गुरुग्राम में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति कार्यक्रम उस समय चर्चा का विषय बन गया जब केंद्रीय राज्य मंत्री और गुरुग्राम सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने मंच से ही आयोजकों पर नाराजगी जाहिर कर दी. अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के आयोजकों ने स्थानीय सांसद होने के बावजूद उन्हें उचित महत्व नहीं दिया. राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि यदि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष कार्यक्रम में नहीं आ रहे होते तो शायद वह भी इस आयोजन में मौजूद नहीं होते. उन्होंने दावा किया कि उन्हें कार्यक्रम का निमंत्रण नहीं दिया गया था.
उन्होंने कहा कि सिर्फ उन्हें बुलाया ही नहीं गया बल्कि मंच संचालन और भाषण की सूची में भी उनका नाम शामिल नहीं था. उनका कहना था कि यदि परिस्थितियां अलग होतीं तो शायद उन्हें बोलने का अवसर भी नहीं मिलता.
समाज की अनदेखी पर जताई आपत्ति
अपने भाषण में राव इंद्रजीत सिंह ने गुरुग्राम में पंजाबी समाज और स्थानीय लोगों के योगदान का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि शहर और प्रदेश के विकास में पंजाबी समाज की बड़ी भूमिका रही है. उन्होंने याद दिलाया कि गुरुग्राम में कई महत्वपूर्ण पदों पर पंजाबी समाज के प्रतिनिधि रहे हैं और भाजपा को भी इस समाज का लगातार समर्थन मिलता रहा है.
राव ने कहा कि विभाजन की पीड़ा झेलकर हरियाणा पहुंचे लोगों का यहां के मूल निवासियों ने खुले दिल से स्वागत किया था. ऐसे कार्यक्रमों में उन लोगों को भी महत्व मिलना चाहिए जिन्होंने समाज को जोड़ने का काम किया है.
कार्यक्रम की व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
केंद्रीय मंत्री ने मंच संचालन और वक्ताओं के क्रम पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं को पहले बोलने का अवसर दिया जाना चाहिए था लेकिन कार्यक्रम में ऐसा नहीं हुआ. साथ ही उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रीय नेतृत्व को पर्याप्त सम्मान नहीं मिला.
हरियाणा और विभाजन की स्मृतियों का किया जिक्र
अपने संबोधन में राव इंद्रजीत सिंह ने विभाजन के दौर और उसके बाद हरियाणा में बसने वाले परिवारों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि लाखों लोग पाकिस्तान से विस्थापित होकर हरियाणा आए थे और यहां के लोगों ने उन्हें अपनाया. विभाजन की पीड़ा को याद रखना जरूरी है लेकिन इसके साथ समाज को जोड़ने वाले लोगों का सम्मान भी होना चाहिए.
भाषण बीच में छोड़कर मंच से उतरे
कार्यक्रम के अंत में राव इंद्रजीत सिंह की नाराजगी साफ दिखाई दी. उन्होंने अपनी बात रखते हुए आयोजकों के रवैये पर असंतोष जताया और पूरा भाषण समाप्त किए बिना ही माइक छोड़ दिया. उनके इस कदम ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया और राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी.
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