Shaniwar Ka Vrat Kaise Karen: सप्ताह के सात दिनों शनिवार न्याय के देवता माने जाने वाले शनिदेव के लिए समर्पित है. इस दिन शनिदेव की पूजा, जप, तप और व्रत को करने से कुंडली में शनि का दोष दूर होता है और साधक पर शनिदेव की विशेष कृपा बरसती है. हिंदू धर्म में किसी भी देवी या देवता को प्रसन्न करने के लिए व्रत को उत्तम माध्यम बताया गया है. ऐसे में यदि आप शनि देव की ढैय्या, साढ़ेसाती, महादशा और उनकी वक्र दृष्टि से बचने के लिए शनिवार का व्रत रखना चाहते हैं तो आपको इसकी पूरी पूजा विधि और जरूरी नियम जरूर पता होना चाहिए. आइए शनिवार के व्रत के बारे में सभी अहम बातों को विस्तार से जानते हैं.
कब और कैसे शुरू करें शनिदेव का व्रत?
शनि संबंधी कष्टों को दूर करने और उनकी कृपा दिलाने वाले शनिवार व्रत को आप कभी भी श्रद्धा और विश्वास के साथ शुरू कर सकते हैं लेकिन यदि यह व्रत सावन के महीने में शुरु किया जाय तो इसका विशेष फल प्राप्त होता है. अगर किसी कारणवश सावन के महीने में इस व्रत को प्रारंभ न कर पाएं तो किसी भी महीने के शुक्लपक्ष में पड़ने वाले शनिवार से इस व्रत को प्रारंभ कर सकते हैं. शनिवार का व्रत कम से कम 19 व्रत जरूर करना चाहिए. यदि कोई व्रत किसी कारणवश खंडित हो जाए या फिर आप न कर पाएं तो उसे आगे करके पूरा करना चाहिए.

शनिदेव का व्रत प्रारंभ करने के लिए शनिवार के दिन स्नान-ध्यान करने के बाद शनिदेव के मंदिर जाकर सबसे पहले शनिदेव को प्रणाम करें और उनके व्रत को विधि-विधान से करने का संकल्प लें. इसके बाद शनिदेव को सरसों के तेल से स्नान कराएं. फिर शनिदेव को नीले रंग का पुष्प, धूप, दीप, काली उड़द की दाल, काला तिल, काला कपड़ा, लोहे की कील, शमी पत्र, फल, लौंग, काली इलायची, लोहे की कील आदि वस्तु, काला तिल, लौंग, आदि अर्पित करें. इसके बाद शनिवार व्रत की कथा को कहें या फिर सुनें तथा शनि देव के मंत्र का जप करते हुए उनकी 7, 11 या फिर 108 बार परिक्रमा करें.
शनिवार व्रत के उपाय

- शनिवार व्रत करने वाले व्यक्ति को शनिवार के दिन आटे से बना चौमुखा दीया में सरसों का तेल और बाती रखकर शाम के समय पीपल के नीचे जलाना चाहिए.
- शनिवार व्रत वाले दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार तेल, काला कंबल, काला जूता, काले वस्त्र आदि का दान करना चाहिए.
- शनिवार व्रत को करने वाले व्यक्ति को दिव्यांग व्यक्ति को धन एवं अन्न विशेष रूप से दान करना चाहिए.
- शनिवार व्रत का शुभ फल पाने के लिए शनि स्तोत्र या फिर शनि कवच का पाठ करना चाहिए.
शनिवार व्रत के नियम
- शनिवार व्रत करने वाले साधक को कभी किसी कामगार या फिर कहें कर्मचारी, सेवक आदि को नहीं सताना चाहिए.
- शनिवार का व्रत रखने वाले व्यक्ति को भूलकर भी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए.
- शनिवार का व्रत रखने वाले व्यक्ति को कभी किसी कमजोर व्यक्ति का अपमान करने की भूल नहीं करनी चाहिए.
- शनिवार व्रत करने वाले साधक को अन्न और तीखे मसाले का सेवन नहीं करना चाहिए.

कैसे करें शनिवार व्रत का उद्यापन?
हिंदू मान्यता के अनुसार जब शनिवार व्रत का संकल्प पूरा हो जाए तो व्यक्ति को स्नान-ध्यान करने के बाद किसी योग्य पंडित को बुलाकर विधि-विधान से शनिदेव की पूजा और उसके अंत में हवन करवाना चाहिए. शनिवार व्रत के उद्यापन में शनि से संबंधित चीजों का विशेष रूप से दान करें तथा ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद आदर के साथ दक्षिणा देकर विदा करें. शनिदेव व्रत के पारण में खिचड़ी और काली उड़द की दाल का सेवन किया जाता है.
शनिवार व्रत के लाभ
- शनि की कृपा से करियर और कारोबार में आ रही अड़चनें दूर होती हैं.
- शनिवार के व्रत को करने पर व्यक्ति पर शनिदेव की कृपा बरसती है, जिससे उसे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मनचाही सफलता मिलती है.
- शनिवार के व्रत से व्यक्ति के जीवन में अनुशासन आता है और परिश्रम करके जीवन के सभी सुखों को प्राप्त करता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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