क्या आपका बच्चा भी शाम होते ही चिप्स, कुरकुरे या बिस्कुट मांगने लगता है? अगर हां, तो उसकी स्नैक प्लेट में मखाना शामिल करना एक हेल्दी विकल्प हो सकता है. कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर से भरपूर मखाना बच्चों की हड्डियों, पाचन और समग्र विकास में मदद कर सकता है.
आजकल हर घर में माता पिता की सबसे बड़ी चिंता यही रहती है कि बच्चे दिनभर पैकेट वाला जंक फूड, चिप्स और चॉकलेट मांगते रहते हैं. बच्चे हरी सब्जियां और रोटी खाने में तो सौ नखरे दिखाते हैं, लेकिन जैसे ही कुरकुरे या बिस्कुट की बात आती है, तुरंत खुश हो जाते हैं. बाजार के इन पैकेट वाले स्नैक्स में सोडियम और केमिकल्स इतने ज्यादा होते हैं कि वे बच्चे की सेहत और पेट दोनों को खराब कर देते हैं. ऐसे में हर मां यही सोचती है कि शाम की छोटी भूख के लिए ऐसा क्या दिया जाए जो कुरकुरा भी हो, स्वादिष्ट भी लगे और शरीर को भरपूर ताकत भी दे.
इसका सबसे आसान और देसी जवाब हमारी अपनी रसोई में मौजूद है, और वो है मखाना यानी फॉक्स नट्स. बड़े बुजुर्ग तो इसे व्रत या पूजा पाठ में खूब खाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बढ़ते बच्चों के लिए मखाना किसी सुपरफूड से कम नहीं है. आइए जानते हैं कि रोज मखाना खिलाने से बच्चों को क्या क्या फायदे मिलते हैं और इसे बच्चों की डाइट में कैसे शामिल किया जाए.
मखाने में छुपे हैं अनगिनत पोषक तत्व
मखाना सिर्फ एक सूखा मेवा नहीं है, बल्कि यह पौष्टिकता का पूरा खजाना है.
- इसमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है जो बच्चों की हड्डियों और दांतों के विकास के लिए बहुत जरूरी है.
- इसमें अच्छी क्वालिटी का प्रोटीन पाया जाता है, जिससे बच्चों की मांसपेशियों का विकास तेजी से होता है.
- मखाने में मैग्नीशियम, पोटेशियम और फास्फोरस जैसे मिनरल्स मौजूद होते हैं.
- यह फाइबर से भरपूर होता है, जिससे पेट का हाजमा दुरुस्त रहता है.
सबसे अच्छी बात यह है कि मखाना ग्लूटेन फ्री होता है और इसमें कैलोरी बहुत कम होती है, जिससे बच्चों में बेवजह का मोटापा नहीं बढ़ता.
हड्डियां और दांत बनेंगे फौलादी : बचपन में बच्चों का शरीर बहुत तेजी से बढ़ता है. इस उम्र में अगर शरीर को सही मात्रा में कैल्शियम न मिले, तो आगे चलकर हड्डियां कमजोर होने का डर रहता है.
अक्सर बच्चे दूध पीने में आनाकानी करते हैं. अगर आपका बच्चा भी सादा दूध पीने से मना करता है, तो उसे रोस्टेड मखाना खाने को दें. मखाने में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम बच्चों की हड्डियों को अंदर से मजबूत बनाते हैं. साथ ही दूध के नए दांत निकलने के दौरान मखाना चबाने से मसूड़े भी मजबूत होते हैं.
कब्ज और पेट की परेशानी से राहत : आजकल बाहर का तला भुना और मैदा खाने की वजह से छोटे छोटे बच्चों में कब्ज की समस्या आम हो गई है. पेट साफ न होने से बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं और उन्हें भूख भी नहीं लगती.
मखाने में फाइबर की मात्रा काफी अच्छी होती है, जो आंतों को साफ रखने में मदद करती है.
यह बहुत हल्का होता है और आसानी से पच जाता है.
जिन बच्चों का पाचन कमजोर होता है या अक्सर दस्त उल्टी की शिकायत रहती है, उनके लिए मखाना एक बहुत सुरक्षित आहार माना जाता है.
