10 Big thing about Shani Grah: सनातन परंपरा में सूर्यपुत्र शनि को न्याय और अनुशासन का देवता माना जाता है, जो व्यक्ति को उसके कर्म के अनुसार पूरा फल देते हैं. ज्योतिष के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि शुभ हो तो उसे सुख, संपत्ति और करियर-कारोबार में मनचाही सफलता मिलती है, लेकिन यदि अशुभ तो हो उसे इन सभी चीजों को पाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है. शनि से संबंधित तमाम तरह के दोषों को दूर करने के लिए हिंदू धर्म में शनिवार का दिन उनकी पूजा के लिए समर्पित है तो वहीं ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर पड़ने वाली शनि जयंती इसके लिए सबसे अधिक पुण्यदायी और फलदायी मानी गई है. यदि आप भी इस शनि जयंती पर शनिदेव को मनाने के लिए विशेष पूजा करने जा रहे हैं तो आपको उससे पहले शनिदेव से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण बातों को जरूर जानना चाहिए.

1. सनातन परंपरा में शनि देवता को न्याय का देवता माना जाता है जो व्यक्ति को उसके अच्छे कर्म करने पर शुभ परिणाम देते हुए उसे ऊंचाइयों पर ले जाते हैं. मान्यता है कि यदि शनि देवता किसी पर प्रसन्न हो जाएं तो उसे रंक से राजा बना देते हैं, लेकिन यदि कोई व्यक्ति आलस्य या अनैतिक कार्य करता है तो उसे वे तन, मन और धन से जुड़े कष्ट प्रदान करते हैं. ऐसे व्यक्ति को राजा से रंक बनते देर नहीं लगती है.
2. पौराणिक मान्यता के अनुसार शनि के पिता सूर्य देवता और माता छाया हैं, जबकि यमुना और भद्रा इनकी बहनें तथा यम देवता इनके भाई हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार शनिदेव की 8 पत्नियां हैं, जिनके नाम ध्वजिनी, धामिनी, कंकाली, कलहप्रिया, कंटकी, तुरंगी, महिषी और अजा हैं.
3. पौराणिक मान्यता के अनुसार शनिदेव 9 वाहनों की सवारी करते हैं. जिनमें कौआ, भैंसा, मोर, शेर, सियार, हाथी, घोड़ा, गधा और हंस शामिल हैं.

4. ज्योतिष के अनुसार शनि को मकर और कुंभ राशि का स्वामी माना जाता है जो कि तुला राशि में उच्च तो वहीं मेष में नीच का माना जाता है.
5. संस्कृत मे शनि को शनैश्चर यानि धीमी गति से चलने वाला कहा गया है. मान्यता है कि वे लंगड़ाकर चलते हैं और पूरे ढाई साल बाद राशि परिवर्तन करते हैं.
6. ज्योतिष के अनुसार शनि की ढैय्या ढाई साल तो वहीं साढ़ेसाती पूरे सात साल छह महीने तक चलती है. इस दौरान व्यक्ति को अपने जीवन में तमाम तरह के उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है.
7. हिंदू मान्यता के अनुसार शनिवार का दिन शनि देवता की पूजा के लिए समर्पित है. इसके अलावा शनि अमावस्या और शनि जयंती जैसे पर्व भी शनि पूजा के लिए अत्यंत ही शुभ और फलदायी माने गये हैं.

8. कुंडली में शनि से संबंधित दोष होने पर शास्त्रों में पूजा के कई उपाय बताए गये हैं. यदि आप शनि जयंती पर शनि से जुड़े दोष से मुक्ति पाना चाहते हैं तो आपको शनिदेव की विधि-विधानसे पूजा करके दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करना चाहिए. इसके अलावा शनि जयंती पर शनि के वैदिक मंत्र का जप भी पुण्यदायी माना गया है.
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9. ज्योतिष के अनुसार शनि को कुंडली में अनुकूल बनाने और उनके शुभ फल पाने के लिए न सिर्फ उनकी पूजा बल्कि अच्छे आचरण को भी जरूरी माना गया है. ऐसे में शनि के साधक को शनिदेव की साधना-आराधना करने के साथ अपने कामगार, मजदूर वर्ग और दिव्यांग व्यक्ति को उचित सम्मान देते हुए उनकी हर संभव मदद करते हुए उन्हें प्रसन्न रखने का प्रयास करना चाहिए.
10. ज्योतिष के अनुसार शनि से संबंधित दोष और उनसे होने वाले कष्टों से बचने के लिए व्यक्ति को तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए और शनि से जुड़ी चीजें जैसे सरसों का तेल, काला तिल, चाय की पत्ती, काला कंबल, काले वस्त्र, काला छाता, काले जूते आदि का दान जरूरतमंद लोगों को दान करना चाहिए.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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