फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी इस बात तीन देश- अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको कर रहे थे. कनाडा, मैक्सिको और अमेरिका राउंड ऑफ 16 में हारकर बाहर हुए. इन तीनों देशों के बाहर होने के साथ ही साल 1998 से मेजबानों के वर्ल्ड कप ना जीतने का सिलसिला जारी रहा. कनाडा ने जहां इतिहास रचते अपने वर्ल्ड कप का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और नॉकआउट में दक्षिण अफ्रीका को हराकर पहली बार प्री क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया था तो मैक्सिको की कोशिश 1986 के बाद दूसरी बार क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने की थी, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाई. दूसरी तरफ अमेरिका रहा, जिसका बेल्जियम के खिलाफ मैच जारी वर्ल्ड कप का आखिरी मैच साबित हुआ.
कनाडा का प्रदर्शन
ग्रुप स्टेज में कनाडा ने अच्छी शुरुआत की. पहले उसने बोस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ खेला. इसके बाद कतर को 6-0 से रौंदा. यह कनाडा की वर्ल्ड कप की पहली और सबसे बड़ी जीत रही. कनाडा के लिए इस मुकाबले में जोनाथन डेविड ने हैट्रिक लगाई. हालांकि, फिर उसे स्विट्जरलैंड के खिलाफ 2-1 से हार का सामा करना पड़ा. लेकिन कनाडा नॉकआउट राउंड के लिए क्वालीफाई करने में सफल हुई.

नॉकआउट राउंड नें कनाडा ने साउथ अफ्रीका को हराकर इतिहास रच दिया. कनाडा ने अफ्रीकी टीम को 1-0 से हरा दिया और पहली बार प्री क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया. हालांकि, मोरक्को के खिलाफ 0-3 से मिली हार से उसका सफर थम गया.
मैक्सिको भी हुआ बाहर
मैक्सिको का इंग्लैंड के खिलाफ राउंड ऑफ 16 के मैच से पहले सभी को उम्मीद थी कि टीम इसे जीतकर क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई करेगी. क्योंकि मैक्सिको अपने होम ग्राउंड पर खेली थी, जहां वो अपने पिछले 90 में से सिर्फ दो मैच हारी थी, लेकिन इंग्लैंड ने अपने इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज की. मैक्सिको इस मैच से पहले तक एक भी गोल नहीं खाई थी.

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ग्रुप स्टेज में मैक्सिक ने अपना पहला मैच साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेला था. जिसे उन्होंने 2-0 से अपने नाम किया. इसके बाद उन्होंने साउथ कोरिया को हराया. जबकि अपने ग्रुप स्टेज के आखिरी मैच में क्रेचिया को मात दी.
ग्रुप टॉपर के रूप में फिनिश करने के बाद मैक्सिको ने नॉकआउट राउंड में इक्वाडोर को रौंदा. इस मैच को 2-0 की लाइन से जीतकर मैक्सिको ने प्री क्वार्टर फाइनल का टिकट हासिल किया. इसके बाद राउंड ऑफ 16 में उसका सामना इंग्लैंड से हुआ.
ट्रंप कार्ड भी नहीं दिला पाई अमेरिका को जीत
बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ 16 के मुकाबले से पहले अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को राउंड ऑफ 32 में बॉस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ मैच में सीधा रेड कार्ड मिला था. इस रेड कार्ड को हटाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ने फीफा के अध्यक्ष को फॉन कॉल किया, जिसके बाद सस्पेंशन टाल दिया गया. इसको लेकर काफी विवाद हुआ. हालांकि, बालोगुन बेल्जियम के खिलाफ कोई कमाल नहीं दिखा पाए और अमेरिका को 1-4 से हार का सामना करना पड़ा.

अमेरिका ने अपने ग्रुप चरण का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था. उसने 6 अंक हासिल किए. यह उनके विश्व कप इतिहास का ग्रुप चरण में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा. उन्होंने अपने पहले मैच में पराग्वे को 4-1 से हराया और उसके बाद ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से. हालांकि, अपने अंतिम ग्रुप मैच में उन्हें तुर्किये से 3-2 से हार का सामना करना पड़ा. अमेरिका ने राउंड ऑफ 32 में बॉस्निया को 2-0 से रौंदा था. लेकिन इस मैच में बालोगुन को रेड कार्ड मिला था, जिसके बाद के घटनाक्रम में काफी विवाद हुआ था.
नहीं टूटा 28 सालों से चला आ रहा सिलसिला
अमेरिका, कनाडा मजबूत टीमें नहीं है, लेकिन मैक्सिको के चांस अधिक थे. ऐसे में वह सेमीफाइनल तक का सफर तय कर सकती थी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अगर फुटबॉल वर्ल्ड कप के इतिहास को देखें तो अभी तक सिर्फ छह टीमें ही मेजबान के तौर पर वर्ल्ड कप जीत पाई हैं. उरुग्वे (1930), इटली (1934), इंग्लैंड (1966), वेस्ट जर्मनी (1974) अर्जेंटीना (1978) और फ्रांस (1998) ही बतौर मेजबान वर्ल्ड कप जीत पाएं हैं.
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