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रोटी खाएं या चावल? एक्सपर्ट ने तोड़ दिया सालों पुराना भ्रम, जानिए सेहत के लिए सबसे सही क्या है

Roti vs Rice For Health: सोनिया नारंग बताती हैं कि उत्तर भारत में रहने वाले लोग पीढ़ियों से गेहूं की रोटी खाते आए हैं. ऐसे में उनका पाचन तंत्र उसी तरह के भोजन के अनुसार ढल चुका होता है.

रोटी खाएं या चावल? एक्सपर्ट ने तोड़ दिया सालों पुराना भ्रम, जानिए सेहत के लिए सबसे सही क्या है
Roti vs Rice: एक्सपर्ट के अनुसार, रोटी और चावल में से किसी एक को पूरी तरह सही या गलत कहना गलत है.

Should I Eat Roti or Rice: भारत में शायद ही कोई ऐसा घर हो, जहां रोटी और चावल को लेकर बहस न होती हो. कोई कहता है रोटी खाओ, इससे ताकत मिलती है, तो कोई चावल को हल्का और जल्दी पचने वाला मानता है. खासकर आज के समय में जब लोग वजन, डायजेशन और गट हेल्थ को लेकर पहले से ज्यादा सजग हो गए हैं, यह सवाल और भी अहम हो गया है, सेहत के लिए रोटी ज्यादा अच्छी है या चावल?

सोशल मीडिया पर फिगरिंग आउट नाम के एक पेज पर इस विषय पर होलिस्टिक हेल्थ और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट सोनिया नारंग ने एक बेहद संतुलित और समझदारी भरा जवाब दिया है. उनके अनुसार, रोटी और चावल में से किसी एक को पूरी तरह सही या गलत कहना गलत है, क्योंकि यह फैसला आपके क्षेत्र, खान-पान की आदत और गट माइक्रोबायोम पर निर्भर करता है.

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नॉर्थ इंडियन के लिए रोटी क्यों बेहतर मानी जाती है?

सोनिया नारंग बताती हैं कि उत्तर भारत में रहने वाले लोग पीढ़ियों से गेहूं की रोटी खाते आए हैं. ऐसे में उनका पाचन तंत्र उसी तरह के भोजन के अनुसार ढल चुका होता है.

  • रोटी में फाइबर ज्यादा होता है.
  • यह धीरे-धीरे पचती है.
  • लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है.

नॉर्थ इंडियन लोगों का शरीर गेहूं को आसानी से पहचानता और पचाता है, इसलिए उनके लिए रोटी एनर्जी और सेहत दोनों के लिहाज से सही मानी जाती है.

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Photo Credit: A.I generated image.

साउथ इंडियन के लिए चावल क्यों सही है?

दक्षिण भारत में चावल मुख्य आहार है. साथ ही इडली, डोसा, अप्पम जैसे फर्मेंटेड फूड्स भी बड़ी मात्रा में खाए जाते हैं. एक्सपर्ट के अनुसार, जो लोग बचपन से चावल और फर्मेंटेड फूड खा रहे हैं, उनका गट माइक्रोबायोम उसी के हिसाब से विकसित होता है.

  • चावल हल्के होते हैं.
  • पेट पर ज्यादा दबाव नहीं डालते.
  • जल्दी एनर्जी देते हैं.

इसलिए साउथ इंडियन लोगों के लिए चावल नुकसानदेह नहीं, बल्कि उनके शरीर के लिए ज्यादा अनुकूल होता है.

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पेट के लिए हल्का क्या है? | What is easy on the Stomach?

जब सोनिया नारंग से यह सवाल पूछा गया कि पेट के लिए हल्का क्या होता है, तो उनका जवाब साफ था चावल. ये जल्दी पच जाते हैं, कमजोर पाचन वाले लोगों के लिए आसान होते हैं, बुखार, दस्त या पेट खराब होने पर डॉक्टर भी चावल खाने की सलाह देते हैं. यही वजह है कि बीमार व्यक्ति को अक्सर खिचड़ी या सादा चावल दिया जाता है.

डायजेशन की स्पीड किससे बढ़ती है?

डायजेशन की स्पीड यानी खाना कितनी जल्दी पचता है, यह भी खाने के प्रकार पर निर्भर करता है. रोटी को पचने में समय लगता है, क्योंकि इसमें फाइबर ज्यादा होता है. चावल जल्दी टूट जाते हैं और शरीर को तुरंत एनर्जी देते हैं. इसलिए जिन लोगों को गैस, ब्लोटिंग या भारीपन की शिकायत रहती है, उनके लिए सीमित मात्रा में चावल बेहतर साबित हो सकते हैं.

क्या वजन बढ़ाने या घटाने में फर्क पड़ता है?

अक्सर लोग मानते हैं कि चावल खाने से वजन बढ़ता है, लेकिन एक्सपर्ट मानती हैं कि वजन बढ़ना या घटना सिर्फ रोटी या चावल पर नहीं, बल्कि मात्रा और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है. जरूरत से ज्यादा रोटी या चावल, दोनों ही वजन बढ़ा सकते हैं.

रोटी बनाम चावल की बहस का एक ही जवाब है, जो आपका शरीर आसानी से पचा सके, वही आपके लिए सही है. नॉर्थ इंडियन के लिए रोटी बेहतर हो सकती है, साउथ इंडियन के लिए चावल. पेट के लिए हल्का भोजन चाहिए, तो चावल आसान विकल्प हैं.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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