दुबई:
संयुक्त अरब अमीरात के डाक्टरों का कहना है कि अन्य देशों के नागरिकों की तुलना में भारतीयों के आनुवांशिक कारकों की वज़ह से दिल का दौरा पड़ने या मष्तिष्काघात से समय से पहले मर जाने की अधिक संभावना होती है। अबू धाबी में मेडेओर हॉस्पिटल के हृदयरोग चिकित्सक दिनेश बाबू ने कहा कि कई अध्ययनों से संकेत मिला है कि पश्चिमी देशों के नागरिकों की तुलना में भारतीयों की कम उम्र ही इस समस्या के गिरफ्त में आने की संभावना अधिक होती है।
खबर के मुताबिक बाबू ने कहा कि पश्चिमी देशों में आमतौर पर हृदयरोग 60 से 70 साल के उम्रवर्ग के लोगों को होता है, लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप में हृदयरोग से 40 और 50 के दशक में लोगों की जान चली जाती है। बाबू ने कहा कि अमेरिका, कनाडा, यूरोप और सिंगापुर में रहने वाले भारतीयों पर अध्ययन से यह स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि कम उम्र में भारतीयों में हृदयरोग या मस्तिष्काघात की अधिक घटनाएं सामने आई हैं। आंकड़ें बताते हें कि मस्तिष्काघात और दिल का दौरा समेत हृदयरोग समयपूर्व मौत की दो बड़ी वज़हें हैं।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
खबर के मुताबिक बाबू ने कहा कि पश्चिमी देशों में आमतौर पर हृदयरोग 60 से 70 साल के उम्रवर्ग के लोगों को होता है, लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप में हृदयरोग से 40 और 50 के दशक में लोगों की जान चली जाती है। बाबू ने कहा कि अमेरिका, कनाडा, यूरोप और सिंगापुर में रहने वाले भारतीयों पर अध्ययन से यह स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि कम उम्र में भारतीयों में हृदयरोग या मस्तिष्काघात की अधिक घटनाएं सामने आई हैं। आंकड़ें बताते हें कि मस्तिष्काघात और दिल का दौरा समेत हृदयरोग समयपूर्व मौत की दो बड़ी वज़हें हैं।
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