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सस्ते लैपटॉप और मोबाइल बाजार से हो सकते हैं गायब, जो बचेंगे वो भी होंगे महंगे, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान

रिपोर्ट के अनुसार, मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतों के कारण 2026 के अंत तक कंप्यूटर की कीमतें 17% और स्मार्टफोन 13% तक महंगे हो सकते हैं.जानिए बजट सेगमेंट पर इसका क्या असर पड़ेगा...

सस्ते लैपटॉप और मोबाइल बाजार से हो सकते हैं गायब, जो बचेंगे वो भी होंगे महंगे, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान
AI की बढ़ती मांग से क्यों महंगे हो रहे हैं मोबाइल और लैपटॉप? जानिए आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर
  • AI की बढ़ती मांग के कारण मेमोरी चिप्स, RAM और स्टोरेज की कीमतों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है.
  • रिपोर्ट के अनुसार 2026 के अंत तक कंप्यूटर और स्मार्टफोन की कीमतों में क्रमशः 17%और 13% तक वृद्धि संभव है.
  • बजट सेगमेंट के लैपटॉप -मोबाइल की संख्या घट सकती है, 500 डॉलर से कम कीमत वाले पीसी 2028 तक समाप्त हो सकते हैं.

अगर आप नया मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर खरीदने की सोच रहे हैं, तो आने वाले समय में आपको इसके लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं. इसकी वजह कुछ और नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल है. AI डेटा सेंटरों की बढ़ती जरूरत के कारण मेमोरी चिप्स, RAM और स्टोरेज की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. इससे इन कंपोनेंट्स की कीमतों में तेज उछाल आया है. इसका असर अब आम ग्राहकों तक पहुंच रहा है और मोबाइल, लैपटॉप समेत कई इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स महंगे होने की आशंका बढ़ गई है.

AI की वजह से RAM और स्टोरेज इतने महंगे क्यों हो रहे हैं?

RAM और स्टोरेज की कीमतों में तेजी का सबसे बड़ा कारण AI कंपनियों की बढ़ती मांग है. AI मॉडल को चलाने के लिए बड़े डेटा सेंटरों को भारी मात्रा में DRAM और SSD स्टोरेज की जरूरत पड़ रही है.

गार्टनर (Gartner) के मुताबिक, DRAM और SSD की कीमतें इस साल के अंत तक सालाना आधार पर 130% तक बढ़ सकती हैं. इसका सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की लागत पर पड़ रहा है.

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मोबाइल और लैपटॉप कितने महंगे हो सकते हैं?

गार्टनर की फरवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मेमोरी की बढ़ती कीमतों के चलते 2026 के अंत तक कंप्यूटर और पीसी की कीमतें करीब 17% तक बढ़ सकती हैं. वहीं स्मार्टफोन की कीमतों में 13% तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. यानी आज जो डिवाइस आपको एक कीमत पर मिल रहा है, आने वाले समय में उसके लिए ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है.

क्या बाजार से गायब हो जाएंगे सस्ते लैपटॉप और मोबाइल?

बढ़ती लागत का असर सबसे ज्यादा बजट सेगमेंट पर पड़ सकता है.गार्टनर का कहना है कि कम मुनाफे वाले एंट्री-लेवल डिवाइस बनाना कंपनियों के लिए मुश्किल होता जाएगा. इसी वजह से कई कंपनियां सस्ते मॉडल्स की संख्या कम कर सकती हैं.

गार्टनर के सीनियर डायरेक्टर एनालिस्ट रंजीत अटवाल का अनुमान है कि 500 डॉलर (करीब ₹42,000) से कम कीमत वाले एंट्री-लेवल पीसी सेगमेंट 2028 तक पूरी तरह खत्म हो सकते हैं.

लोग पुराने डिवाइस ज्यादा समय तक  करेंगे इस्तेमाल

जब नए मोबाइल और लैपटॉप महंगे होंगे तो ग्राहक अपने पुराने डिवाइस को ज्यादा समय तक इस्तेमाल करना पसंद करेंगे.गार्टनर का अनुमान है कि 2025 की तुलना में 2026 में ग्लोबल पीसी शिपमेंट 10.4% और स्मार्टफोन शिपमेंट 8.4% तक घट सकती है.रंजीत अटवाल के अनुसार, यह स्थिति पिछले एक दशक में सबसे कमजोर शिपमेंट स्तरों में से एक हो सकती है.

