- निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली को 2025 में सभी मामलों से बरी कर दिया गया था और जेल से छोड़ा गया था
- सुरेंद्र कोली को 2014 में फांसी की सजा सुनाई गई थी, लेकिन अदालत ने रातोंरात उसकी फांसी टाल दी थी
- सुरेंद्र कोली की फांसी टालने का फैसला वकील इंदिरा जय सिंह की अपील पर सुप्रीम कोर्ट के विशेष अदालत ने किया था
निठारी में कई बच्चों और महिलाओं की हत्या करने और उनके टुकड़ों को पकाकर खाने जैसे वीभत्म आरोपों से बरी हुए सुरेंद्र कोली ने आज फांसी लगाकर जान दे दी. उसे सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल ही आखिरी मामले में भी बरी कर दिया था और उसे जेल से छोड़ा गया था. इसके बाद वह दिल्ली के ही एक इलाके में कुछ दिन रहा था और फिर वह हरिद्वार में रहने लगा था. उसे इस कांड में 2014 में ही फांसी होने वाली थी, लेकिन रातोंरात मामला पलट गया था. तब फांसी के फंदे से बचे सुरेंद्र कोली ने आज खुद उसी तरीके से आत्महत्या कर ली. ऐसे में 2014 का सितंबर याद आने लगा है, जब उसे फांसी दी जानी थी और फैसला रातोंरात पलट गया था.
सुरेंद्र कोली ने सितंबर के महीने में ही फांसी लगाकर जान दे दी है. 2014 में भी सितंबर का ही महीना था, जब उसे फांसी होनी थी. रविवार 7 सितंबर को मेरठ की सेंट्रल जेल से निकली एक खबर मीडिया में छा जाती है कि निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली को सोमवार को फांसी दी जा रही है. एक दिन का ही वक्त बचा था और वह दिन रविवार था. अदालत बंद थी. ऐसे में कैसे अपील की जाए. अंत में नामी वकील इंदिरा जय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा से मिलने का वक्त मांगा था. चीफ जस्टिस वक्त देते हैं और फिर सीनियर जस्टिस एचएल दत्तू के घर पर विशेष अदालत लगती है.
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अदालत में रात एक बजे के करीब फैसला होता है कि एक सप्ताह का वक्त दिया जाए. इस तरह सुरेंद्र कोली की फांसी तब टल गई. फिर आगे मामला बढ़ता है तो वह सभी 13 मामलों में बरी ही हो जाता है. दरअसल इंदिरा जय सिंह की अदालत में दलील थी कि संविधान के अनुसार फांसी जैसी सजा पर आखिरी फैसले से पहले खुदी अदालत में सुनवाई का एक मौका मिलना चाहिए. भले ही रिव्यू पिटिशन खारिज हो चुकी हो. आरोपी को फांसी देने से पहले ओपन कोर्ट में एक बार उसके मामले की सुनवाई की जा सकती है. इसलिए सुरेंद्र कोहली को भी एक मौका दिया जाना चाहिए. इस तरह कोली को मौका मिला और वह बच गया.
रात एक बजे आया फैसला, फिर डीएम और एसपी को आया फोन
पर नियति देखिए कि जिस फांसी की सजा से उसे अदालत ने बचा दिया था, उस फंदे पर उसके खुद ही झूलने की खबर आई. वह भी सितंबर की ही बात है और इस बार भी सितंबर ही था. बता दें कि तब सुरेंद्र कोली की फांसी एक सप्ताह टालने का फैसला रातोंरात ही मेरठ के डीएम और एसपी को बताया गया था. फिर उनसे कहा गया था कि आपके पास जल्दी ही लिखित कॉपी पहुंच जाएगी. इस तरह सुबह ही प्रशासन तक फैसले की कॉपी पहुंची और सुरेंद्र कोली बच गया. अंत में उसे 2025 में सभी मामलों से बरी कर दिया गया. तब से वह गुमनाम जिंदगी जी रहा था, लेकिन आज अचानक ही उसकी आत्महत्या की खबर आई.
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