वह खिलाड़ी अलग ही होता है, जो मैच खत्म होने की कगार पर गोल दाग विरोधी टीम की हार रूपी ताबूत में आखिरी कील ठोकता है. खास तौर से तब जब मुकाबला चरम पर हो और बढ़त गंवाने का डर हो. और रविवार को खेले गए खिताबी मुकाबले में अर्जेंटीना की जीत में बड़े साबित हुए लौतारो मार्टिनेज (Lautaro Martinez) कुछ ऐसे ही खिलाड़ी साबित हुए. स्विट्जरलैंड के खिलाड़ियों के भीतर अर्जेंटीना की बढ़त को 2-2 से बराबर करने के लिए सीने में आग धधक रही थी. और जब मुकाबले में सिर्फ तीन ही मिनट बाकी बचे हों, तो यह बदले की आग अर्जेंटीना के जोश को झुलसाते हुए उसे पेनल्टी शूटआउट में खेलने पर मजबूर कर सकती थी, जहां से मुकाबला किसी भी तरफ जा सकता था. और ऐसे में लौतारो मार्टिनेज ने बेहतरीन गोल दागते हुए स्विट्जरलैंड के भीतर धक रही राख पर ठंडा पानी डाल दिया. और इस गोल के बाद पूरे फुटबॉल जगत मे लौतारो मार्टिनज के ही चर्चे हो रहे हैं. और इस दिग्गज फुटबॉलर की कहानी करोड़ों भारत के बच्चों को प्रेरित कर रही है.
No yellow for Martinez for celebrating in the stands. ATP they are not even trying to hide it anymore, it's just too obvious😭pic.twitter.com/bhiuo2zcIz https://t.co/N0L5KfsgB7
— AB⚕ (@AbsoluteBruno) July 12, 2026
कद के लिए सुनने पड़े दुनिया भर के ताने
हालांकि, मार्टिनेज की हाइट 5 फीट, 9 इंच है, लेकिन यह फुटबॉलर की आदर्श लंबाई नहीं है. और अपने कद-काठी की वजह से लौतारो को किशोरावस्था से ही ताने सुनने पड़ने को मजबूर होना पड़ा. इसी वजह से उन्हें शुरुआती ट्रायल में 'बोका जूनियर्स' जैसे बड़े क्लबों ने मार्टिने को खारिज कर दिया. लौतारो के मुंह पर ही बोल दिया गया कि वह फुटबॉल के लिए लंबाई के लिहाज से फिट नहीं हैं.
फुटबॉल छोड़ना चाहते थे, लेकिन मां ने दी ताकत
रिजेक्शन मार्टिनेज को सिर्भ बोका जूनियर्स से ही नहीं, बल्कि कई क्लबों से झेलना पड़ा. और इससे उनका मनोबल इस कदर टूटा कि वह खेल से संन्यास लेना चाहते थे. ऐसी जरूरत के समय उनके पिता और खासकर मां ने हिम्मत दी कि इस खेल में कद से ज्यादा दम और पोजीशनिंग मायने रखती है. और मां से मिले इस ब्रह्मवाक्य को मार्टिनेज घोट कर पी गए.
"¡VAMOS!" 🇦🇷🔥 Messi and Lisandro Martinez pic.twitter.com/3T0V1u4Dat
— Prince Shegs (Omo Olumo) (@Princeshegs2348) July 12, 2026
दुनिया ने दिया एल तोरो (सांड) का नाम
भारतीयों या किसी को भी यह सुनने में अजीब लगे, लेकिन मार्टिनेज ने खास गुणों के कारण 'एल तोरो' नाम कमाया. यह तमगा मार्टिनेज ने खेल के तरीके से हासिल किया. दरअसल मार्टिनेज जब बचपन के दिनों में उम्र में बड़े लड़कों के खिलाफ खेलते थे, तो वह किसी भी डिफेंडर से नहीं डरते थे. उनकी ताकत औ गेंद छीनने की आक्रामकता किसी सांड सरीखी थी. ही आक्रामकता उनके छोटे से कस्बे के खेल मैदानों से लेकर इंटर मिलान के बड़े स्टेडियमों तक कायम रही और इसी ने उन्हें 'एल तोरो' (सांड ) का उपनाम दिलाया.
कमियों के बीच भी पिता ने जिंदा रखा सपना
लौतारो के पिता मारियो मार्टिनेज खुद एक फुटबॉलर थे, इसलिए वे जानते थे कि एक बच्चे का फुटबॉल किट, जूते और ट्रेनिंग का खर्च कितना अधिक होता है. उस समय उनके परिवार की आय बहुत सीमित थी. कई बार हालात ऐसे होते थे कि अगल फुटबॉल के जूते खरीदे गए, तो महीने के राशन या अन्य जरूरतों में कटौती करनी पड़ी. लेकिन माता-पिता दोनों की सोच ऐसी थी कि उन्होंने इसे खर्च नहीं, बल्कि निवेश माना. दोनों ने लौतारो को कभी भी महसूस ही नहीं होने दिया कि वह गरीब हैं. और यह बताने और समझाने के लिए काफी है कि किसी भी खेल में बड़ा खिलाड़ी बनने के लिए पैसे से नहीं, बल्कि सोच से भी अमीर होना एक अनिवार्य बात है. लौतारो ने खुद कई बार देखा कि नके पिता अपनी पुरानी शर्ट को दोबारा पहन रहे हैं या अपनी पसंद की चीजों को छोड़ रहे हैं ताकि लौतारो के लिए बस का किराया और ट्रेनिंग फीस निकल सकें.
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