संयुक्त राष्ट्र में भाषण देती भारतीय विदेशमंत्री सुषमा स्वराज
न्यूयॉर्क:
- दुनिया में ऐसे देश हैं जो बोते भी हैं, तो आतंकवाद, उगाते भी हैं तो आतंकवाद, बेचते हैं तो भी आतंकवाद और निर्यात भी करते हैं तो आतंकवाद का. आतंकवादियों को पालना उनका शौक बन गया है.
- हमें उन देशों को भी चिन्हित करना चाहिए जहां संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी सरेआम जलसे कर रहे हैं, प्रदर्शन निकालते हैं, जहर उगलते हैं और उन पर कोई कार्रवाही नहीं होती.
- आतंकवादियों के साथ वे देश भी दोषी हैं जो उन्हें ऐसा पनाह देते हैं. ऐसे देशों की विश्व समुदाय में कोई जगह नहीं होनी चाहिए.
- जिनके अपने घर शीशे के बने हों, उन्हें दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए.
- 21 तारीख को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इसी मंच से मेरे देश में मानवाधिकार उल्लंघन के निराधार आरोप लगाए थे. मैं केवल यह कहना चाहूंगी कि दूसरों पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाने वाले जरा अपने घर में झांककर देख लें कि बलूचिस्तान में क्या हो रहा है और वे खुद वहां क्या कर रहे हैं. बलूचियों पर होने वाले अत्याचार तो यातना की पराकाष्ठा हैं.
- दूसरी बात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कही कि बातचीत के लिए जो शर्त भारत लगा रहा है, वो हमें मंजूर नहीं है. कौन सी शर्तें? क्या हमने कोई शर्त खकर न्यौता दिया था शपथ ग्रहण समारोह में आने का?
- जब मैं इस्लामाबाद गई थी, हर्ट ऑफ एशिया कांफ्रेंस के लिए, तो क्या हमने कोई शर्त रखकर समग्र वार्ता शुरू की थी?
- हमने मित्रता का पैमाना खड़ा किया और हमें पठानकोट व उरी मिले.
- हमारे पास बहादुर अली जिंदा सबूत है कि वो सीमा पार से आया है.
- पाक का मंसूबा कभी पूरा नहीं होगा. ख्वाब देखना छोड़ दे पाकिस्तान, जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा.
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