एक ऐसे हीरो की कहानी, जिसने हिंदुस्तान का नाम सात समंदर पार रोशन कर दिया. चलिए, आपको सुनाते हैं ये जबरदस्त दास्तान. क्या आपने कभी सोचा है कि जिस मूंगफली को आप टाइम पास करते हुए खाते हैं, वो आपके पास आती कहां से है? आप यकीन करेंगे अगर मैं कहूं कि दुनिया के कोने-कोने में मूंगफली पहुंचाने के इस खेल का बादशाह एक हिंदुस्तानी सरदार है.
एक ऐसा सरदार, जिसे दुनिया कहती है "अर्जेंटीना का पीनट्स किंग!" कौन है ये शख्स? कैसे पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर की गलियों से निकलकर ये अर्जेंटीना की जमीन का शहंशाह बन गया? ये कहानी एक आम लड़के सिमरपाल सिंह की है. जिसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी किस्मत उसे हजारों मील दूर अर्जेंटीना ले जाएगी. लेकिन कहते हैं न जिसकी रगों में मिट्टी की महक और मेहनत का जुनून दौड़ता हो, वो कहीं भी सोना उगा सकता है.

अमूल में काम किया और फिर चले गए अर्जेंटीना
सिमरपाल सिंह ने श्री गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी से एग्रीकल्चर में BSc. Hons की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अमूल जैसी बड़ी कंपनी में काम करने लगे. अमूल मस्ती दही प्रोडक्ट टीम का हिस्सा थे. फिर एक दिन... साल 2005 में सिमरपाल ने अर्जेंटीना की धरती पर कदम रखा. लेकिन ये कोई फूलों का सेज नहीं था. अर्जेंटीना के मूंगफली बाजार पर पुराने खिलाड़ियों का कब्जा था. कोई बाहरी आदमी के लिए वहां टिकना नामुमकिन सा था. यहीं सिमरपाल ने वो सोचा, जो किसी ने नहीं सोचा था. उनका कहना था "अगर बाजार से खरीदना मुश्किल है तो क्यों ना खुद उगाया जाए."
बना दी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी पीनट कंपनी
ये एक जुआ था. एक ऐसा दांव, जिस पर सब कुछ लगा था. उनकी कंपनी ओलम इंटरनेशनल ने पहले कभी खेती की नहीं थी. लेकिन इस सरदार ने 700 हेक्टेयर जमीन लीज पर ली और अपना पहला दांव खेल दिया. और जानते हैं क्या हुआ? 700 हेक्टेयर कब 39,000 हेक्टेयर में बदल गया, पता ही नहीं चला. सोयाबीन, मक्का, चावल... फसलों की लाइन लग गई. एक के बाद एक चार-चार प्रोसेसिंग प्लांट खड़े हो गए. देखते ही देखते, सिमरपाल की कंपनी अर्जेंटीना के टॉप 7 मूंगफली खिलाड़ियों में शामिल हो गई. ओलम इंटरनेशनल (Olam International) दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मूंगफली एक्सपोर्ट कंपनी है, जो 70 देशों में कारोबार करती है.

अर्जेंटीना में मशहूर सिमरपाल बन गए मूंगफली किंग
सिमरपाल का ये कारनामा देखकर अर्जेंटीना में भारत के राजदूत ने उन्हें एक नाम दिया- "The Peanut Prince of Argentina" और तब से आज तक ये नाम उनकी पहचान बन चुका है. अर्जेंटीना की धरती पर उनकी पगड़ी उनकी अलग शान है. अर्जेंटीना के लोग सिमरपाल सिंह की पगड़ी को देखकर उन्हें 'महाराजा' समझते हैं और इसे अमीरी और शाही होने का प्रतीक मानते हैं. उनसे प्रेरित होकर वहां के कुछ स्थानीय लोगों ने भी पगड़ी पहनना शुरू कर दिया. लेकिन उनकी असली पहचान बनी उनकी सोच, उनकी तकनीक. सैटेलाइट से खेतों की निगरानी, मिट्टी की जांच, मौसम के हिसाब से खेती. उन्होंने अर्जेंटीना के किसानी के तौर-तरीके ही बदल डाले.
भारत लौटकर तय कर रहे खेती का भविष्य
आज सिमरपाल भारत लौट आए हैं, लेकिन उनकी उड़ान रुकी नहीं है. बड़ी-बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को लीड कर रहे हैं, नए स्टार्टअप्स में पैसा लगा रहे हैं. Louis Dreyfus Company में कदम रखते ही उन्होंने सीधा 1 बिलियन डॉलर के ऑपरेशंस की कमान अपने हाथों में ले ली. COFCO International India का पूरा नेतृत्व संभाला. और फिर साल 2024 आते-आते, अमेरिका की दिग्गज एग्री-इनोवेशन कंपनी Terviva ने भी इनकी काबिलियत का लोहा माना और इन्हें अपना COO बना दिया. इसके अलावा 'Knocksense' और 'Snackamor' जैसे नए स्टार्टअप्स में पैसा लगाकर, देश के युवा सपनों को पंख दे रहे हैं. CII और FICCI जैसे देश के सबसे बड़े मंचों से आज ये शख्स भारत की खेती का भविष्य तय कर रहा है.
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