- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हासिल की ऐतिहासिक कामयाबी
- भारत ने इस महा-अभियान के तहत 24 देशों के साथ समझौतों पर किए हस्ताक्षर
- 11 अन्य देशों के साथ चल रही है बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक भू-राजनीति और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है. देश के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शुरू किए गए 'ग्रेट मिनरल ऑफेंसिव' के तहत भारत ने मात्र 24 महीनों के भीतर दुनिया के 35 देशों को एक साझा ग्रिड से जोड़ दिया है. इस रणनीतिक कदम का मुख्य उद्देश्य रेयर अर्थ (दुर्लभ तत्व), क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर चिप्स की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है.
मंत्रालयों और वैश्विक साझेदारों से प्राप्त 2024–2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने इस महा-अभियान के तहत 24 देशों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर कर लिए हैं, जबकि 11 अन्य देशों के साथ बातचीत अग्रिम स्तर पर चल रही है.
वैश्विक स्तर पर रणनीतिक साझेदारी
भारत का यह खनिज अभियान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरी दुनिया में अपनी मजबूत धाक जमाई है. भारत ने अमेरिका के साथ क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क और नीदरलैंड के साथ धोलेरा फैब के लिए सेमीकंडक्टर लिथोग्राफी डील की है. इसके अलावा, अर्जेंटीना में लिथियम ब्लॉक और चिली के साथ व्यापार वार्ता को गति दी है.
बैटरी निर्माण और ईवी (EV) सेक्टर को मजबूती देने के लिए डीआर कांगो और जाम्बिया जैसे देशों के साथ कोबाल्ट-कॉपर ब्लॉक और ऑस्ट्रेलिया के साथ निवेश साझेदारी की गई है. कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे देशों के साथ 'सेंट्रल एशिया रेयर-अर्थ फोरम' के जरिए रणनीतिक संवाद स्थापित किया गया है.
दूसरे देश पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में बढ़ाए कदम
आज के डिजिटल और ग्रीन-एनर्जी के दौर में सेमीकंडक्टर और ईवी बैटरियों की मांग चरम पर है. इस ग्रिड के जरिए भारत ने किसी एक देश (जैसे चीन) पर अपनी निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं. यह महा-ग्रिड भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का एक नया और विश्वसनीय केंद्र बनाता है.
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