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Rath Yatra 2026: कहां और कैसे तैयार होता है भगवान जगन्नाथ का महाभोग? जानें इससे जुड़ी खास बातें

Bhagwan Jagannath Ka Bhog: भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा की तरह उनकी रसोईं भी अपने आप में अनूठी है, जहां प्रतिदिन भगवान के लिए विशेष भोग तैयार होता है. विश्व की सबसे बड़ी रसोईं में पकाए जाने वाले भोग से लेकर महाप्रसाद के बांटे जाने तक की कहानी जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख. 

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Lord Jagannath Temple Kitchen: कैसी है भगवान जगन्नाथ की रसोई?
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Divine kitchen of Lord Jagannath: सनातन परंपरा से जुड़े चार प्रमुख धाम में से एक जगन्नाथ पुरी में निकलने वाली रथ यात्रा जितनी अलौकिक और अनूठी है, उतनी ही भगवान जगन्नाथ की रसोईं और वहां पर पकने वाला भोग है. भगवान को लगाए जाने वाले भोग के तैयार होने की न सिर्फ विधि बल्कि इससे जुड़ी पर परंपराएं भी अनोखी हैं. आइए जानते हैं कि भगवान जगन्नाथ का भोग कहां और कैसे तैयार होता है? पूरे जगत के नाथ यानि भगवान जगन्नाथ को भोग चढ़ाए जाने के बाद इस प्रसाद को श्रद्धालु कहां और कैसे प्राप्त करते हैं? साथ ही यह भी कि आखिर प्रतिदिन इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के बाद भी यह प्रसाद कभी कम क्यों नहीं पड़ता है? 

कहां और कैसे बनता है भोग?

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भगवान जगन्नाथ को चढ़ाया जाने वाला भोग प्रतिदिन मंदिर में स्थित रसोईंघर में तैयार किया जाता है. इस भोग को प्रतिदिन मिट्टी के बर्तनों में तैयार किया जाता है. जिसे तकरीबन 500 से ज्यादा रसोइये और सहायक मिलकर बनाते हैं. जिन मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग भोग के लिए किया जाता है, उसका दोबारा इस्तेमाल नहीं होता है. कहने का तात्पर्य यह कि हर बार भगवान का भोग नये मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है. भगवान का भोग पकाने के लिए सात मिट्टी के पात्रों को एक के ऊपर एक रखा जाता है. खास बात यह कि नियम के विपरीत सबसे पहले वाले मिट्टी के पात्र में भोग पहले पकता है और आखिरी वाले में सबसे बाद में पकता है. भगवान के भोग को पकाने के लिए यहां पर स्थित गंगा और यमुना नामक कुओं से पानी लिया जाता है. 

किन चीजों का लगता है भोग?

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भगवान जगन्नाथ जी को प्रतिदिन 6 प्रकार के भोग अर्पित किए जाते हैं. जिसमें भात, दाल, दालमा, खिचड़ी समेत कई व्यंजन होते हैं. इन सभी भोग को प्रतिदिन बहुत ही पवित्रता के साथ बगैर लहसुन, प्याज आदि के तैयार किया जाता है. मान्यता है कि श्री मंदिर में जो भी भोग भगवान की पूजा के समय एक स्थान विशेष भोग मंडप में रखकर अर्पित किया जाता है वह महाप्रसाद होता है. रथ यात्रा के दौरान यहां पर अनेक प्रकार का मीठा भी भोग में लगाया जाता है.

भगवान को चढ़ाए जाने वाले में 56 भोग का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है,​ जिसे स्थानीय भाषा में छप्पन पउटी भोग कहते हैं. भगवान की इस रसोईं में आम लोगों का प्रवेश वर्जित होता है और जब भोग को रसोई से भगवान जगन्नाथ के मंडप तक ले जाया जाता है, तो उस रास्ते में कोई भी व्यक्ति बीच में नहीं आता है.

कहां मिलता है भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद? 

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भगवान को लगाए गये भोग को भक्तगण मंदिर परिसर में स्थित आनंद बाजार में खरीद कर ग्रहण करते हैं. यहां पर तमाम छोटी-बड़ी मटकी में चढ़ाया गया भगवान का भोग और मीठा बिक्री के लिए उपलब्ध होता है.

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आनंद बाजार में भक्तों को महाप्रसाद में खाजा, जगन्नाथ वल्लभ, मगज लड्डू और तमाम तरह के सूखे मिष्ठान मिलते हैं. भगवान के लिए लगाए वाले तमाम तरह के भोग की खासियत है कि यहां पर कितनी भी संख्या में भक्त पहुंच जाएं, उनके लिए यह महाप्रसाद कभी भी कम नहीं पड़ता है. 

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