अक्सर हमारे किचन के डिब्बों में पीले रंग की हल्दी आसानी से मिल जाती है, जिसका इस्तेमाल हम रोजमर्रा के खाने का स्वाद और रंग बढ़ाने के साथ-साथ चोट लगने पर दूध में मिलाकर पीने के लिए करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी काले रंग की हल्दी के बारे में सुना है? जी हां, हमारी रसोई में आम दिखने वाली हल्दी की तरह ही एक बेहद दुर्लभ और चमत्कारी किस्म होती है जिसे 'काली हल्दी' कहा जाता है.
बाहर से यह भले ही भूरी या काली सी दिखाई देती है, लेकिन अंदर से इसका रंग गाढ़ा नीला, गहरा हरा या फिर बैंगनी और काला होता है. देर किस बात की है क्या है काली हल्दी, इसकी तासीर कैसी होती है, इसे अपनी डाइट में कैसे शामिल करें? इन सभी सवालों के जवाब जान लेते हैं.
काली हल्दी क्या होती है?
बाहर से यह भले ही भूरी या काली सी दिखाई देती है, लेकिन अंदर से इसका रंग गाढ़ा नीला, गहरा हरा या फिर बैंगनी और काला होता है. यह सामान्य पीली हल्दी के मुकाबले काफी कड़वी होती है.
काली हल्दी की तासीर कैसी होती है?
काली हल्दी की तासीर बेहद गर्म मानी जाती है.
काली हल्दी के फायदे क्या हैं?
दर्द और सूजन से राहत:
अगर आपके जोड़ों में अक्सर दर्द रहता है या फिर शरीर के किसी हिस्से में अंदरूनी चोट की वजह से सूजन आ गई है, तो काली हल्दी किसी वरदान से कम नहीं है. इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मांसपेशियों के खिंचाव और अर्थराइटिस के दर्द को तेजी से कम करने में मदद करते हैं.
सर्दी-जुकाम और खांसी में असरदार:
इसकी तासीर बहुत गर्म होती है, इसलिए मौसम बदलने पर होने वाली सर्दी, छाती में जमा कफ और पुरानी खांसी को ठीक करने में यह बहुत बढ़िया काम करती है.
पाचन तंत्र को रखे दुरुस्त:
पेट से जुड़ी परेशानियां जैसे अपच, गैस या पेट दर्द में भी इसका सीमित इस्तेमाल काफी राहत देता है, जो लोग पेट से जुड़ी दिक्कतों से परेशान रहते हैं उनके लिए इसका सेवन फायदेमंद माना जा सकता है.
इम्यूनिटी बूस्टर:
इसमें नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं ताकि शरीर मौसमी बीमारियों से आसानी से लड़ सके.
त्वचा की देखभाल:
पारंपरिक रूप से इसका लेप स्किन पर लगाने से मुंहासों के दाग और फंगस से जुड़ी कई समस्याओं में फायदा मिलता है.
इसे अपनी डाइट और दिनचर्या में कैसे शामिल करें?
- काली हल्दी बहुत ही स्ट्रॉन्ग और कड़वी होती है, इसलिए इसे सामान्य हल्दी की तरह खुलकर रोजाना की दाल या सब्जी में नहीं डाला जा सकता है.
- अगर आपको सर्दी-जुकाम या जोड़ों का तेज दर्द परेशान कर रहा है, तो बिल्कुल चुटकी भर यानी बहुत कम मात्रा में काली हल्दी का पाउडर गुनगुने दूध में मिलाकर रात को पी सकते हैं.
- आप चाहें, तो इसे बहुत कम मात्रा में अदरक और तुलसी वाले काढ़े में भी मिलाकर पी सकते हैं.
- दर्द वाली जगह या सूजन पर इसका इस्तेमाल करने के लिए, थोड़ी सी काली हल्दी को पीसकर गुनगुना कर लें और प्रभावित हिस्से पर लेप की तरह लगा लें, इससे दर्द में तुरंत आराम मिलता है.
- खांसी बहुत ज्यादा परेशान कर रही है, तो जरा सी काली हल्दी को एक चम्मच शहद में मिलाकर चाटने से गले को बहुत राहत मिलती है.
काली हल्दी की चाय कैसे बनाएं?
- पैन में पानी उबालें और उसमें अदरक, काली मिर्च और तुलसी के पत्ते डालें.
- अब इसमें एक चुटकी काली हल्दी मिलाएं.
- ध्यान रखें, काली हल्दी की मात्रा कम रखें क्योंकि यह कड़वी और बहुत गर्म होती है.
- धीमी आंच पर 5 से 7 मिनट तक उबालें जब तक चाय आधी न रह जाए.
- कप में छान लें और हल्का ठंडा होने पर स्वादानुसार शहद या गुड़ मिला लें.
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