न्यूयॉर्क:
आपका स्मार्टफोन अब सिर्फ बात करने और मेसेज करने का डिवाइस ही नहीं रह गया है, बल्कि अब और भी स्मार्ट होता जा रहा है। आए दिन बाजार में आने वाली लाखों एप फोन इस्तेमाल करने को और दिलचस्प बना रही हैं। फूड संबंधित एप की बात की जाए या फिर फोन का रिचार्ज करवाने संबंधी एप, लोगों को खूब पसंद आ रही हैं।
वहीं, अगर बात हेल्थ की हो, तो स्मार्टफोन उसमें भी पीचे नहीं रहा है। अब आपकी धड़कनों की सारी जानकारी आपके फोन पास मिल जाएगी। जी हां, हृदय रोगियों के लिए एक अच्छी खबर है। हदय रोग के मरीजों की अनियमित दिल की धड़कन की निगरानी के लिए अब एक स्मार्टफोन एप आ गया है। इस एप का नाम 'एलाइवकोर हार्ट मॉनिटर स्मार्टफोन एप' है। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में इस एप की क्षमता का आकलन भी किया है।
न्यूयॉर्क के बुफैलो विश्ववद्यिालय के प्रोफेसर एनी क रटिस ने अपने अध्ययन रिपोर्ट में लिखा है कि यह एप हार्ट बीट की काफी बेहतर तरीके से निगरानी करने में सक्षम है।
मरीजों के लिए इस एप का प्रयोग करना काफी सरल है और ये उन्हें काफी पसंद भी आ रहा है।
वर्तमान में मरीजों को अपनी स्थिति की निगरानी के लिए इलेक्ट्रो कार्डियोग्राफिक इलेक्ट्रोड्स को अपनी त्वचा से चिपकाए रखना होता है, और यह करीब दो से चार हफ्ते के लिए करना होता है। इससे मरीजों को थोड़ी उलझन होती है।
करटिस ने बताया कि इस इवेंट मॉनिटर की सबसे बड़ी खामी यह है कि मरीज इसे सबके सामने नहीं प्रयोग कर सकता है और यह काफी तकलीफदेह भी है।
सन फ्रांसिस्को में हार्ट रिदम सोसायटी की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत इस नए अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि परंपरागत इवेंट मॉनिटरिंग प्रणाली के स्थान पर इस स्मार्ट फोन एप का प्रयोग बखूबी किया जा सकता है ।
शोधकर्ताओं ने दो सप्ताह तक करीब 32 हृदय रोग के मरीजों पर इस एप का प्रयोग किया और उनकी धड़कनों की जांच की।
अध्ययन में पता लगा कि एलाइवकोर हार्ट मॉनिटर स्मार्टफोन एप ने मरीजों की धड़कनों को 91 फीसदी तक सही रिकॉर्ड किया, जबकि परंपरागत इलेक्ट्रोड्स डिवाइस ने 87.5 फीसदी सही रिकॉर्ड किया।
(इनपुट्स आईएएनएस से)
वहीं, अगर बात हेल्थ की हो, तो स्मार्टफोन उसमें भी पीचे नहीं रहा है। अब आपकी धड़कनों की सारी जानकारी आपके फोन पास मिल जाएगी। जी हां, हृदय रोगियों के लिए एक अच्छी खबर है। हदय रोग के मरीजों की अनियमित दिल की धड़कन की निगरानी के लिए अब एक स्मार्टफोन एप आ गया है। इस एप का नाम 'एलाइवकोर हार्ट मॉनिटर स्मार्टफोन एप' है। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में इस एप की क्षमता का आकलन भी किया है।
न्यूयॉर्क के बुफैलो विश्ववद्यिालय के प्रोफेसर एनी क रटिस ने अपने अध्ययन रिपोर्ट में लिखा है कि यह एप हार्ट बीट की काफी बेहतर तरीके से निगरानी करने में सक्षम है।
मरीजों के लिए इस एप का प्रयोग करना काफी सरल है और ये उन्हें काफी पसंद भी आ रहा है।
वर्तमान में मरीजों को अपनी स्थिति की निगरानी के लिए इलेक्ट्रो कार्डियोग्राफिक इलेक्ट्रोड्स को अपनी त्वचा से चिपकाए रखना होता है, और यह करीब दो से चार हफ्ते के लिए करना होता है। इससे मरीजों को थोड़ी उलझन होती है।
करटिस ने बताया कि इस इवेंट मॉनिटर की सबसे बड़ी खामी यह है कि मरीज इसे सबके सामने नहीं प्रयोग कर सकता है और यह काफी तकलीफदेह भी है।
सन फ्रांसिस्को में हार्ट रिदम सोसायटी की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत इस नए अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि परंपरागत इवेंट मॉनिटरिंग प्रणाली के स्थान पर इस स्मार्ट फोन एप का प्रयोग बखूबी किया जा सकता है ।
शोधकर्ताओं ने दो सप्ताह तक करीब 32 हृदय रोग के मरीजों पर इस एप का प्रयोग किया और उनकी धड़कनों की जांच की।
अध्ययन में पता लगा कि एलाइवकोर हार्ट मॉनिटर स्मार्टफोन एप ने मरीजों की धड़कनों को 91 फीसदी तक सही रिकॉर्ड किया, जबकि परंपरागत इलेक्ट्रोड्स डिवाइस ने 87.5 फीसदी सही रिकॉर्ड किया।
(इनपुट्स आईएएनएस से)
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