सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. इस पूरे महीने में महादेव की पूजा, जलाभिषेक और शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का विशेष महत्व बताया गया है. सावन में आने वाली शिवरात्रि का महत्व भी बहुत अधिक होता है. इस दिन शिव भक्त व्रत रखते हैं और रात में जागकर भगवान शिव की पूजा करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन शिवरात्रि पर श्रद्धा से की गई पूजा से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों को हर मनोकामनाएं पूरी होने का आशीर्वाद देते है. हालांकि, इस बार शिवरात्रि की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में आइए जानते हैं शिवरात्रि कब है, साथ ही जानेंगे चार प्रहर पूजा का समय और पूजा विधि-
11 या 12 अगस्त, कब मनाई जाएगी शिवरात्रि?
पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त 2026 को सुबह 4 बजकर 53 मिनट पर शुरू होगी और 12 अगस्त को देर रात 1 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी. चूंकि शिवरात्रि में रात के समय चतुर्दशी तिथि का होना विशेष माना जाता है, इसलिए इस बार सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी. इसी दिन व्रत रखना और रात में भगवान शिव की पूजा करना शुभ रहेगा.
चार प्रहर में होगी शिव पूजासावन शिवरात्रि की रात भगवान शिव की पूजा चार प्रहर में करने की परंपरा है. चारों प्रहर का समय इस प्रकार रहेगा-
- पहला प्रहर: शाम 7:04 बजे से रात 9:45 बजे तक
- दूसरा प्रहर: रात 9:45 बजे से 12:26 बजे तक
- तीसरा प्रहर: रात 12:26 बजे से सुबह 3:07 बजे तक
- चौथा प्रहर: सुबह 3:07 बजे से 5:49 बजे तक
- 11 अगस्त को शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:23 बजे से 6 बजे तक रहेगा.
- अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:06 बजे से 12:58 बजे तक रहेगा.
- शाम के समय गोधूलि मुहूर्त रात 9:13 बजे से 9:32 बजे तक रहेगा.
इस दिन शाम 6:51 बजे तक सिद्धि योग रहेगा, इसके बाद व्यतिपात योग शुरू होगा. अभिजीत मुहूर्त को दिन का शुभ समय माना जाता है.
सावन शिवरात्रि पर ऐसे करें पूजा- शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.
- इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें.
- पूजा की जगह को गंगाजल से शुद्ध करें.
- शिवलिंग पर पहले जल और गंगाजल चढ़ाएं.
- इसके बाद दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें.
- अंत में साफ जल अर्पित करें.
- भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल, चंदन, अक्षत और सफेद पुष्प चढ़ाएं.
- इसके बाद फल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित करें.
- 'ॐ नमः शिवाय' और महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें.
- शिव चालीसा का पाठ करें.
- भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें.
पूजा के अंत में महादेव से परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें. अगले दिन उचित विधि से व्रत का पारण करके शिवरात्रि व्रत पूरा करें.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
यह भी पढ़ें- Pradosh Vrat Katha | प्रदोष व्रत कथा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं