जब देश की रक्षा और कठिन इलाकों में रास्ते बनाने की बात आती है, तो हमारी सेना की बेटियां हर मोर्चे पर आगे नजर आती हैं. उत्तर कश्मीर में इन दिनों एक ऐसा ही नाम बहुत चर्चा में है. कर्नल शिखा भदौरिया (Colonel Shikha Bhadauria). उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से आने वाली कर्नल शिखा ने अपनी काबिलियत के दम पर भारतीय सेना में एक नया इतिहास रचा है. उन्हें सीमा सड़क संगठन (BRO) के प्रोजेक्ट बीकॉन के तहत एक बेहद अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है. आइए जानते हैं कि कर्नल शिखा भदौरिया कौन हैं और उन्हें कश्मीर में क्या खास काम संभाला है.
कर्नल शिखा भदौरिया कौन हैं
कर्नल शिखा भदौरिया आगरा की बाह तहसील के पुरा बाघराज (कैंजरा) गांव की रहने वाली हैं. उनकी फैमिली में देश सेवा की एक लंबी और गौरवशाली परंपरा रही है. उनके पिता विजय प्रताप सिंह भदौरिया हैं. उनके पति कर्नल ऋषभ सिंह और उनके चाचा कर्नल गजेन्द्र सिंह भदौरिया भी भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहे हैं. बाह क्षेत्र की पहली महिला कर्नल बनने वाली शिखा आज न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे आगरा और देश की बेटियों के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं.
कर्नल शिखा सिंह भदौरिया ने कहां से पढ़ाई की है
कर्नल शिखा भदौरिया की सफलता की कहानी सिर्फ सेना तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका पूरा एकेडमिक और पर्सनल रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है. उन्होंने देश के जाने-माने संस्थान IIT रुड़की से एमटेक की डिग्री हासिल की है. सैन्य अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल (Gold Medal) अपने नाम किया था. साल 2018 में उन्हें भारतीय सेना में बेहतरीन काम के लिए 'वुमन ऑफिसर ऑफ द ईयर' के सम्मान से नवाजा गया था. पढ़ाई और सैन्य कौशल के अलावा वह नेशनल लेवल की शूटर भी रह चुकी हैं.
कर्नल शिखा को कौन सी बड़ी जिम्मेदारी दी गई है
कर्नल शिखा भदौरिया को उत्तर कश्मीर में 32 बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स (32 BRTF) की कमान दी गई है. उन्होंने 30 अप्रैल 2026 को 32 BRTF की कमान संभाली. उन्हें यह जिम्मेदारी ऐसे इलाके में मिली है जहां सड़क बनाना या उसे खुला रखना सामान्य काम नहीं है. उत्तर कश्मीर के कई हिस्से बेहद ऊंचे और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में आते हैं. यहां मौसम तेजी से बदल सकता है और भारी बर्फबारी, बारिश या दूसरी प्राकृतिक चुनौतियों के कारण सड़क संपर्क प्रभावित हो सकता है. ऐसे में उनकी टीम का काम जरूरी रास्तों को ज्यादा से ज्यादा समय तक चालू रखना है.
कश्मीर में आखिर क्या काम करेंगी कर्नल शिखा?
उनकी भूमिका में सामरिक रूप से जरूरी सड़क संपर्क बनाए रखना सबसे अहम कामों में से एक है. इन सड़कों का इस्तेमाल सेना की आवाजाही और जरूरी सामान की सप्लाई के लिए किया जाता है. इसलिए किसी सड़क का लंबे समय तक बंद रहना सैन्य गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है. इसके अलावा इन सड़कों का महत्व आम लोगों के लिए भी है. पहाड़ी इलाकों में सड़क ही कई गांवों को बाजार, अस्पताल और दूसरी जरूरी सुविधाओं से जोड़ने का मुख्य साधन होती है.
अमरनाथ यात्रा में भी अहम जिम्मेदारी
कर्नल शिखा भदौरिया की जिम्मेदारी का एक बड़ा हिस्सा अमरनाथ यात्रा से भी जुड़ा है. हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा के लिए कश्मीर पहुंचते हैं. ऐसे में यात्रा के दौरान सड़क संपर्क और ट्रैफिक व्यवस्था को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. उत्तर कश्मीर में तैनात 32 BRTF को इसी व्यवस्था में अहम भूमिका निभानी होती है.
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