Why is Rice a Luxury in Japan: दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में चावल को आम आदमी का खाना माना जाता है. भारत, चीन, बांग्लादेश और दक्षिण एशिया के कई देशों में चावल रोजमर्रा की थाली का हिस्सा है. गरीब से गरीब व्यक्ति भी किसी न किसी रूप में चावल खा लेता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा भी देश है, जहां चावल आम लोगों का नहीं बल्कि अमीरों और खास वर्ग का भोजन माना जाता है? यह जानकर शायद आपको हैरानी हो, लेकिन यह बिल्कुल सच है. हम बात कर रहे हैं जापान की. जापान में चावल सिर्फ खाना नहीं, बल्कि संस्कृति, सम्मान और सामाजिक हैसियत से जुड़ा हुआ है. यहां चावल की कीमत, क्वालिटी और उसका इस्तेमाल, उसे एक लक्जरी फूड बना देता है.
जापान में चावल क्यों माना जाता है अमीरों का खाना?
1. चावल सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं
जापान में चावल को ईश्वर का उपहार माना जाता है. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, चावल देवी-देवताओं को चढ़ाया जाता है. शादी, त्योहार और धार्मिक अनुष्ठानों में खास किस्म का चावल ही इस्तेमाल होता है. ऐसे में चावल केवल खाना नहीं, बल्कि सम्मान और परंपरा का प्रतीक बन गया है.
2. बेहद महंगी होती हैं जापानी चावल की किस्में
जापान में उगने वाले चावल की कई किस्में दुनिया के सबसे महंगे चावलों में गिनी जाती हैं. जैसे कोशीहिकारी (Koshihikari) जैसी किस्में, जिनका स्वाद, खुशबू और टेक्सचर बेहद खास होता है. इन चावलों की कीमत इतनी ज्यादा होती है कि आम लोग इन्हें रोज नहीं खरीद पाते.
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3. सीमित खेती और ज्यादा लागत
जापान पहाड़ी देश है, जहां खेती की जमीन बहुत सीमित है. चावल की खेती में बहुत ज्यादा तकनीक, साफ पानी और विशेष देखभाल की जरूरत होती है. सरकार भी स्थानीय किसानों को संरक्षण देती है, जिससे विदेशी सस्ता चावल आसानी से बाजार में नहीं आ पाता. इसका नतीजा यह होता है कि चावल की कीमत ऊंची बनी रहती है.

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4. रोजमर्रा के खाने में ब्रेड और नूडल्स
दिलचस्प बात यह है कि जापान में आम लोग रोजमर्रा में चावल की जगह ब्रेड, नूडल्स या इंस्टेंट फूड ज़्यादा खाते हैं. चावल अक्सर खास मौकों, रेस्तरां या पारंपरिक भोजन तक सीमित रह जाता है. यानी जिस चीज़ को हम भारत में सादा खाना कहते हैं, वही जापान में स्पेशल ट्रीट बन जाती है.
5. स्टेटस सिंबल बन चुका है चावल
जापान में किसी को महंगा, अच्छी क्वालिटी का चावल गिफ्ट करना सम्मान की बात मानी जाती है. कई कंपनियाँ अपने कर्मचारियों या खास मेहमानों को चावल गिफ्ट करती हैं. इससे साफ है कि चावल वहां स्टेटस और समृद्धि का प्रतीक है.
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भारत बनाम जापान: सोच का फर्क
भारत में चावल सस्ता, आसानी से उपलब्ध और रोज़ का भोजन है. वहीं जापान में वही चावल खास देखभाल, परंपरा और कीमत की वजह से अमीरों की थाली में जगह पाता है. यह फर्क दिखाता है कि खाना सिर्फ भूख मिटाने का जरिया नहीं, बल्कि संस्कृति और अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा होता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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