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Shani Jayanti 2026: शनि की वक्र दृष्टि से बचना है तो उनकी पूजा में इन बातों की कभी न करें अनदेखी

Shani Puja Ke Niyam: शनि का नाम आते ही भले ही लोगों का मन किसी अनिष्ट की आशंका से घिर जाता हो लेकिन सच यह है कि शनि के समान कोई दाता नहीं है. अगर आप भी न्यायधीश कहे जाने वाले शनि देव का आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो आपको इस साल शनि जयंती पर पूजा करते समय कुछेक बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए. 

Shani Jayanti 2026: शनि की वक्र दृष्टि से बचना है तो उनकी पूजा में इन बातों की कभी न करें अनदेखी
Shani Puja Tips: शनि पूजा से जुड़े जरूरी नियम
AI Generated Image @ gemini

Shani worship rules and rituals: हिंदू धर्म में शनि को दंडाधिकारी और न्यायाधीश मानते हुए उन्हें न्याय और कर्म का स्वामी ग्रह कहा गया है, जो व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार यदि शनिदेव किसी पर प्रसन्न हो जाएं तो उसकी झोली में खुशियों का खजाना उलेड़ देते हैं, लेकिन यदि नाराज हो जाएं तो राजा को भी रंक बनने में देर नहीं लगती है. सनातन परंपरा में शनिदेव को मनाने के लिए शनिवार और शनि जयंती का दिन अत्यंत ही शुभ माना गया है. पंचांग के अनुसार मई महीने 16 तारीख को यह दोनों ही सुखद संयोग बनने जा रहा है, लेकिन ध्यान रहे कि शनि पूजा के भी अपने कुछेक नियम होते हैं, जिनका पालन करना बहुत जरूरी होता है. आइए शनि साधना से जुड़ी सभी जरूरी नियमों को विस्तार से जानते हैं. 

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  • हिंदू मान्यता के अनुसार शनि पूजा में तन और मन दोनों की पवित्रता के बहुत मायने होते हैं. ऐसे में शनि पूजा से पहले साधक को स्नान-ध्यान करने के बाद नीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार शनिदेव की पूजा हमेशा सूर्य देवता के उदय होने से पहले या फिर सूर्य देवता के अस्त होने के बाद करनी चाहिए. 
  • जिस तरह जीवन में किसी मंजिल पर पहुंचने के लिए सही दिशा मायने रखती है, कुछ वैसे ही शनि की पूजा भी सही दिशा की ओर मुंह करके करनी चाहिए. वास्तु के अनुसार शनि पश्चिम दिशा का स्वामी है, इसलिए साधक को हमेशा पश्चिम की तरफ मुंह करके शनि की पूजा और उनके मंत्र आदि का जप करना चाहिए. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार शनिदेव की पूजा करते समय कभी भी उनके ठीक सामने नहीं खड़े होना चाहिए. साधक को हमेशा शनिदेव के चित्र या मूर्ति के दाएं या फिर बाएं खड़े होकर पूजा करनी चाहिए. 
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  • शनि पूजा में नीले रंग का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. ऐसे में यदि संभव हो तो शनि की पूजा में नीले रंग के पुष्प जरूर अर्पित करें. 
  • शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए साधक को शाम के समय शनि देवता की मूर्ति और पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का चौमुखा दीया जरूर जलाना चाहिए. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार तमाम देवी-देवताओं की तरह शनि की पूजा में भी परिक्रमा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता है कि शनिदेवता और पीपल देवता की 7 बार परिक्रमा करने पर शुभ फल प्राप्त होता है. 
  • शनिदेव की साधना करने वाले साधक को भूलकर भी झूठ नहीं बोलना चाहिए और न ही किसी गलत कार्य को करना चाहिए क्योंकि शनिदेव न्यायधीश हैं और वह व्यक्ति को उसके कर्म का फल जरूर देते हैं. 
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  • ज्योतिष के अनुसार शनि की पूजा में हमेशा लोहे के बर्तन का प्रयोग करना चाहिए. शनि के साधक को कभी भूलकर भी शनिदेव की पूजा में तांबे के बर्तन का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि शनिदेव की अपने पिता के साथ नहीं बनती है. 

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  • शनि पूजा के साथ शनि जयंती पर दान करने का भी बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. ऐसे में साधक को शनि जयंती वाले दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को काला तिल, काला कंबल, चाय की पत्ती, लोहे का सामान, आदि का दान करना चाहिए. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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