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498 साल बाद बदलेगी राम मंदिर की परंपरा, पहली बार सावन शुक्ल तृतीया से झूले पर विराजेंगे रामलला

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में इस वर्ष सावन झूलनोत्सव नई परंपरा के साथ मनाया जाएगा. करीब 498 साल बाद रामलला पहली बार नाग पंचमी के बजाय सावन शुक्ल तृतीया से झूले पर विराजेंगे.

498 साल बाद बदलेगी राम मंदिर की परंपरा, पहली बार सावन शुक्ल तृतीया से झूले पर विराजेंगे रामलला
पहली बार सावन शुक्ल तृतीया से झूले पर विराजेंगे रामलला
(Photo Credit: NDTV)

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में इस बार सावन का झूलनोत्सव बेहद खास होने जा रहा है. करीब 498 साल बाद रामलला की झूला परंपरा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. पहली बार रामलला सावन शुक्ल तृतीया से झूले पर विराजेंगे. इससे पहले झूलनोत्सव की शुरुआत नाग पंचमी से होती थी. नई व्यवस्था के तहत इस धार्मिक उत्सव को पहले से ज्यादा भव्य और व्यवस्थित तरीके से मनाने की तैयारी है.

15 अगस्त से शुरू होगा झूलनोत्सव

राम मंदिर में झूलनोत्सव की शुरुआत 15 अगस्त की शाम 7 बजे से होगी. यह उत्सव लगातार 12 दिनों तक चलेगा. इस दौरान रामलला को विशेष रूप से सजाए गए झूले पर विराजमान कराया जाएगा. मंदिर में होने वाले इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है.

इस बार की एक और खास बात यह है कि पहली बार रामलला के झूलनोत्सव का लाइव प्रसारण करने की तैयारी की जा रही है. इससे अयोध्या नहीं पहुंच पाने वाले देश-विदेश के श्रद्धालु भी इस पावन आयोजन के दर्शन कर सकेंगे.

सावन में बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

सावन के महीने में रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. पिछले तीन दिनों में करीब 3 लाख श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर चुके हैं.

7 अगस्त को करीब 91 हजार, 8 अगस्त को लगभग 1.15 लाख और 9 अगस्त की शाम 7 बजे तक करीब 97 हजार श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सावन में अयोध्या आने वाले भक्तों की संख्या कितनी तेजी से बढ़ रही है.

मंदिर की पूजा व्यवस्था भी हो रही व्यवस्थित

राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए आचार्य इंद्रदेव मिश्र को धार्मिक अनुष्ठानों का व्यवस्थापक बनाया गया है. धार्मिक समिति ने मंदिर परिसर में मौजूद सभी 18 मंदिरों की पूजा व्यवस्था का भी निरीक्षण किया.

समिति ने पुजारियों की संख्या, रोज होने वाले पूजा-पाठ और धार्मिक परंपराओं के सही तरीके से पालन की जानकारी ली. इसका उद्देश्य मंदिर की पूजा व्यवस्था को तय धार्मिक परंपराओं के अनुसार सुचारू रखना है. भक्तों के लिए यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि रामलला की भव्य और पारंपरिक आराधना के नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है. 

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