रक्षा बंधन भाई-बहन के रिश्ते और प्रेम का त्योहार है. इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. धार्मिक मान्यताओं में राखी बांधने के लिए शुभ समय का खास महत्व बताया गया है. यही वजह है कि भद्रा काल में राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है. आखिर भद्रा कौन हैं और इस दौरान राखी क्यों नहीं बांधी जाती है. आइए, आचार्य मदनमोहन से जानते हैं.
कौन हैं भद्रा
आचार्य मदनमोहन ने बताया कि हिंदू पंचांग में भद्रा एक करण है, जिसे आमतौर पर शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार भद्रा सूर्य देव और छाया की पुत्री तथा शनिदेव की बहन हैं. उनका स्वभाव उग्र बताया गया है. ऐसी मान्यता है कि उनके काररण शुभ कामों में बाधाएं आ सकती हैं.
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पंचांग में कैसे मिला स्थान
धार्मिक कथा के अनुसार, भद्रा के उग्र स्वभाव को देखते हुए ब्रह्मा जी ने उन्हें पंचांग के विष्टि करण में स्थान दिया. ज्योतिषीय मान्यताओं में भद्रा के अलग-अलग लोकों में निवास की बात कही गई है. पृथ्वी पर भद्रा का वास होने के समय शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है.
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भद्रा में राखी क्यों नहीं बांधते
आचार्य मदनमोहन ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं में भद्रा काल को उग्र समय मााना गया है. इसलिए इस दौरान विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के साथ राखी बांधने से भी बचाा जाता है. पौराणिक कथाओं में रावण की बहन शूर्पणखा द्वारा भद्रा में राखी बांधने और बाद में रावण के विनाश की कथा भी प्रचलित है.
2026 में भद्रा की क्या स्थिति रहेगी
आचार्य मदनमोहन के अनुसार, 28 अगस्त 2026 को रक्षा बंधन के दिन भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जााएगी. ऐसे में भद्रा की अड़चन के बिना पूरे दिन राखी का त्योहार मनाया जा सकेगा.
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