कंपनियां RAM और स्टोरेज में भी कर रही हैं बदलाव

बढ़ती लागत से निपटने के लिए कई स्मार्टफोन और नोटबुक निर्माता अपने आने वाले मॉडल्स में RAM और स्टोरेज कॉन्फिगरेशन को बदल रहे हैं.TrendForce की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कंपनियां कम क्षमता वाले मॉडल्स की शिपमेंट घटा रही हैं, जबकि कई कंपनियां ज्यादा स्टोरेज वाले वेरिएंट्स को ऑप्शनल अपग्रेड के रूप में पेश कर रही हैं.

iPhone और Huawei ने बढ़ाई स्टोरेज क्षमता

iPhone 17 सीरीज में बेस स्टोरेज को 128GB से बढ़ाकर 256GB कर दिया गया है ताकि AI एप्लिकेशन और यूजर डेटा के लिए पर्याप्त जगह मिल सके.वहीं Huawei Mate 80 सीरीज में भी 512GB स्टोरेज वेरिएंट्स को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे ऑफलाइन मल्टीमॉडल AI फीचर्स को सपोर्ट किया जा सके.

TrendForce का मानना है कि AI इकोसिस्टम के विस्तार के साथ 2026 के अंत तक मेनस्ट्रीम के Android स्मार्टफोन में 128GB स्टोरेज धीरे-धीरे गायब हो सकती है. इसके जगह पर 256GB स्टोरेज नया स्टैंडर्ड बन सकता है.

केवल RAM नहीं, पुराने मेमोरी चिप्स भी हो रहे हैं महंगे

कीमतों का दबाव सिर्फ DDR5 RAM तक सीमित नहीं है. DDR4 और DDR3 जैसे पुराने मेमोरी स्टैंडर्ड्स की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है. ये चिप्स भले ही एडवांस AI सिस्टम के लिए पर्याप्त न हों, लेकिन कई सामान्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में अब भी इस्तेमाल किए जाते हैं.

सबसे ज्यादा दबाव किन लैपटॉप्स पर?

TrendForce के अनुसार, हाई-एंड अल्ट्राथिन लैपटॉप्स पर सबसे ज्यादा कीमत का दबाव पड़ सकता है. इन डिवाइसों में मोबाइल DRAM सीधे मदरबोर्ड पर लगी होती है. ऐसे में कंपनियों के लिए स्पेसिफिकेशन घटाकर लागत कम करना आसान नहीं होता. इसी कारण इस कैयेगरी में कीमतों में बढ़ोतरी जल्दी दिखाई दे सकती है.

AI PC का विस्तार भी हो सकता है धीमा

मेमोरी की बढ़ती कीमतों का असर AI PC बाजार पर भी पड़ सकता है.गार्टनर के मुताबिक, पीसी निर्माण लागत में मेमोरी की हिस्सेदारी पिछले साल के 16% से बढ़कर इस साल 23% तक पहुंच सकती है. इसके चलते AI PC की कीमतें बढ़ेंगी और बाजार में उनकी 50% हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य अब 2028 तक खिसक सकता है.

सिर्फ मोबाइल-लैपटॉप नहीं, इन चीजों पर भी पड़ सकता है असर

मेमोरी और चिप्स की बढ़ती कीमतों का असर केवल स्मार्टफोन और कंप्यूटर तक सीमित नहीं रहेगा.ऑटोमोबाइल, मेडिकल डिवाइस और कई अन्य मैन्युफैक्चर्ड उत्पादों की लागत भी बढ़ सकती है, क्योंकि इनमें भी बड़ी मात्रा में सेमीकंडक्टर और मेमोरी चिप्स का इस्तेमाल होता है.

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लेखक के बारे में
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अनिशा कुमारी
सबएडिटर
मैं करीब 4 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. वर्तमान में एनडीटीवी में सबएडिटर के रूप में कार्यरत हूं. मैंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, ट्र... और पढ़ें
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