अधिक मास में आने वाली परमा एकादशी को लेकर शास्त्रों में कई खास बातें बताई गई हैं. मान्यता है कि यह सिर्फ एक दिन का व्रत नहीं, बल्कि पांच दिनों तक चलने वाले एक विशेष अनुष्ठान की शुरुआत मानी जाती है. इसी वजह से इसे बाकी एकादशियों से अलग माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि इस दौरान किए गए कुछ नियम और पूजा-पाठ व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाले माने जाते हैं. यही कारण है कि परमा एकादशी आते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत, पूजा और दान-पुण्य की तैयारियों में जुट जाते हैं. इस व्रत से जुड़ी एक कथा कुबेर देव और भगवान शिव से भी जोड़ी जाती है.
कुबेर और परमा एकादशी की कथा
कुबेर को धन का देवता कहा जाता है, लेकिन पौराणिक कथाओं की मानें तो कुबेर हमेशा से संपंन्न नहीं थे. कुबेर देव भगवान शिव के परम भक्त थे. कहा जाता है कि एक समय उन्होंने भगवान शिव के बताए मार्ग पर चलते हुए परमा एकादशी से जुड़े विशेष व्रत और पूजा का पालन किया. उनकी भक्ति और तप से प्रसन्न होकर उन्हें धन का अधिपति बनने का आशीर्वाद मिला. इसी वजह से परमा एकादशी का संबंध धन और समृद्धि से भी जोड़ा जाता है. यानी महादेव के आदेश पर किए गए इस महाव्रत के फलस्वरूप कुबेर को अकूत धन-संपत्ति की प्राप्ति हुई और वे धन के देवता कहलाएं. तो आइए हम आपको बताते हैं कि क्या है पांच दिनों तक चलने वाला ये पंचरात्रिका व्रत और इसे किस तरह किया जाता है.

क्या है पंचरात्रिका व्रत?
परमा एकादशी से शुरू होकर अमावस्या तक चलने वाले पांच दिन के व्रत को पंचरात्रिका व्रत कहा जाता है. मान्यता है कि जो लोग पूरे अधिक मास के नियमों का पालन नहीं कर पाते, वे इन पांच दिनों में श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ करके भी धार्मिक फल प्राप्त कर सकते हैं. इस व्रत के दौरान 5 बातों का खास ख्याल ध्यान रखना होता है. जो कुछ इस तरह हैं-
दीपक जलाना: कई श्रद्धालु एकादशी से अमावस्या तक नियमित रूप से घी का दीपक जलाते हैं.
मन को शांत रखना: क्रोध, कटु वचन और नेगेटिव सोच से दूर रहने की सलाह दी जाती है.
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा: शाम के समय विशेष पूजा और आरती करने की परंपरा बताई गई है.
कौड़ियां और अक्षत अर्पित करना: कुछ लोग परंपरा के अनुसार भगवान विष्णु और कुबेर देव को कौड़ियां और अक्षत अर्पित करते हैं.
दान-पुण्य करना: व्रत के अंतिम दिन जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या अन्य जरूरी चीजें दान करने की परंपरा है.
श्रद्धालु अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार उपवास रखते हैं. कई लोग फलाहार करते हैं तो कुछ लोग पूरे दिन उपवास रखकर शाम को भोजन ग्रहण करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों सादा भोजन, संयम और पूजा-पाठ पर विशेष ध्यान दिया जाता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो लोग पूरे अधिक मास के नियमों का पालन नहीं कर पाते, उनके लिए पंचरात्रिका व्रत खास माना गया है. परमा एकादशी को लेकर सबसे प्रसिद्ध मान्यताओं में से एक कुबेर देव की कथा भी है. इसी वजह से कई श्रद्धालु इस व्रत को सुख-समृद्धि और आर्थिक खुशहाली से जोड़कर देखते हैं. यही कारण है कि अधिक मास में आने वाली परमा एकादशी को लेकर श्रद्धालुओं के बीच खास उत्साह देखने को मिलता है और बड़ी संख्या में लोग इस व्रत का पालन करते हैं.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
यह भी पढ़ें- Somvati Amavasya 2026: सोमवती अमावस्या पर किस उपाय से मिलेगा अखंड सौभाग्य और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं