न्यूयॉर्क:
इन दिनों बाजार में रोज़ नए स्मार्टफोन सेटों को देखकर हर किसी के मन में उन्हें खरीदने की उत्सुकता जन्म लेती है। लेकिन किशोरों में यही उत्सुकता लत में तब्दील होकर उन्हें अवसादग्रस्त बना सकती है। एक नए शोध में यह पता चला है। अभी तक हालांकि लोगों में इन तकनीकों के उपयोग से मस्तिष्क संबंधी विकारों का कोई संबंध नहीं पाया गया, साथ ही बोरियत से बचने के लिए बीच-बीच में सेल फोन या इंटरनेट के उपयोग करने से कोई परेशानी के संकेत भी नहीं मिले हैं। लेकिन इन तकनीकों का निरंतर प्रयोग कई विकारों की संभावना बढ़ा सकता है।
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनियोस से इस अध्ययन के मुख्य लेखक एलिजैंड्रो लेरास ने बताया, "समाज में नई तकनीकों को लेकर भय का एक लंबा इतिहास रहा है।"
उन्होंने कहा, नई तकनीकों के प्रति इस भय में टी.वी, वीडियो गेम और हाल ही में स्मार्टफोन जुड़ा है।
इस शोध में 300 कॉलेज छात्रों को शामिल किया गया था, जिनसे प्रश्नों के माध्यम से मोबाइल, इंटरनेट आदि के इस्तेमाल संबंधित सवाल पूछे गए थे।
वैज्ञानिकों का लक्ष्य मोबाइल और इंटरनेट के व्यवहारों से मानसिक स्वास्थ्य के साथ परस्पर संबंधों की खोज करना था।
निष्कर्षों में पता चला कि जिन लोगों में मोबाइल और इंटरनेट की अधिक लत थी। उनमें अवसाद और चिंता की अधिक लक्षण पाए गए।
लेरास कहते हैं, "इन तकनीकों का लक्ष्य आपको अवसादग्रस्त करना नहीं है, बल्कि उदासी के वक्त इन नई तकनीकों से राहत पहुंचाना है।"
पत्रिका 'कंप्यूटर्स इन ह्यूमन बेहिवियर' में यह शोध प्रकाशित हुआ है।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनियोस से इस अध्ययन के मुख्य लेखक एलिजैंड्रो लेरास ने बताया, "समाज में नई तकनीकों को लेकर भय का एक लंबा इतिहास रहा है।"
उन्होंने कहा, नई तकनीकों के प्रति इस भय में टी.वी, वीडियो गेम और हाल ही में स्मार्टफोन जुड़ा है।
इस शोध में 300 कॉलेज छात्रों को शामिल किया गया था, जिनसे प्रश्नों के माध्यम से मोबाइल, इंटरनेट आदि के इस्तेमाल संबंधित सवाल पूछे गए थे।
वैज्ञानिकों का लक्ष्य मोबाइल और इंटरनेट के व्यवहारों से मानसिक स्वास्थ्य के साथ परस्पर संबंधों की खोज करना था।
निष्कर्षों में पता चला कि जिन लोगों में मोबाइल और इंटरनेट की अधिक लत थी। उनमें अवसाद और चिंता की अधिक लक्षण पाए गए।
लेरास कहते हैं, "इन तकनीकों का लक्ष्य आपको अवसादग्रस्त करना नहीं है, बल्कि उदासी के वक्त इन नई तकनीकों से राहत पहुंचाना है।"
पत्रिका 'कंप्यूटर्स इन ह्यूमन बेहिवियर' में यह शोध प्रकाशित हुआ है।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)
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