हिंदू धर्म में पूर्णिमा का खास महत्व माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. साथ ही चंद्रमा को जल चढ़ाने की भी परंपरा है. मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने, जरूरतमंदों को दान करने और सच्ची श्रद्धा से श्रीहरि-माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. भाद्रपद पूर्णिमा तिथि से पितृ पक्ष की शुरुआत होती है, ऐसे में इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है. आइए जानते हैं भाद्रपद पूर्णिमा कब है, साथ ही जानेंगे इस दिन स्नान-दान का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा-
भाद्रपद पूर्णिमा कब है?
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद पूर्णिमा की तिथि 25 सितंबर, शुक्रवार की रात 11 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी. इसका समापन 26 सितंबर, शनिवार की रात 10 बजकर 18 मिनट पर होगा. ऐसे में क्योंकि 26 सितंबर को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि रहेगी, इसलिए भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर को मान्य रहेगी.
स्नान और दान का शुभ समय26 सितंबर को सुबह 11 बजकर 48 मिनट से 12 बजकर 36 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा. अभिजीत मुहूर्त को पूजा-पाठ और अन्य कामों के लिए सबसे शुभ मुहूर्त माना जाता है. आप इस समय स्नान-दान कर सकते हैं. इससे अलग दोपहर 1 बजकर 17 मिनट के बाद वृद्धि योग शुरू होगा.
चंद्रोदय का समयपूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा को अर्घ्य देने का भी विशेष महत्व माना जाता है. 26 सितंबर को शाम लगभग 6 बजकर 9 मिनट पर चंद्रोदय होगा. भाद्रपद पूर्णिमा के दिन का चांद पूरे साल का सबसे महत्वपूर्ण चांद माना जाता है. चंद्र दर्शन के बाद तांबे या चांदी के लोटे में शुद्ध जल लें और उसमें कच्चा दूध, अक्षत, सफेद फूल और मिश्री डालें. इस जल से चंद्रमा को अर्घ्य देते हुए परिवार की सुख, शांति और मंगल की कामना करें.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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