दिमाग तेज करने और ध्यान बढ़ाने में मददगार : स्कूल जाने वाले बच्चों को पढ़ाई और खेलकूद में बहुत ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है. मखाने में कई ऐसे एंटीऑक्सीडेंट और अमीनो एसिड होते हैं जो दिमाग के नर्वस सिस्टम को शांत रखते हैं और एकाग्रता बढ़ाते हैं.
शाम को ट्यूशन या होमवर्क करने से पहले अगर बच्चों को चिप्स की जगह घी में भुने हुए मखाने दिए जाएं, तो इससे उन्हें लंबे समय तक भूख नहीं लगती और शरीर में चुस्ती बनी रहती है. यह बच्चों के मूड को भी ठीक रखता है और थकान को दूर भगाता है.
वजन को संतुलित रखने में असरदार : आजकल मोबाइल और टीवी स्क्रीन के सामने बैठे रहने से बच्चों में फिजिकल एक्टिविटी बहुत कम हो गई है. ऊपर से जंक फूड खाने की आदत से कम उम्र में ही वजन बढ़ने लगता है.
मखाना एक ऐसा स्नैक है जो बच्चे का पेट तो भर देता है लेकिन शरीर में फालतू चर्बी जमा नहीं होने देता. जब बच्चे को भूख लगे, तो उसे अनहेल्दी फ्राइज देने के बजाय मखाना खाने की आदत डालें. इससे बच्चे का वजन एकदम कंट्रोल में रहेगा.
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बच्चों को मखाना खिलाने के आसान और टेस्टी तरीके
बच्चे किसी भी चीज को तब तक खुशी से नहीं खाते जब तक उसका स्वाद मजेदार न हो. आप इन आसान तरीकों से मखाना उनके टिफिन या नाश्ते में शामिल कर सकते हैं.
देसी घी वाला रोस्टेड मखाना: एक पैन में एक चम्मच गाय का देसी घी गरम करें. उसमें मखाने डालकर धीमी आंच पर कुरकुरा होने तक भूनें. ऊपर से हल्का सा सेंधा नमक और चाट मसाला छिड़क दें. यह बाजार के चिप्स से कहीं ज्यादा कुरकुरा और स्वादिष्ट लगता है.
मखाना खीर: अगर बच्चा मीठा पसंद करता है, तो मखानों को हल्का कूट लें और गाढ़े दूध में धीमी आंच पर पकाएं. इसमें चीनी की जगह गुड़ का पाउडर या खजूर का पेस्ट मिलाएं. यह खीर बच्चों को बहुत पसंद आती है और वजन बढ़ाने में भी मदद करती है.
छोटे बच्चों के लिए मखाना पाउडर: अगर आपका बच्चा अभी साल डेढ़ साल का है और साबुत मखाना नहीं चबा सकता, तो मखानों को सूखा भूनकर मिक्सी में बारीक पाउडर बना लें. इस पाउडर को बच्चे के दूध, सूजी के हलवे या दलिया में एक दो चम्मच मिलाकर खिलाएं.
इन बातों का रखें खास खयाल
मखाना बहुत फायदेमंद है, लेकिन किसी भी चीज का ज्यादा इस्तेमाल नुकसान कर सकता है.
- शुरुआत में बच्चों को थोड़ी मात्रा से ही मखाना देना शुरू करें ताकि यह समझ आ सके कि बच्चे को इससे कोई एलर्जी तो नहीं है.
- छोटे बच्चों को हमेशा साबुत मखाना हाथ में देने से बचें, क्योंकि गले में अटकने का डर रहता है. हमेशा दो टुकड़ों में काटकर या पाउडर बनाकर ही दें.
- बाजार में मिलने वाले फ्लेवर्ड और पैकेट वाले मखानों में बहुत ज्यादा नमक और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं, इसलिए हमेशा सादा मखाना लाकर घर पर ही भूनकर तैयार करें.
अगर आप अपने बच्चे को चिप्स और अनहेल्दी खान पान की लत से बचाना चाहते हैं, तो आज से ही उसके स्नैक्स बॉक्स में मखाने को जगह दें. यह छोटी सी आदत आपके बच्चे के बेहतर विकास और अच्छी सेहत की मजबूत नींव बनेगी.
कैसे बनता है मखाना,
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