हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर.
- खुले में नमाज के विरोध के बाद पहली बार बोले खट्टर
- गुड़गांव में कई जगहों पर खुले में नमाज का हुआ था विरोध
- सीएम खट्टर बोले-मस्जिद या ईदगाम में ही पढ़ें नमाज
चंडीगढ़:
हरियाणा के गुरुग्राम में शुक्रवार को (4 मई) कुछ हिंदुवादी संगठनों द्वारा नमाज में बाधा पहुंचाए जाने की खबर के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पहली बार रविवार को मामले पर चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों की जगह नजाम सिर्फ मस्जिद या ईदगाह के अंदर ही पढ़नी चाहिए.उन्होंने कहा कि नमाजियों को गुड़गांव में सड़क किनारे, उद्यानों और खाली सरकारी जमीनों पर नमाज अदा करने की इजाजत नहीं है.
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उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी हमारी है. खुले में नमाज पढ़ने का प्रचलन इन दिनों काफी बढ़ा है. सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने की बजाय मस्जिद और ईदगाह में जाना चाहिए. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, 'सीएम खट्टर ने कहा कि हमारी सरकार मामले पर करीबी नजर रखे हुए है. हालांकि उन्होंने कहा कि जहां पर जगहों की कमी है, वहां सार्वजनिक जगहों की जगह निजी जगहों या घर के अंदर नमाज पढ़नी चाहिए.
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गौरतलब है कि पिछले दो हफ्तों से दक्षिणपंथी संगठन गुड़गांव में जुमे की नमाज को 'बाधित' करने की कोशिश करते हुए आरोप लगा रहे हैं कि कुछ लोग जमीन हड़पने की कोशिश कर रहे हैं. खट्टर ने कहा, 'हमारा मानना है कि नमाज मस्जिदों और ईदगाहों जैसे धार्मिक स्थलों के परिसरों के अंदर ही अदा की जानी चाहिए. जगह की कमी होने पर यह निजी स्थानों पर या घर के अंदर अदा की जाए.'
(इनपुट : भाषा से )
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उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी हमारी है. खुले में नमाज पढ़ने का प्रचलन इन दिनों काफी बढ़ा है. सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने की बजाय मस्जिद और ईदगाह में जाना चाहिए. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, 'सीएम खट्टर ने कहा कि हमारी सरकार मामले पर करीबी नजर रखे हुए है. हालांकि उन्होंने कहा कि जहां पर जगहों की कमी है, वहां सार्वजनिक जगहों की जगह निजी जगहों या घर के अंदर नमाज पढ़नी चाहिए.
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गौरतलब है कि पिछले दो हफ्तों से दक्षिणपंथी संगठन गुड़गांव में जुमे की नमाज को 'बाधित' करने की कोशिश करते हुए आरोप लगा रहे हैं कि कुछ लोग जमीन हड़पने की कोशिश कर रहे हैं. खट्टर ने कहा, 'हमारा मानना है कि नमाज मस्जिदों और ईदगाहों जैसे धार्मिक स्थलों के परिसरों के अंदर ही अदा की जानी चाहिए. जगह की कमी होने पर यह निजी स्थानों पर या घर के अंदर अदा की जाए.'
(इनपुट : भाषा से )
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Manohar Lal Khattar, Namaz