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पुर्तगाल वर्सेस क्रोएशिया से पहले रोनाल्डो की हैरान करने वाली 5 कहानियां, जब CR7 को करवानी पड़ी हार्ट सर्जरी

2026 फीफा वर्ल्ड कप में पुर्तगाल वर्सेस क्रोएशिया का मैच होने वाला है. ये नॉकआउट राउंड है, और 41 वर्षीय क्रिस्टियानो रोनाल्डो पर काफी कुछ टिका है. मैच से पहले रोनाल्डो की 5 चौंकाने वाली कहानियां.

पुर्तगाल वर्सेस क्रोएशिया से पहले रोनाल्डो की हैरान करने वाली 5 कहानियां, जब CR7 को करवानी पड़ी हार्ट सर्जरी
ऑडिबल पर सुन सकते हैं रोनाल्डो की कहानियां, फीफा वर्ल्ड कप 2026 में क्रोएशिया वर्सेस पुर्तगाल
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नई दिल्ली:

41 वर्ष की उम्र में भी क्रिस्टियानो रोनाल्डो फुटबॉल जगत को चौंका रहे हैं. 2026 फीफा विश्व कप के राउंड ऑफ 32 मुकाबले में क्रोएशिया के खिलाफ उतरते हुए उन्होंने एक नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. वह छह विश्व कप टूर्नामेंटों में गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं. पुर्तगाल को नॉकआउट चरण तक पहुंचाने में उनका योगदान अहम रहा है. जब पूरी दुनिया रोनाल्डो को विश्व कप ग्लोरी दिलाने की उम्मीद लगाए बैठी है, तब उनके जीवन की असली कहानी पर एक नजर डालते हैं. बलोन डी'ऑर, चैंपियंस लीग ट्रॉफियां और विश्व रिकॉर्ड्स से पहले का सफर घर की याद, असफलताओं, अनुशासन और सुधार की लगन से भरा है. इन अनकही कहानियों को गुइलेम बालागे की किताब क्रिस्टियानो रोनाल्डो: द बायोग्राफी और मैट एवं टॉम ओल्डफील्ड की अल्टीमेट फुटबॉल हीरोज: रोनाल्डो में खूबसूरती से कैद किया गया है. दोनों किताबें ऑडिबल पर उपलब्ध हैं.

क्रोएशिया के खिलाफ नॉकआउट मुकाबले से पहले आइए जानते हैं रोनाल्डो की पांच ऐसी कहानियां जो कई दीवाने फैंस को भी नहीं पता होंगी.

1. बोतलों और पत्थरों से ट्रेनिंग

मदीरा द्वीप पर जन्मे रोनाल्डो के पास बचपन में सही फुटबॉल उपकरण नहीं थे. उन्होंने जो कुछ भी मिला, उसी से काम चलाया, प्लास्टिक की बोतलें, पत्थर और तंग गलियां उनका पहला ट्रेनिंग ग्राउंड बने. इन्हीं अनोखी ट्रेनिंग सेशन्स ने उनकी क्लोज कंट्रोल और तेज फुटवर्क को निखारा, जो बाद में दुनिया के सबसे बेहतरीन डिफेंडर्स को भी हैरान करते रहे.

2. दिल की धड़कन ने करियर खत्म करने की धमकी दी

किशोरावस्था में डॉक्टरों ने रोनाल्डो को टेकीकार्डिया (तेज धड़कन) का पता लगाया. यह ऐसी समस्या थी जो उनके करियर को शुरू होने से पहले ही खत्म कर सकती थी. लेकिन रोनाल्डो ने घबराने की बजाय सर्जरी कराई और कुछ दिनों में ही ट्रेनिंग पर लौट आए. दुनिया जब उन्हें सही से जानती भी नहीं थी, तब उन्होंने चुपचाप इस बड़ी बाधा को पार कर लिया.

3. जब बोलने की वजह से बनता था मजाक

जब रोनाल्डो लिस्बन पहुंचे तो उनकी बोली उन्हें अलग दिखाती थी. स्पोर्टिंग अकादमी के कुछ साथी खिलाड़ी उनकी बोली का मजाक उड़ाते और उन्हें आउटसाइडर समझते थे. रोनाल्डो ने जवाब देने की बजाय अपने फुटबॉल से जवाब दिया. समय के साथ वही साथी उन्हें अकादमी का सबसे मजबूत टैलेंट मानने लगे.

4. स्पोर्टिंग में पहले हफ्ते सबसे कठिन

12 साल की उम्र में मदीरा छोड़कर स्पोर्टिंग अकादमी जॉइन करना कोई परी कथा नहीं था. रोनाल्डो परिवार से दूर लिस्बन में अकेले पड़ गएय. घर की याद उन्हें सताती थी, भावनात्मक रूप से वे टूटे हुए महसूस करते थे. लेकिन वापस घर लौटने की बजाय उन्होंने उन मुश्किल दिनों को मेहनत में बदल दिया. यही रेजिलिएंस बाद में उनके पूरे करियर की पहचान बनी.

5. सर एलेक्स फर्ग्यूसन ने फ्लेयर को निखारा

मैनचेस्टर युनाइटेड पहुंचने पर रोनाल्डो पहले से ही ट्रिक्स और स्टेपओवर्स के लिए मशहूर थे. सर एलेक्स फर्ग्यूसन ने उनके रॉ टैलेंट को देखा और उन्हें और प्रभावी बनाने का फैसला किया. उन्होंने फ्लेयर छोड़ने को नहीं कहा, बल्कि हर ड्रिबल को गिनती में लाने, निर्णय लेने, टाइमिंग और लास्ट प्रोडक्ट को बेहतर बनाने की सलाह दी. इस बदलाव ने रोनाल्डो को दुनिया के सबसे खतरनाक स्ट्राइकर में बदल दिया.

ये कहानियां बताती हैं कि रोनाल्डो की सफलता सिर्फ प्रतिभा की नहीं, बल्कि अथक मेहनत, मानसिक मजबूती और कभी हार न मानने वाले जज्बे की देन है. फैंस उम्मीद लगाए बैठे हैं कि 41 वर्षीय सुपरस्टार एक बार फिर जादू दिखाएंगे और पुर्तगाल को विश्व कप दिला सकेंगे. अब नतीजा तो 2 जुलाई के मैच के बाद ही सामने आएगा.

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