इस बार उन्होंने यह अभियान उस अस्पताल के लिए धन जुटाने के मकसद से किया, जहां स्ट्रोक के बाद उनका इलाज हुआ था.

उम्र नहीं, फिटनेस तय करती है सीमाएं

इस बारे में एनडीटीवी ने बात की जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. ईश्वर बोहरा से. डॉक्‍टर ने बताया कि बढ़ती उम्र में शरीर को सक्रिय बनाए रखना कई चीजों पर निर्भर करता है. जैसे रोजाना शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त प्रोटीन वाला संतुलित भोजन, मांसपेशियों की ताकत बनाए रखना, पुरानी बीमारियों का समय पर इलाज और मानसिक रूप से सक्रिय रहना.

इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति 97 साल की उम्र में विंग वॉक कर सकता है, लेकिन सही जीवनशैली अपनाकर उम्र बढ़ने के असर को काफी हद तक धीमा जरूर किया जा सकता है.

30 की उम्र के बाद कौन-सी 5 आदतें अपनानी चाहिए?

एनडीटीवी ने डॉ. नूपुर गुप्ता से बात की. वे गुरुग्राम स्थित एक जानी-मानी प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ (Obstetrician & Gynecologist) हैं, जिन्हें 25 से अधिक वर्षों का अनुभव है. जब हमने उनसे जानना चाहा क‍ि इसके पीछे क्‍या वजह है और मह‍िलाएं कैसे अपनी सेहत को दुरुस्‍त रख सकती हैं तो उनहोंने बताया-

1. रोजाना वॉक  : रोजाना वॉक करना हर किसी की बकेट लिस्ट में होना चाहिए. यह आपके हाथ, पैर और कोर के लिए अच्छी एक्सरसाइज है.

2. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग  : अक्सर यह मान लिया जाता है कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग सिर्फ पुरुषों के लिए है. लेकिन यह महिलाओं के लिए भी उतनी ही जरूरी है, क्योंकि यह मसल हेल्थ के लिए अच्छी है.

3. पर्याप्त प्रोटीन : भारतीय आहार और खासकर वेजिटेरियन थाली में स्वाद और फ्लेवर का ज्यादा ख्याल रखा जाता है, जबकि इसमें आपको प्रोटीन के लिए भी अच्छी-खासी जगह बनाने की जरूरत है.

4. नियमित हेल्थ चेकअप : यह देखा गया है कि ज्यादातर भारतीय महिलाएं पूरे घर की चिंता और काम में अपना ख्याल रखना भूल जाती हैं.

5. अच्छी नींद  : अच्छी नींद आपकी ओवरऑल हेल्थ के लिए अच्छी है. यह शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करने और रिपेयर करने में मददगार है ही, साथ ही यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अच्छी है.

भारत में ऐसे उदाहरण कम क्यों देखने को मिलते हैं?

भारत में 90 या 95 साल की उम्र में इस तरह के साहसिक कारनामे करने वाले लोग बहुत कम नजर आते हैं. डॉ. ईश्वर बोहरा का कहना था कि इसकी वजह सिर्फ बढ़ती उम्र नहीं है. हमारे यहां लोग अक्सर तब सेहत पर ध्यान देना शुरू करते हैं, जब कोई बीमारी सामने आ जाती है.

डॉ. ईश्वर बोहरा के अनुसार स्वस्थ उम्र बढ़ने की तैयारी 60 या 70 साल में नहीं, बल्कि 30 और 40 की उम्र से ही शुरू हो जाती है.

डॉक्‍टर ने बताया कि नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त प्रोटीन, मांसपेशियों की मजबूती और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जैसी आदतें लंबे समय तक शरीर को सक्रिय बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाती हैं.

डॉ. ईश्वर बोहरा के अनुसार अगर भारतीय इन बातों पर समय से ध्यान दें तो इसमें कोई शक नहीं कि यहां के बुजुर्ग भी इस तरह के एडवेंचर का हिस्सा बन सकते हैं.

डॉ. नूपुर गुप्ता का कहना हैं क‍ि अपने इतने सालों के अनुभव में उन्‍होंने देखा है क‍ि भारतीय मह‍िलाएं अक्‍सर अपनी सेहत को निग्‍लेक्‍ट कर देती हैं. वे पहले सारे काम करना चाहती हैं और सेहत को अंंत में रखती हैं.  

भारतीय महिलाओं में जल्दी कमजोरी आने की 5 बड़ी वजहें

डॉ. नूपुर गुप्ता के अनुसार, बढ़ती उम्र में कमजोरी सिर्फ उम्र की वजह से नहीं आती. कई बार इसकी शुरुआत 30-40 की उम्र से ही हो जाती है. इसके पीछे ये 5 बड़े कारण हो सकते हैं:

1. विटामिन D की कमी : भारतीय महिलाओं में विटामिन D की कमी एक आम समस्या है. इसकी वजह से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं, मांसपेशियों में दर्द रह सकता है और शरीर जल्दी थका हुआ महसूस कर सकता है. लंबे समय तक यह स्थिति बने रहने पर जोड़ों की समस्याएं भी बढ़ सकती हैं.

2. आहार में प्रोटीन की कमी : मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रोटीन बेहद जरूरी है. लेकिन कई महिलाओं की डाइट में पर्याप्त प्रोटीन नहीं होता. इसकी वजह से उम्र बढ़ने के साथ मसल मास तेजी से कम होने लगता है, जिससे कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है.

3. मेनोपॉज के बाद हार्मोनल बदलाव : 40 से 50 की उम्र के बीच मेनोपॉज के दौरान शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं. इसका असर हड्डियों, मांसपेशियों और ऊर्जा के स्तर पर पड़ सकता है. यही कारण है कि इस उम्र के बाद कई महिलाओं में जोड़ों के दर्द और कमजोरी की शिकायत बढ़ जाती है.

4. शारीरिक गतिविधि की कमी : रोजाना चलना-फिरना, सीढ़ियां चढ़ना या हल्की-फुल्की एक्सरसाइज भी शरीर को लंबे समय तक सक्रिय रखने में मदद करती है. लेकिन लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि की कमी मांसपेशियों को कमजोर बना सकती है और उम्र बढ़ने के असर को तेज कर सकती है.

5. अपनी सेहत को सबसे आखिर में रखना : डॉ. नूपुर गुप्ता कहती हैं कि भारतीय महिलाएं अक्सर परिवार की जिम्मेदारियों को अपनी सेहत से पहले रखती हैं. समय पर हेल्थ चेकअप न कराना, पर्याप्त आराम न लेना और पोषण पर ध्यान न देना आगे चलकर कई स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकता है.

बेटी ब्रोमेज का रिकॉर्ड सिर्फ रोमांच की कहानी नहीं है. यह इस बात की भी याद दिलाता है कि बढ़ती उम्र का मतलब सिर्फ आराम करना नहीं होता.

अगर सेहत साथ दे और मन में कुछ नया करने का जज्बा बना रहे, तो उम्र कई बार सिर्फ एक संख्या बनकर रह जाती है. शायद यही वजह है कि 97 साल की यह महिला आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा बन गई है.

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