मौसम में जैसे ही बदलाव होता है हमारी थाली का स्वाद भी बदल जाता है. जैसे ही आसमान में काले बादल छाते हैं और मिट्टी की सोंधी खुशबू हवा में घुलती है, हमारा मन कुछ गरमा-गरम और चटपटा खाने के लिए करने लगता है. भारत में मानसून सिर्फ एक मौसम नहीं है, यह हमारे खाने का एक बड़ा हिस्सा है.
कश्मीर की बर्फीली वादियों के करीब रिमझिम फुहारें हों या कन्याकुमारी के समंदर किनारे तेज बौछारें, बारिश आते ही हर भारतीय किचन से खुशबूदार धुआं उठने लगता है. तो चलिए इस आर्टिकल में जानते हैं देश के अलग-अलग कोनों में क्या खाते हैं लोग.
मानसून में बदलाव होते ही भारत में कहां क्या खाया जाता-
उत्तर भारत की पसंद- (पकौड़े, अदरक वाली चाय और कश्मीरी कहवा)
उत्तर भारत में जैसे ही बारिश की बौछार होती है, घरों में कड़ाही चढ़ जाती है. दिल्ली, पंजाब, यूपी और बिहार में बारिश का मतलब है- प्याज, आलू और पनीर के गरमा-गरम पकौड़े और साथ में कड़क अदरक-इलायची वाली चाय.
थोड़ा और उत्तर में चलें, यानी खूबसूरत कश्मीर में, तो वहां की बारिश का अंदाज थोड़ा अलग होता है. वहां ठंडी हवाओं के बीच लोग कश्मीरी कहवा या नून चाय पीना पसंद करते हैं. इसके साथ वहां के लोकल बेकर्स से मिलने वाली खास रोटियां खाई जाती हैं, जो शरीर को अंदर से गर्माहट देती हैं.
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कैसे बनाएं कश्मीरी कहवा-
- सामग्री- पानी, कहवा लीव्स, हरी इलायची, दालचीनी, केसर के धागे, बादाम शहद.
- विधि- सबसे पहले पानी में इलायची, दालचीनी और केसर डालकर 3-4 मिनट तक उबालें. अब गैस बंद करें और इसमें कहवा की पत्तियां डालें. इसे 2 मिनट के लिए ढककर छोड़ दें. अब कप में कटे हुए बादाम और शहद डालें, ऊपर से चाय को छान लें. कहवा बनकर तैयार है.
2. पश्चिम भारत की पसंद- (वड़ा पाव और भुट्टा)
अगर आप मुंबई या गुजरात की तरफ हैं, तो बारिश के आते ही सड़कों पर आपको दो ही चीजें सबसे ज्यादा दिखेंगी पहला वड़ा पाव और दूसरा कोयले पर भुना हुआ भुट्टा.
मुंबई की तेज बारिश में लोकल ट्रेन से उतरकर, छाता संभाले हुए, हाथ में तीखी और सूखी लहसुन की चटनी के साथ गरम वड़ा पाव खाने का मजा ही कुछ और है. वहीं, गुजरात के लोग इस मौसम में दाल वड़ा और मेथी के भजिया पसंद करते हैं.
कैसे बनाएं मुंबई स्टाइल वड़ा पाव-
सामग्री- उबले आलू, राई, कड़ी पत्ता, अदरक-लहसुन का पेस्ट, हल्दी, बेसन, नमक, पाव, और सूखी लहसुन-नारियल की चटनी.
विधि- आलू को मैश करके राई, कड़ी पत्ता और अदरक-लहसुन के पेस्ट का तड़का लगाएं. इसके छोटे गोले बनाकर बेसन के बैटर में डुबोएं और गरम तेल में डीप फ्राई करें. पाव के बीच में तीखी लहसुन की चटनी लगाएं, वड़ा रखें और तली हुई हरी मिर्च के साथ मजे से खाएं.
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3. पूर्वी भारत की पसंद- (खिचुड़ी, इलिश माछ और लिट्टी चोखा)
पूर्व की ओर बढ़ें तो पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मानसून का एक अलग ही फूड कल्चर है. बंगाल में बारिश के दिन को खिचुड़ी का दिन (Khichuri Din) माना जाता है. यहां भूंज खिचड़ी (घी और सब्जियों से भरपूर चावल-दाल) के साथ बैंगन के पकौड़े और सबसे खास इलिश माछ भाजा खाया जाता है.
वहीं, बिहार और झारखंड में बारिश के सुहावने मौसम में गरमा-गरम लिट्टी चोखा कोयले पर सेंका जाता है. शुद्ध देसी घी में डूबी लिट्टी और बैंगन-आलू का चोखा मानसून के मजे को दोगुना कर देता है.
लिट्टी चोखा की रेसिपी के लिए यहां क्लिक करें.
4. दक्षिण भारत की पसंद- (रसम-चावल और गरम बज्जी)
देश के दक्षिणी हिस्से यानी केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक की तरफ मानसून की बारिश बहुत तेज और लंबी होती है. ऐसे में यहां के लोग ऐसा खाना पसंद करते हैं जो पेट के लिए हल्का हो और इम्यूनिटी भी बढ़ाए.
दक्षिण भारत में बारिश के दिनों में गरम-गरम रसम और चावल सबसे बड़ा कम्फर्ट फूड है. काली मिर्च, इमली और लहसुन से बना रसम गले को बहुत राहत देता है. इसके साथ शाम के वक्त 'बज्जी (बड़ी वाली हरी मिर्च या केले के पकौड़े) और फिल्टर कॉफी का कॉम्बिनेशन हर घर में मिल जाएगा.
कैसे बनाएं स्वादिष्ट रसम-
- सामग्री- इमली का पानी, टमाटर, राई, कड़ी पत्ता, काली मिर्च और लहसुन, हरा धनिया, नमक, घी.
- विधि- एक बर्तन में इमली का पानी, मैश किए टमाटर, नमक और हल्दी डालकर उबालें. इसमें कुचली हुई काली मिर्च और लहसुन डाल दें. जब यह अच्छे से उबल जाए, तो एक छोटे पैन में घी गरम करके राई, सूखी लाल मिर्च और कड़ी पत्ते का तड़का लगाएं. ऊपर से हरा धनिया डालकर गरम चावल के साथ सर्व करें.
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