प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों इंडोनेशिया के दौरे पर हैं. उनकी यात्रा के दौरान दोनों देशों ने मंगलवार को करीब 20 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर दस्तखत किए. इनमें से एक एमओयू भारत के चुनाव आयोग और इंडोनेशिया के जनरल इलेक्शन कमीशन (केपीयू) के बीच हुआ. इसके तहत दोनों देश चुनाव प्रबंधन में सहयोग, अनुभवों और अच्छी परंपराओं का आदान-प्रदान करेंगे. समझौते के तहत चुनाव कर्मचारियों का प्रशिक्षण और तकनीकी आदान-प्रदान भी होगा. इंडोनेशिया के साथ चुनाव आयोग ने इससे 2011 में इसी तरह का एक एमओयू किया था.चुनाव आयोग के मुताबिक अब तक 28 देशों और संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ इस तरह के एमओयू हुए हैं.
भरोसे का प्रतीक बनता भारत
आज हम पाते हैं कि जब लोकतांत्रिक देश चुनाव से जुड़ी भरोसेमंद विशेषज्ञता की तलाश कर रहे होते हैं, तो भारत उनकी पहली पसंद के रूप में सामने आता है. भारत चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में एक पसंदीदा साझेदार के रूप में उभर रहा है. भारत अपने सहयोगी देशों के साथ तकनीक, संस्थागत अनुभव और बेहतरीन कार्य-पद्धतियां साझा कर रहा है. इसी दिशा में भारत और इंडोनेशिया ने चुनाव प्रबंधन पर एक एमओयू पर दस्तखत किए हैं. इसके तहत भारत इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन भी इंडोनेशिया को निर्यात भी करेगा.
List of outcomes (20 in total) : State Visit of PM @narendramodi to Indonesia ⬇️
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) July 7, 2026
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इंडोनेशिया को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है. उसकी आबादी करीब 28.8 करोड़ है. वह अपनी चुनावी व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए चुनाव तकनीक, प्रबंधन विशेषज्ञता और संस्थागत सहयोग के लिए भारत से यह समझौता किया है. हालांकि चुनाव आयोग के मुताबिक दोनों देशों ने पहली बार 16 अगस्त 2011 को एक एमओयू पर दस्तखत किए थे. यह समझौता अगस्त 2016 में समाप्त हो गया था. लेकिन उसके बाद से दूसरे समझौते की प्रक्रिया जून 2017 से ही चल रही थी.
भारत ने किन देशों के साथ किए हैं एमओयू
चुनाव आयोग के मुताबिक भूटान से लेकर इंडोनेशिया तक भारत का चुनाव मॉडल एक वैश्विक बेंचमार्क बन गया है. चुनाव आयोग के मुताबिक अब तक मालदीव, बांग्लादेश, आस्ट्रेलिया, रूस, जॉर्जिया, मंगोलिया, फिजी, दक्षिण कोरिया, उज्बेकिस्तान, भूटान, ट्यूनिशिया, किर्गीस्तान, सेशल्स, मारिशस, अफगानिस्तान, जांबिया, म्यांमा, मैक्सिको, गुयाना, बोस्निया हर्जोगोबिना, दक्षिण अफ्रीका, केन्या और जॉर्डन के साथ एमओयू पर दस्तखत हुए हैं. इसके अलावा चुनाव आयोग ने संयुक्त राष्ट्र, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फार डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल अस्सिटेंस, एफईएमबीओएसए, कॉमनवेल्थ इलेक्टोरल नेटवर्क, एसोसिएशन ऑफ एशियन इलेक्शन अथॉरिटीज और एसोसिएशन ऑफ वर्ल्ड इलेक्शन बॉडीज जैसे संगठनों के साथ भी एमओयू पर दस्तखत किए हैं.

भारत-इंडोनेशिया समझौता
भारत और इंडोनेशिया में हुआ समझौता चुनाव तकनीक, मानव संसाधन विकास, क्षमता निर्माण और बेहतरीन कार्य-पद्धतियों के आदान-प्रदान में सहयोग को बढ़ावा देगा. दोनों देशों के अधिकारियों ने भारतीय ईवीएम की डिजाइन, चुनाव निगरानी प्रणालियों, मतदाता जागरूकता पहलों और लोकतांत्रिक शासन के लिए डिजिटल टूल्स का अध्ययन करने के लिए एक-दूसरे के देशों का दौरा किया है.
भारत की विशेषज्ञता केवल चुनाव कराने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारत दुनिया के कई देशों में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में भी मदद कर रहा है. भारत में बने इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) ने अपनी विश्वसनीयता, सुरक्षा और लाखों मतदाताओं वाले चुनावों को कुशलतापूर्वक संपन्न कराने की क्षमता के कारण अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है. भूटान पहला देश था जिसने भारत से तकनीकी सहायता लेकर खास तौर पर तैयार की गई ईवीएम को अपनाया था. नेपाल को भी प्रायोगिक इस्तेमाल के लिए खास तौर पर तैयार मशीनें और संस्थागत सहयोग दिया गया.

दुनिया को ईवीएम का निर्यात
भारत में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) बनाने का काम दो सरकारी कंपनियां बेंगलुरु की भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और हैदराबाद स्थित इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) करती है.बीईएल की वेबसाइट के मुताबिक वह ईवीएम का निर्यात श्रीलंका, यूगांडा, मालावी, दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और नेपाल को करती है. इनमें से नामीबिया वह देश हैं, जिसने पहले ईवीएम को अपनाया फिर वीवीपैट को. भारत मेडागास्कर, म्यांमा, कंबोडिया, फिजी, भूटान, सिएरा लियोन और मंगोलिया जैसे देशों के चुनावों में अमिट स्याही भी निर्यात करता है. इससे चुनावों की निष्पक्षता और अखंडता की रक्षा करने वाले एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में भारत की प्रतिष्ठा और मजबूत हुई है.
इस तरह हम पाते हैं कि जैसे-जैसे लोकतंत्र में तकनीक का दखल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे दुनिया के सबसे बड़े चुनावों को आयोजित करने का भारत का अनुभव दुनिया के काम आ रहा है. भारत ईवीएम के निर्यात से लेकर अपनी विशेषज्ञता साझा कर दुनिया भर में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने में मदद कर रहा है.
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